By: Vikash Kumar (Vicky).

Ahoi Ashtami 2026 Moonrise Time: अहोई अष्टमी का पावन व्रत आज, 1 नवंबर 2026, रविवार को रखा जा रहा है। यह व्रत माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि की कामना से करती हैं। इस दिन सुबह से ही महिलाएं उपवास रखती हैं और शाम के समय अहोई माता की पूजा-अर्चना करती हैं। पूजा के बाद तारों को अर्घ्य देकर व्रत खोलने की परंपरा है। वहीं, कुछ महिलाएं चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का पारण करती हैं।
अहोई अष्टमी पर इस बार चंद्रमा देर रात दिखाई देगा। ऐसे में जिन महिलाओं ने चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोलने का संकल्प लिया है, उन्हें चांद निकलने तक इंतजार करना पड़ सकता है। आइए जानते हैं अहोई अष्टमी 2026 पर चंद्रोदय का समय, तारों के दर्शन का समय, पूजा का शुभ मुहूर्त और व्रत खोलने के सही नियम।

अहोई अष्टमी 2026 पर कब निकलेगा चांद?
अहोई अष्टमी पर चंद्रमा का उदय अलग-अलग शहरों में अलग समय पर होता है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार, दिल्ली में चंद्रोदय रात करीब 11:40 बजे बताया गया है। पटना में चांद रात करीब 11:13 बजे और रांची में करीब 11:16 बजे दिखाई देने का अनुमान है।
देवघर में स्थानीय पंचांग के अनुसार चंद्रोदय का समय रात करीब 11:02 बजे बताया गया है। हालांकि, अलग-अलग पंचांगों की गणना में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है। इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग के समय को प्राथमिकता दें।

अहोई अष्टमी 2026: पूजा और व्रत से जुड़े जरूरी समय
व्रत की तारीख: 1 नवंबर 2026, रविवार
अष्टमी तिथि प्रारंभ: 1 नवंबर को दोपहर 2:51 बजे
अष्टमी तिथि समाप्त: 2 नवंबर को दोपहर 1:10 बजे
दिल्ली में पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 5:36 बजे से 6:54 बजे तक
दिल्ली में तारों के दर्शन का समय: शाम करीब 6:00 बजे
दिल्ली में चंद्रोदय: रात करीब 11:40 बजे
ध्यान रखें कि पूजा मुहूर्त, तारों के दर्शन और चंद्रोदय का समय शहर के अनुसार बदलता है। ऊपर दिया गया पूजा मुहूर्त दिल्ली के लिए है, इसे हर शहर पर लागू न मानें।

अहोई अष्टमी पर तारों को देखकर कब खोलें व्रत?
अहोई अष्टमी पर पारंपरिक रूप से माताएं शाम के समय आकाश में तारे दिखाई देने के बाद उन्हें अर्घ्य देती हैं और व्रत खोलती हैं। इस दिन तारों को संतान की सुख-समृद्धि और लंबी आयु की कामना से अर्घ्य देने की मान्यता है।
पटना में तारों के दर्शन का अनुमानित समय शाम करीब 5:32 बजे और रांची में करीब 5:34 बजे बताया गया है। आसमान में बादल या धुंध होने पर तारे दिखाई देने में देर हो सकती है। पूजा के बाद अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार तारे देखकर व्रत का पारण किया जा सकता है।

अहोई अष्टमी की पूजा विधि क्या है?
1. सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें: अहोई अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। स्वच्छ कपड़े पहनकर संतान की सुख-समृद्धि और लंबी आयु की कामना के साथ व्रत का संकल्प लें।
2. पूजा स्थल की सफाई करें: घर के मंदिर या पूजा स्थल को साफ करें। अहोई माता की तस्वीर या दीवार पर पारंपरिक चित्र बनाकर पूजा की तैयारी करें।
3. पूजा की सामग्री एकत्र करें: पूजा के लिए रोली, अक्षत, फूल, दीपक, धूप, फल, मिठाई, जल और अन्य आवश्यक सामग्री रख लें। परिवार की परंपरा के अनुसार चांदी या मिट्टी के पात्र का भी इस्तेमाल किया जाता है।
4. अहोई माता को अर्पित करें पूजा सामग्री: शाम के समय शुभ मुहूर्त में अहोई माता की पूजा करें। दीपक जलाएं, रोली और अक्षत चढ़ाएं तथा फूल और फल अर्पित करें।
5. अहोई अष्टमी की व्रत कथा सुनें: पूजा के दौरान अहोई माता की व्रत कथा सुनें या पढ़ें। इसके बाद माता की आरती करें और संतान के अच्छे स्वास्थ्य तथा उज्ज्वल भविष्य की प्रार्थना करें।
6. तारों को अर्घ्य दें: शाम को तारे दिखाई देने पर जल से अर्घ्य दें। इसके बाद अपनी परंपरा के अनुसार व्रत खोलें। जो महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देने का नियम मानती हैं, वे चंद्रोदय के बाद पूजा और अर्घ्य देकर पारण करती हैं।

