By: Vikash kumar (Vicky)

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी से जुड़े मामले में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। जांच कर रही टीम ने साइबर सेल की मदद से आरोपियों के मोबाइल फोन का डिलीट किया गया डेटा रिकवर कर लिया है। शुरुआती जांच में सामने आए डिजिटल सबूतों ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है। पुलिस का दावा है कि रिकवर किए गए डेटा से 2 करोड़ रुपये से अधिक की कथित हेराफेरी और चोरी से जुड़े नए सुराग मिले हैं।

यह मामला सामने आने के बाद से ही पूरे देश की नजर इस जांच पर बनी हुई है। राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और यहां आने वाला चढ़ावा पूरी पारदर्शिता के साथ मंदिर प्रबंधन के माध्यम से संभाला जाता है। ऐसे में चढ़ावे की कथित चोरी से जुड़े आरोपों ने लोगों के बीच चिंता बढ़ा दी है।
साइबर सेल ने रिकवर किया डिलीट डेटा
जांच अधिकारियों के अनुसार आरोपियों ने अपने मोबाइल फोन से कई महत्वपूर्ण फाइलें, चैट, फोटो, वीडियो और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड डिलीट कर दिए थे। हालांकि आधुनिक डिजिटल फॉरेंसिक तकनीक की मदद से साइबर सेल ने इन फाइलों का बड़ा हिस्सा रिकवर कर लिया है।
पुलिस का कहना है कि बरामद डेटा में कई ऐसे दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड मिले हैं जो कथित आर्थिक गड़बड़ी की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इन सबूतों की फॉरेंसिक जांच भी कराई जा रही है ताकि अदालत में इन्हें मजबूत साक्ष्य के रूप में पेश किया जा सके।
2 करोड़ रुपये से अधिक की कथित हेराफेरी के संकेत
सूत्रों के मुताबिक रिकवर किए गए मोबाइल डेटा में ऐसे डिजिटल रिकॉर्ड मिले हैं जिनसे 2 करोड़ रुपये से अधिक की कथित चोरी या वित्तीय अनियमितता के संकेत मिले हैं। हालांकि पुलिस ने अभी तक इस राशि की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

जांच एजेंसियां बैंक लेनदेन, डिजिटल भुगतान, कॉल रिकॉर्ड, चैट हिस्ट्री और अन्य इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों का मिलान कर रही हैं। यदि सभी सबूत आपस में मेल खाते हैं तो यह मामला और भी बड़ा रूप ले सकता है।
कई पहलुओं से हो रही जांच
पुलिस केवल मोबाइल डेटा तक सीमित नहीं है। जांच टीम सीसीटीवी फुटेज, बैंक रिकॉर्ड, कर्मचारियों के बयान, वित्तीय दस्तावेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भी जांच कर रही है।

अधिकारियों का कहना है कि हर पहलू की निष्पक्ष जांच की जा रही है ताकि किसी भी निर्दोष व्यक्ति को परेशानी न हो और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डिजिटल फॉरेंसिक बना सबसे बड़ा हथियार
आज के समय में डिजिटल फॉरेंसिक जांच अपराधों को सुलझाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है। कई मामलों में आरोपी मोबाइल से डेटा डिलीट कर देते हैं, लेकिन विशेषज्ञ तकनीक की मदद से उसे दोबारा रिकवर कर लिया जाता है।
इस मामले में भी साइबर सेल की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रिकवर किए गए डेटा के आधार पर पुलिस पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही है।

श्रद्धालुओं की नजर जांच पर
राम मंदिर देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर के करोड़ों हिंदू श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे से जुड़े किसी भी विवाद पर लोगों की विशेष नजर रहती है।
श्रद्धालुओं की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

पुलिस ने क्या कहा?
जांच अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच लगातार जारी है और अभी कई महत्वपूर्ण तथ्यों की पुष्टि की जानी बाकी है। रिकवर किए गए डिजिटल डेटा का तकनीकी विश्लेषण किया जा रहा है।
पुलिस का कहना है कि पर्याप्त सबूत मिलने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

क्या बढ़ सकती हैं आरोपियों की मुश्किलें?
यदि मोबाइल डेटा में मिले डिजिटल सबूत अदालत में प्रमाणित हो जाते हैं तो आरोपियों की कानूनी मुश्किलें काफी बढ़ सकती हैं। डिजिटल साक्ष्य आज अदालतों में महत्वपूर्ण प्रमाण के रूप में स्वीकार किए जाते हैं, बशर्ते उनकी सत्यता और फॉरेंसिक जांच पूरी तरह प्रमाणित हो।
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में डिलीट मोबाइल डेटा की रिकवरी जांच के लिए बड़ा मोड़ साबित हो सकती है। पुलिस और साइबर सेल द्वारा जुटाए गए नए डिजिटल सबूत जांच को नई दिशा दे सकते हैं। हालांकि अंतिम सच्चाई जांच पूरी होने और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल पूरे देश की नजर इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच पर बनी हुई है।

