By: Mala Mandal
सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। हर महीने आने वाली एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है, लेकिन ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली अपरा एकादशी को बेहद पुण्यदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को करने से व्यक्ति को अपार पुण्य, धन-धान्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि इसे “अपरा” यानी अपार फल देने वाली एकादशी कहा जाता है।

कई लोग इस बात को लेकर भ्रमित हैं कि साल 2026 में अपरा एकादशी 13 मई को मनाई जाएगी या 14 मई को। वैदिक पंचांग के अनुसार इस बार अपरा एकादशी का व्रत 13 मई 2026, बुधवार को रखा जाएगा। आइए जानते हैं सही तारीख, एकादशी तिथि, पारण समय, पूजा विधि और इस व्रत का धार्मिक महत्व।
अपरा एकादशी 2026 की सही तारीख
वैदिक पंचांग के अनुसार अपरा एकादशी की तिथि 12 मई 2026 को दोपहर 02 बजकर 52 मिनट से शुरू होगी और 13 मई 2026 को दोपहर 01 बजकर 29 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर अपरा एकादशी का व्रत 13 मई 2026, बुधवार को रखा जाएगा।

अपरा एकादशी 2026 पारण समय
एकादशी व्रत का पारण 14 मई 2026 को किया जाएगा।
पारण का शुभ समय सुबह 05 बजकर 31 मिनट से 08 बजकर 14 मिनट तक रहेगा।
वहीं द्वादशी तिथि का समापन सुबह 11 बजकर 20 मिनट पर होगा।
अपरा एकादशी क्यों मानी जाती है खास
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अपरा एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति के सभी पापों का नाश हो जाता है। पुराणों में बताया गया है कि इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा करने से विशेष फल मिलता है। इस व्रत को जलक्रीड़ा एकादशी, अचला एकादशी और भद्रकाली एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।

कहते हैं जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत को करता है, उसे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही जीवन में आने वाली आर्थिक परेशानियां, रोग और दोष दूर होने लगते हैं। विष्णु पुराण के अनुसार यह व्रत व्यक्ति को मोक्ष और बैकुंठ धाम की प्राप्ति भी कराता है।
अपरा एकादशी पूजा विधि
अपरा एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और घर की साफ-सफाई करें। इसके बाद पीले रंग के वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थान पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। भगवान को पीले फूल, तुलसी दल, फल और पंचामृत अर्पित करें। इसके बाद विष्णु सहस्रनाम और अपरा एकादशी व्रत कथा का पाठ करें। शाम के समय तुलसी के पौधे के सामने घी का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। अंत में भगवान विष्णु की आरती कर प्रसाद वितरित करें।

अपरा एकादशी व्रत में क्या करें
इस दिन भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है। जरूरतमंद लोगों को दान करें और सात्विक भोजन ग्रहण करें। व्रत के दौरान मन, वचन और कर्म की पवित्रता बनाए रखना बेहद जरूरी माना गया है।

अपरा एकादशी में क्या न करें
एकादशी के दिन चावल खाने से बचना चाहिए। तामसिक भोजन, क्रोध और गलत विचारों से दूर रहने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।

अपरा एकादशी का धार्मिक महत्व
ज्योतिष और धर्म शास्त्रों के अनुसार अपरा एकादशी का व्रत जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाता है। जो लोग आर्थिक संकट, मानसिक तनाव या जीवन की परेशानियों से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह व्रत बेहद फलदायी माना जाता है। भगवान विष्णु की कृपा से व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि और शांति आती है।
यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों और मान्यताओं के अनुसार तिथि और मुहूर्त में अंतर संभव है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान से पहले संबंधित विशेषज्ञ या आचार्य की सलाह अवश्य लें।

