By: Vikash Kumar (Vicky)
Aaj Ka Panchang 19 October 2026: आज 19 अक्टूबर 2026, दिन सोमवार है। शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर आज का दिन मां दुर्गा के भक्तों के लिए बेहद खास माना जा रहा है। आज अष्टमी तिथि के बाद महानवमी तिथि का आरंभ हो रहा है। इस वजह से कई श्रद्धालु महाअष्टमी और महानवमी की पूजा, कन्या पूजन तथा हवन को लेकर शुभ मुहूर्त जानना चाहते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि की अष्टमी पर मां महागौरी और नवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। इस दिन मां दुर्गा के भक्त व्रत रखकर माता की आराधना करते हैं और सुख-समृद्धि, परिवार की खुशहाली तथा जीवन में शांति की कामना करते हैं। नवरात्रि की अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन का विशेष महत्व है। इस दौरान छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है और उन्हें भोजन कराकर उपहार दिए जाते हैं। अगर आप भी आज कन्या पूजन, हवन या मां दुर्गा की विशेष पूजा करने की तैयारी कर रहे हैं, तो जानिए 19 अक्टूबर 2026 का पंचांग, अष्टमी-नवमी तिथि, शुभ मुहूर्त, राहुकाल, नक्षत्र और पूजा से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें।

आज का पंचांग 19 अक्टूबर 2026 (Aaj Ka Panchang Today)
– दिन: सोमवार
– तिथि: आश्विन मास, शुक्ल पक्ष की अष्टमी सुबह लगभग 10:51 बजे तक, इसके बाद नवमी तिथि
– नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा दोपहर लगभग 3:38 बजे तक, इसके बाद श्रवण नक्षत्र
– योग: धृति योग
– विक्रम संवत: 2083
– शक संवत: 1948
– पक्ष: शुक्ल पक्ष
– पर्व: महाष्टमी, दुर्गाष्टमी और महानवमी तिथि का संयोग
पंचांग में तिथि और मुहूर्त की गणना स्थान के अनुसार कुछ मिनट अलग हो सकती है। इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग से समय का मिलान जरूर करें।

महाअष्टमी और महानवमी का संयोग क्यों है खास?
शारदीय नवरात्रि में अष्टमी और नवमी दोनों तिथियों का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। अष्टमी के दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है। वहीं, महानवमी पर मां के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है। इस वर्ष 19 अक्टूबर की सुबह अष्टमी तिथि रहेगी और सुबह लगभग 10:51 बजे के बाद नवमी तिथि शुरू हो जाएगी। इस कारण एक ही दिन अष्टमी और नवमी दोनों तिथियां पड़ रही हैं। हालांकि, उदया तिथि, स्थानीय परंपरा और पूजा की विधि के अनुसार कुछ श्रद्धालु नवमी की पूजा 20 अक्टूबर को भी कर सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अष्टमी पर मां महागौरी की पूजा करने से सुख-शांति की कामना की जाती है, जबकि नवमी पर मां सिद्धिदात्री की आराधना ज्ञान, सिद्धि और समृद्धि के लिए की जाती है।

कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त क्या है?
नवरात्रि में कन्या पूजन को विशेष धार्मिक महत्व दिया जाता है। इस दौरान छोटी कन्याओं को मां दुर्गा के नौ स्वरूपों का प्रतीक मानकर उनका पूजन किया जाता है। कन्याओं को भोजन कराने, दक्षिणा देने और उनका आशीर्वाद लेने की परंपरा है।
19 अक्टूबर को कन्या पूजन के लिए बताए गए प्रमुख समय इस प्रकार हैं।
– अमृत काल: सुबह 8:29 बजे से 10:16 बजे तक (पटना के पंचांग में दिया गया समय)
– अभिजीत मुहूर्त: लगभग सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:29 बजे तक (प्रकाशित मुहूर्त विवरण के अनुसार)
ध्यान दें कि ये समय अलग-अलग पंचांगों और स्थानों के अनुसार भिन्न हो सकते हैं। अष्टमी की तिथि सुबह लगभग 10:51 बजे समाप्त होने के बाद नवमी शुरू हो जाती है। इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा का समय तय करने से पहले स्थानीय पंचांग देखना उचित रहेगा।

