By: Vikash Kumar (Vicky)
Aaj Ka Panchang 25 September 2026: आज शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी का पावन पर्व मनाया जा रहा है। यह दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा और गणपति बप्पा के विसर्जन के लिए विशेष माना जाता है। गणेश चतुर्थी से शुरू हुआ गणेशोत्सव अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन के साथ संपन्न होता है। इस दिन भक्त श्रद्धा और भावनाओं के साथ बप्पा को विदाई देते हैं और अगले वर्ष फिर आने की कामना करते हैं। वहीं अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णु की पूजा कर अनंत सूत्र धारण करने की भी परंपरा है।

25 सितंबर 2026 का पंचांग
आज भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि है। पंचांग गणना के अनुसार चतुर्दशी तिथि का आरंभ 24 सितंबर 2026 की रात करीब 11:17 बजे हुआ और इसका समापन 25 सितंबर की रात करीब 11:08 बजे होगा। उदया तिथि के आधार पर अनंत चतुर्दशी का पर्व 25 सितंबर को मनाया जा रहा है।
दिन: शुक्रवार
तारीख: 25 सितंबर 2026
पर्व: अनंत चतुर्दशी
पक्ष: शुक्ल पक्ष
तिथि: चतुर्दशी
चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 24 सितंबर रात 11:17 बजे
चतुर्दशी तिथि समाप्त: 25 सितंबर रात 11:08 बजे
विशेष: गणेश विसर्जन और अनंत चतुर्दशी पूजा

अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णु की पूजा का शुभ समय
अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा की जाती है। उपलब्ध पंचांग जानकारी के अनुसार 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पूजा के लिए सुबह 6:28 बजे से रात 11:06 बजे तक का समय बताया गया है। स्थानीय सूर्योदय और पंचांग गणना के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने के बाद अनंत सूत्र धारण किया जाता है। अनंत सूत्र में 14 गांठें लगाई जाती हैं, जिन्हें धार्मिक परंपरा में 14 लोकों का प्रतीक माना जाता है। भक्त सुख, शांति, समृद्धि और परिवार की मंगलकामना के लिए भगवान अनंत की आराधना करते हैं।

गणेश विसर्जन के लिए क्यों खास है आज का दिन?
अनंत चतुर्दशी गणेश भक्तों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। गणेश चतुर्थी पर घरों और पंडालों में विराजमान किए गए गणपति बप्पा को आज श्रद्धापूर्वक विदाई दी जाती है। कई स्थानों पर इस दिन बड़े स्तर पर गणेश विसर्जन शोभायात्राएं निकाली जाती हैं। भक्त ढोल-नगाड़ों और जयकारों के साथ बप्पा को विदाई देते हैं और अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना करते हैं।
बप्पा के विसर्जन से पहले क्या करें?
गणेश विसर्जन से पहले घर में भगवान गणेश की विधिवत पूजा करें। उन्हें फूल, दूर्वा, मोदक और अन्य प्रसाद अर्पित करें। इसके बाद गणपति आरती करें और परिवार के सभी सदस्य बप्पा से सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करें। विसर्जन के समय गणपति की प्रतिमा को सम्मानपूर्वक ले जाएं। पर्यावरण की दृष्टि से प्राकृतिक मिट्टी से बनी प्रतिमा का उपयोग करना और स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्धारित सुरक्षित विसर्जन स्थल का इस्तेमाल करना बेहतर होता है।

अनंत चतुर्दशी पर अनंत सूत्र क्यों बांधा जाता है?
अनंत चतुर्दशी पर अनंत सूत्र बांधने की विशेष परंपरा है। इसमें 14 गांठें लगाई जाती हैं। धार्मिक मान्यताओं में इन गांठों का संबंध 14 लोकों से बताया जाता है। पूजा के बाद भक्त इसे हाथ में धारण करते हैं और भगवान विष्णु से परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और जीवन में आने वाली परेशानियों से रक्षा की प्रार्थना करते हैं।

अनंत चतुर्दशी पूजा की सरल विधि
सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें और पूजा स्थल की सफाई करें। इसके बाद भगवान विष्णु की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। भगवान को पीले फूल, फल, पंचामृत, धूप और दीप अर्पित करें। अनंत चतुर्दशी व्रत का संकल्प लें और भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप का ध्यान करें। अनंत सूत्र को पूजा में रखने के बाद विधि-विधान से पूजा करें और अंत में आरती करें।

आज के दिन क्या करें और किन बातों का रखें ध्यान?
अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु और गणपति की श्रद्धापूर्वक पूजा करना शुभ माना जाता है। घर में शांति बनाए रखें और पूजा के दौरान मन को शांत रखें। गणेश विसर्जन करते समय जल स्रोतों की स्वच्छता का भी ध्यान रखें। स्थानीय प्रशासन द्वारा बनाए गए विसर्जन स्थल और सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। पंचांग के मुहूर्त स्थान और सूर्योदय के अनुसार बदल सकते हैं। इसलिए किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान के लिए अपने स्थानीय पंचांग या पुरोहित से समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।

आज का धार्मिक महत्व
अनंत चतुर्दशी भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की आराधना और गणपति बप्पा की विदाई, दोनों के कारण विशेष महत्व रखती है। यह दिन भक्तों को श्रद्धा, संयम और आध्यात्मिक विश्वास से जुड़ने का अवसर देता है। गणेश विसर्जन के साथ भक्त बप्पा को भावपूर्ण विदाई देते हैं और उनके अगले आगमन की प्रतीक्षा करते हैं। वहीं भगवान अनंत की पूजा परिवार में सुख-समृद्धि और शांति की कामना के साथ की जाती है।

इस लेख में दी गई पंचांग, तिथि, मुहूर्त और धार्मिक मान्यताओं से संबंधित जानकारी उपलब्ध पंचांग स्रोतों और प्रचलित धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। अलग-अलग शहरों, पंचांगों और स्थानीय सूर्योदय के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है। किसी विशेष पूजा, व्रत या धार्मिक अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंचांग अथवा विद्वान पंडित से पुष्टि जरूर करें।

