By: Vikash Kumar (Vicky)
आज 1 अक्टूबर 2026, गुरुवार का दिन धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। हिंदू पंचांग के अनुसार आज आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि है, जो दोपहर 12:35 बजे तक रहेगी। इसके बाद षष्ठी तिथि शुरू हो जाएगी। वर्तमान समय पितृ पक्ष का चल रहा है, इसलिए आज की तिथि श्राद्ध और पितरों से जुड़े धार्मिक कर्मों के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आज चंद्रमा वृषभ राशि में रहेगा और रोहिणी नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। पंचांग के अनुसार रोहिणी नक्षत्र सुबह 6:02 बजे से 2 अक्टूबर की सुबह 4:27 बजे तक रहेगा। इस वजह से आज के पंचांग में तिथि, नक्षत्र और योग का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं में गुरुवार का दिन भगवान विष्णु की पूजा और आराधना के लिए विशेष माना जाता है। ऐसे में आज भगवान विष्णु का ध्यान, पूजा-पाठ, दान और जरूरतमंदों की सहायता जैसे धार्मिक कार्य श्रद्धा के साथ किए जा सकते हैं।

आज की तिथि और पंचांग की पूरी जानकारी
आज 1 अक्टूबर 2026 को आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि दोपहर 12:35 बजे तक रहेगी। इसके बाद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि आरंभ होगी। पितृ पक्ष के दौरान आने वाली तिथियों में पितरों का स्मरण, तर्पण और श्राद्ध कर्म का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। वार गुरुवार है। गुरुवार को परंपरागत रूप से भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की पूजा से जोड़ा जाता है। श्रद्धालु अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार पूजा, व्रत, दान या धार्मिक पाठ कर सकते हैं।

आज का नक्षत्र: रोहिणी
आज रोहिणी नक्षत्र का संयोग बन रहा है। पंचांग के अनुसार रोहिणी नक्षत्र सुबह 6:02 बजे से शुरू होकर 2 अक्टूबर सुबह 4:27 बजे तक रहेगा। इसके बाद मृगशीर्ष नक्षत्र प्रारंभ होगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में रोहिणी को चंद्रमा से संबंधित नक्षत्र माना जाता है। आज चंद्रमा वृषभ राशि में स्थित रहेगा, इसलिए पंचांग और ज्योतिष की दृष्टि से रोहिणी नक्षत्र को दिन की प्रमुख विशेषताओं में शामिल किया जा सकता है।
आज कौन से योग बन रहे हैं?
1 अक्टूबर 2026 के पंचांग में सिद्धि और व्यतीपात योग का उल्लेख मिलता है। अलग-अलग पंचांग पद्धतियों और स्थान के अनुसार योग की समय-सीमा में अंतर हो सकता है, इसलिए किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंचांग को भी देखना उचित रहेगा।

आज का शुभ मुहूर्त
आज अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:52 बजे से 12:40 बजे तक बताया गया है। इस अवधि को परंपरागत रूप से शुभ कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि आज पंचमी तिथि दोपहर 12:35 बजे तक ही है, इसलिए किसी विशेष धार्मिक कार्य के लिए तिथि और मुहूर्त दोनों का मिलान करना बेहतर रहेगा। सुबह और दिन के अन्य शुभ समय स्थानीय स्थान के अनुसार अलग हो सकते हैं। इसलिए विवाह, गृह प्रवेश, भूमि पूजन या अन्य बड़े मांगलिक कार्यों के लिए स्थानीय पंचांग या योग्य पंडित से मुहूर्त की पुष्टि करें।
आज का राहुकाल कब रहेगा?
1 अक्टूबर 2026, गुरुवार को राहुकाल दोपहर 1:45 बजे से 3:13 बजे तक बताया गया है। धार्मिक ज्योतिषीय परंपरा में राहुकाल के दौरान नए शुभ कार्य की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है। अगर कोई जरूरी काम पहले से तय है, तो केवल राहुकाल के आधार पर निर्णय लेने के बजाय अपनी परिस्थिति और संबंधित परंपरा को ध्यान में रखना उचित रहेगा।

आज सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
आज सूर्योदय सुबह लगभग 6:22 बजे और सूर्यास्त शाम लगभग 6:10 बजे बताया गया है। हालांकि सूर्योदय और सूर्यास्त का वास्तविक समय शहर और भौगोलिक स्थिति के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है।
आज पितृ पक्ष में क्या करें?
पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों का स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करना हिंदू धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। आज पंचमी तिथि होने के कारण जिन परिवारों में पंचमी तिथि से संबंधित श्राद्ध कर्म निर्धारित है, वे अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार श्राद्ध या तर्पण कर सकते हैं। जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना, सामर्थ्य के अनुसार दान करना और पितरों का स्मरण करना भी धार्मिक परंपराओं में पुण्यकारी माना जाता है। किसी विशेष श्राद्ध कर्म के लिए अपने कुलाचार और पंडित की सलाह का पालन करना उचित रहेगा।