महानवमी पर कन्या पूजन कैसे करें?
महानवमी के अवसर पर घरों और मंदिरों में मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। कई परिवार इस दिन कन्या पूजन के साथ हवन भी करते हैं। पूजा के लिए आप इन सामान्य परंपराओं का पालन कर सकते हैं।
1. सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को साफ करें।
2. मां दुर्गा और मां सिद्धिदात्री की श्रद्धापूर्वक पूजा करें।
3. अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार कन्याओं को आमंत्रित करें और सम्मानपूर्वक उनके पैर धोकर या तिलक लगाकर पूजन करें।
4. कन्याओं को हलवा, पूरी, चना या परिवार की परंपरा के अनुसार भोजन कराएं।
5. अपनी सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा या उपहार दें और उनका आशीर्वाद लें।
6. अंत में मां दुर्गा से परिवार की सुख-शांति और खुशहाली की प्रार्थना करें।
कन्या पूजन में कन्याओं का सम्मान, स्वच्छता और उनकी सहजता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। पूजा की विधि परिवार और क्षेत्र की परंपराओं के अनुसार अलग हो सकती है।

आज का राहुकाल कब है?
सोमवार को राहुकाल के समय को पारंपरिक ज्योतिष में शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। पटना के लिए उपलब्ध पंचांग के अनुसार, 19 अक्टूबर 2026 को राहुकाल सुबह लगभग 7:16 बजे से 8:42 बजे तक बताया गया है। राहुकाल का समय शहर के सूर्योदय और सूर्यास्त के अनुसार बदलता है। इसलिए दूसरे शहरों में रहने वाले श्रद्धालु अपने स्थानीय पंचांग से इसकी पुष्टि करें। पहले से तय धार्मिक अनुष्ठानों को लेकर परिवार की परंपरा और स्थानीय पुरोहित की सलाह को भी महत्व दें।

मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री की पूजा का महत्व
नवरात्रि की अष्टमी तिथि मां महागौरी को समर्पित मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी की पूजा करने से सुख, शांति और समृद्धि की कामना की जाती है। इस दिन कई श्रद्धालु व्रत रखते हैं, दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं और कन्या पूजन करते हैं। वहीं, महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। उन्हें देवी दुर्गा का नौवां स्वरूप माना जाता है। भक्त इस दिन पूजा, मंत्र जाप और हवन के माध्यम से देवी का आशीर्वाद प्राप्त करने की प्रार्थना करते हैं। कई स्थानों पर नवमी के दिन नवरात्रि के व्रत का पारण भी किया जाता है।

क्या 20 अक्टूबर को भी कर सकते हैं कन्या पूजन?
इस साल अष्टमी और नवमी की तिथियों को लेकर श्रद्धालुओं के बीच असमंजस हो सकता है। पंचांग के अनुसार, नवमी तिथि 19 अक्टूबर को सुबह लगभग 10:51 बजे शुरू होकर 20 अक्टूबर को दोपहर लगभग 12:50 बजे तक रहेगी। इसलिए कुछ परंपराओं में 19 अक्टूबर को नवमी पूजा की जाती है, जबकि उदया तिथि को महत्व देने वाले श्रद्धालु 20 अक्टूबर को भी पूजा और कन्या पूजन कर सकते हैं। पूजा की तारीख और विधि तय करते समय अपने क्षेत्र के पंचांग तथा परिवार की परंपरा को प्राथमिकता दें।

इस लेख में दी गई पंचांग, शुभ मुहूर्त और धार्मिक अनुष्ठानों से संबंधित जानकारी पारंपरिक हिंदू पंचांगों एवं धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। तिथि, नक्षत्र और मुहूर्त की गणना स्थान तथा पंचांग पद्धति के अनुसार अलग हो सकती है। इसे धार्मिक एवं सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। पूजा से संबंधित महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले स्थानीय पंचांग या योग्य पुरोहित से परामर्श करें।