अहोई अष्टमी व्रत खोलने का सही नियम क्या है?
अहोई अष्टमी का व्रत खोलने की परंपरा अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में भिन्न हो सकती है। उत्तर भारत के कई हिस्सों में महिलाएं तारों को देखकर अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलती हैं। कुछ परिवारों में चंद्रमा के दर्शन के बाद अर्घ्य देकर पारण करने की परंपरा भी है।
इसलिए व्रत खोलने के लिए अपनी पारिवारिक और स्थानीय परंपरा का पालन करें। यदि आपने चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत खोलने का संकल्प लिया है, तो अपने शहर के चंद्रोदय समय के अनुसार तैयारी करें। लंबे समय तक निर्जला व्रत रखने में स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो सकती है, इसलिए अपनी सेहत का भी ध्यान रखें।
अहोई अष्टमी पर इन नियमों का रखें ध्यान
साफ-सफाई का रखें ध्यान: पूजा से पहले पूजा स्थल और घर को साफ रखें। पूजा में स्वच्छ वस्त्र और साफ पूजा सामग्री का इस्तेमाल करें।
व्रत में अपनी सेहत का ध्यान रखें: निर्जला व्रत हर किसी के लिए उपयुक्त नहीं होता। गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली महिलाएं, मधुमेह या अन्य स्वास्थ्य समस्या से जूझ रही महिलाएं उपवास रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लें।

पूजा के समय कथा जरूर सुनें: अहोई अष्टमी की पूजा में व्रत कथा और आरती का विशेष महत्व माना जाता है। अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा पूरी करें।
बच्चों के स्वास्थ्य की कामना करें: इस दिन अहोई माता से संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन की प्रार्थना की जाती है।
अहोई अष्टमी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अहोई अष्टमी का व्रत संतान की लंबी आयु और सुखी जीवन की कामना के लिए रखा जाता है। इस दिन अहोई माता की पूजा करने और व्रत कथा सुनने का विशेष महत्व बताया गया है। माताएं पूरे दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ उपवास रखती हैं और शाम को पूजा-अर्चना करके अपनी संतान के मंगल की प्रार्थना करती हैं।

यह पर्व मां और संतान के प्रेम, विश्वास और परिवार की खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। कई घरों में अहोई अष्टमी की पूजा के दौरान परिवार के सभी सदस्य शामिल होते हैं।
अहोई अष्टमी 2026 का व्रत 1 नवंबर, रविवार को रखा जा रहा है। इस दिन अष्टमी तिथि दोपहर 2:51 बजे से शुरू होकर 2 नवंबर को दोपहर 1:10 बजे तक रहेगी। दिल्ली में पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:36 से 6:54 बजे तक है और चंद्रोदय रात करीब 11:40 बजे होगा। पटना में चांद करीब 11:13 बजे और देवघर में स्थानीय पंचांग के अनुसार करीब 11:02 बजे निकलने का अनुमान है। तारों को देखकर व्रत खोलने वाली महिलाएं शाम के समय पूजा के बाद अर्घ्य दे सकती हैं। पूजा और पारण करते समय अपने शहर के समय तथा परिवार की परंपरा का ध्यान जरूर रखें।

इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और उपलब्ध पंचांग गणनाओं पर आधारित है। पूजा मुहूर्त, तारों के दर्शन और चंद्रोदय के समय में स्थान के अनुसार अंतर हो सकता है। व्रत और पूजा से जुड़े निर्णय लेते समय स्थानीय पंचांग तथा अपनी पारिवारिक परंपरा को प्राथमिकता दें। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर चिकित्सकीय सलाह जरूर लें।
