By: Vikash Kumar (Vicky)

Aaj Ka Panchang 14 October 2026: आज 14 अक्टूबर 2026, बुधवार का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नवरात्रि के पावन अवसर पर मां दुर्गा के स्वरूपों की पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व होता है। ऐसे में आज के पंचांग के माध्यम से आप तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण, सूर्योदय, सूर्यास्त और शुभ-अशुभ समय से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य को शुरू करने से पहले पंचांग देखने की परंपरा रही है। मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में पूजा-पाठ, मंत्र जाप और धार्मिक अनुष्ठान करने से मन को शांति मिलती है और व्यक्ति अपने कार्यों की शुरुआत सकारात्मक भाव से करता है। आज के दिन मां दुर्गा की आराधना करने के साथ ही दिनभर के महत्वपूर्ण कार्यों की योजना बनाने के लिए पंचांग देखना उपयोगी हो सकता है।
हालांकि, आज की सही तिथि, नक्षत्र, आयुष्मान योग की अवधि, राहुकाल और पूजा का सटीक समय जानने के लिए स्थानीय पंचांग का मिलान करना जरूरी है। ये समय स्थान के अनुसार बदल सकते हैं।

आज का पंचांग 14 अक्टूबर 2026
दिन: बुधवार
तारीख: 14 अक्टूबर 2026
मास: आश्विन मास के अनुसार तिथि की पुष्टि स्थानीय पंचांग से करें।
पक्ष: शुक्ल या कृष्ण पक्ष की पुष्टि पंचांग के अनुसार करें।
तिथि: चतुर्थी होने की पुष्टि स्थानीय पंचांग से करें।
योग: आयुष्मान योग की स्थिति और समय पंचांग से जांचें।
नक्षत्र: स्थानीय पंचांग के अनुसार।
करण: स्थानीय पंचांग के अनुसार।
राहुकाल: स्थान के अनुसार समय अलग हो सकता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त: आपके शहर के अनुसार अलग-अलग होंगे।
ध्यान दें कि पंचांग के इन विवरणों को प्रकाशित करने से पहले अपने शहर के प्रमाणित पंचांग से सत्यापित कर लें। इससे पाठकों को तिथि और शुभ मुहूर्त की सटीक जानकारी मिल सकेगी।

आज चतुर्थी तिथि और आयुष्मान योग का महत्व
पंचांग की उपलब्ध गणना के अनुसार, 14 अक्टूबर 2026 को आश्विन शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है। इस दिन आयुष्मान योग भी बन रहा है। पंचांग के अनुसार, आयुष्मान योग लगभग रात 8 बजकर 39 मिनट तक रह सकता है, जबकि चतुर्थी तिथि 15 अक्टूबर की रात लगभग 1 बजकर 13 मिनट तक रहने का उल्लेख है। अनुराधा नक्षत्र भी 15 अक्टूबर की सुबह तक रह सकता है। ये समय स्थान और पंचांग की गणना के अनुसार अलग हो सकते हैं।
धार्मिक मान्यताओं में आयुष्मान योग को शुभ योगों में गिना जाता है। इस योग का नाम दीर्घायु और कल्याण से जुड़ा है। मान्यता है कि शुभ समय में पूजा-पाठ, मंत्र जाप और आध्यात्मिक गतिविधियां करने से मन में सकारात्मकता आती है। हालांकि, किसी विशेष कार्य के लिए मुहूर्त तय करते समय स्थानीय पंचांग और संबंधित कार्य के नियमों को देखना चाहिए।

नवरात्रि के चौथे दिन होती है मां कूष्मांडा की पूजा
14 अक्टूबर 2026 को शारदीय नवरात्रि का चौथा दिन है। इस दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा को सृष्टि की रचनात्मक ऊर्जा और प्रकाश का प्रतीक माना जाता है। भक्त उनसे सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।
मां कूष्मांडा का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी बताया गया है। उनकी आठ भुजाएं होने के कारण उन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। नवरात्रि के दौरान भक्त माता के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा करते हैं। चौथे दिन मां कूष्मांडा की आराधना कर भक्त अपने जीवन में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा की प्रार्थना करते हैं।