गुरुवार को भगवान विष्णु की पूजा कैसे करें?
धार्मिक मान्यता के अनुसार गुरुवार को भगवान विष्णु की पूजा करने से भक्त को आध्यात्मिक शांति और सकारात्मकता का अनुभव हो सकता है। सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु का ध्यान करें। इसके बाद दीपक जलाकर विष्णु जी की पूजा करें और अपनी श्रद्धा के अनुसार मंत्र या विष्णु सहस्रनाम का पाठ कर सकते हैं।
पितृ पक्ष चल रहा है, इसलिए पूजा के साथ पितरों का स्मरण करना भी अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार किया जा सकता है।
आज क्या करें?
आज सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु का ध्यान करें।
पितरों का श्रद्धापूर्वक स्मरण करें और अपनी परंपरा के अनुसार तर्पण या श्राद्ध कर्म करें।
सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन या आवश्यक वस्तुओं का दान करें।
घर में साफ-सफाई रखें और शांत वातावरण में पूजा-पाठ करें।
किसी भी धार्मिक कार्य को श्रद्धा और अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार करें।

आज क्या करने से बचें?
राहुकाल में नए शुभ कार्य की शुरुआत करने से धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बचा जाता है।
बिना जानकारी के किसी बड़े आर्थिक या संपत्ति संबंधी निर्णय में जल्दबाजी न करें।
पितृ पक्ष के दौरान परिवार की परंपराओं और धार्मिक नियमों का सम्मान करें।
किसी धार्मिक कर्मकांड को केवल दिखावे के लिए करने के बजाय श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार करें।

आज का पंचांग एक नजर में
तारीख: 1 अक्टूबर 2026
वार: गुरुवार
माह: आश्विन
पक्ष: कृष्ण पक्ष
तिथि: पंचमी दोपहर 12:35 बजे तक, इसके बाद षष्ठी
नक्षत्र: रोहिणी, 2 अक्टूबर सुबह 4:27 बजे तक
चंद्र राशि: वृषभ
योग: सिद्धि और व्यतीपात
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक
राहुकाल: दोपहर 1:45 बजे से 3:13 बजे तक
सूर्योदय: सुबह 6:22 बजे के आसपास
सूर्यास्त: शाम 6:10 बजे के आसपास

1 अक्टूबर का धार्मिक महत्व
1 अक्टूबर 2026 का दिन पितृ पक्ष के बीच पड़ रहा है और आज पंचमी से षष्ठी तिथि में परिवर्तन होगा। इसलिए आज का दिन उन परिवारों के लिए विशेष हो सकता है जिनके पूर्वजों की श्राद्ध तिथि पंचमी या षष्ठी से संबंधित है। पितृ पक्ष 27 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या के साथ समाप्त होगा।
गुरुवार होने के कारण भगवान विष्णु की पूजा का भी धार्मिक महत्व माना जाता है। ऐसे में आज पितरों का स्मरण और भगवान विष्णु की आराधना दोनों अपनी-अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार की जा सकती हैं।
आज का पंचांग तिथि, नक्षत्र, योग और धार्मिक दृष्टि से कई महत्वपूर्ण जानकारियां देता है। पंचमी तिथि दोपहर तक रहने के बाद षष्ठी शुरू होगी और रोहिणी नक्षत्र का प्रभाव 2 अक्टूबर की सुबह तक रहेगा। पितृ पक्ष के कारण आज पितरों के प्रति श्रद्धा और धार्मिक कर्मों का विशेष महत्व है। वहीं गुरुवार होने के कारण भगवान विष्णु की पूजा भी श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। ध्यान रखें कि पंचांग के समय स्थान के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकते हैं। इसलिए किसी विशेष पूजा, श्राद्ध या शुभ कार्य के लिए स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि जरूर करें।
यह लेख धार्मिक मान्यताओं, पंचांग संबंधी उपलब्ध गणनाओं और ज्योतिषीय परंपराओं पर आधारित है। पंचांग के तिथि, नक्षत्र और मुहूर्त के समय स्थान के अनुसार अंतर हो सकता है। धार्मिक मान्यताओं को व्यक्तिगत आस्था के रूप में लें। किसी भी विशेष धार्मिक अनुष्ठान या श्राद्ध कर्म के लिए अपने स्थानीय पंचांग और योग्य पंडित की सलाह लेना उचित रहेगा।