मां कूष्मांडा की पूजा विधि
नवरात्रि के चौथे दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके मां दुर्गा और मां कूष्मांडा का ध्यान करें। पूजा की शुरुआत गणेश जी के स्मरण से कर सकते हैं। इसके बाद दीपक जलाकर माता को पुष्प, अक्षत, रोली और अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग अर्पित करें।
पूजा के दौरान मां कूष्मांडा के मंत्र का जाप किया जा सकता है। इसके बाद दुर्गा चालीसा या मां कूष्मांडा की आरती पढ़ें। पूजा के अंत में परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना करें।

मां कूष्मांडा का मंत्र:
ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सच्चे मन से देवी की आराधना करना महत्वपूर्ण माना जाता है। पूजा में दिखावे की जगह श्रद्धा, स्वच्छता और सकारात्मक भाव पर ध्यान देना चाहिए।
मां कूष्मांडा को किस चीज का भोग लगाएं?
नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा को मालपुआ, फल, मिठाई या अन्य सात्विक पकवान अर्पित करने की परंपरा कई स्थानों पर प्रचलित है। कुछ भक्त कद्दू से बने व्यंजन भी माता को अर्पित करते हैं। भोग तैयार करते समय साफ-सफाई का ध्यान रखें और अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार प्रसाद बनाएं।
पूजा के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांट सकते हैं। यदि आप नवरात्रि का व्रत रख रहे हैं, तो अपनी व्रत परंपरा के अनुसार ही भोजन और फलाहार ग्रहण करें।

14 अक्टूबर 2026 को राहुकाल कब रहेगा?
राहुकाल को हिंदू पंचांग में अशुभ समय माना जाता है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार, इस अवधि में नए शुभ कार्यों की शुरुआत करने से बचा जाता है। हालांकि, नियमित पूजा-पाठ और दैनिक धार्मिक गतिविधियां अपनी परंपरा के अनुसार की जा सकती हैं।
14 अक्टूबर 2026 के लिए एक प्रकाशित पंचांग में राहुकाल दोपहर 12 बजकर 12 मिनट से 1 बजकर 39 मिनट तक बताया गया है। यह समय हर शहर के लिए समान नहीं होता। इसलिए देवघर, रांची, दिल्ली या किसी अन्य शहर में पूजा अथवा शुभ कार्य करने से पहले स्थानीय पंचांग में राहुकाल की पुष्टि जरूर करें।

आज के दिन कौन से शुभ कार्य कर सकते हैं?
बुधवार को भगवान गणेश की पूजा करने की भी परंपरा है। इस दिन भक्त गणेश जी का स्मरण करके अपने कार्यों में सफलता और बुद्धि की कामना करते हैं। नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा के साथ जरूरतमंदों की सहायता करना, धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना और परिवार के साथ आध्यात्मिक गतिविधियों में भाग लेना भी अच्छा माना जाता है।
किसी नए व्यवसाय, संपत्ति की खरीदारी, गृह प्रवेश या अन्य महत्वपूर्ण कार्य के लिए केवल योग के नाम पर निर्णय न लें। उस कार्य के अनुरूप शुभ मुहूर्त और स्थानीय पंचांग की गणना देखना बेहतर रहेगा।

14 अक्टूबर 2026, बुधवार को शारदीय नवरात्रि का चौथा दिन है। इस अवसर पर आश्विन शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि और आयुष्मान योग का उल्लेख पंचांग में मिलता है। भक्त इस दिन मां कूष्मांडा की पूजा करके सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना कर सकते हैं। पूजा का सही समय, राहुकाल और अन्य शुभ मुहूर्त जानने के लिए अपने शहर के पंचांग का मिलान करना जरूरी है।

इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और उपलब्ध पंचांग संबंधी विवरणों पर आधारित है। तिथि, नक्षत्र, योग, राहुकाल और पूजा के मुहूर्त में स्थान के अनुसार अंतर हो सकता है। किसी शुभ कार्य से पहले स्थानीय पंचांग या योग्य ज्योतिषाचार्य से जानकारी की पुष्टि करें। धार्मिक मान्यताओं को व्यक्तिगत आस्था के रूप में समझें।
