By: Vikash Kumar (Vicky)
Acidity Causes and H. pylori Infection: अगर आपको बार-बार सीने में जलन, खट्टी डकार, पेट में दर्द या गैस की शिकायत रहती है और दवा लेने के बाद भी समस्या दोबारा हो जाती है, तो इसे सिर्फ सामान्य गैस या एसिडिटी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई बार इसके पीछे पेट में मौजूद एक बैक्टीरिया भी जिम्मेदार हो सकता है, जिसे हेलिकोबैक्टर पाइलोरी (H. pylori) कहा जाता है। H. pylori एक ऐसा बैक्टीरिया है जो पेट की अंदरूनी परत में संक्रमण पैदा कर सकता है। कई लोगों में इसके बावजूद कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते, जबकि कुछ लोगों में लंबे समय तक पेट की परेशानी बनी रह सकती है। यह बैक्टीरिया पेट में सूजन, गैस्ट्राइटिस और पेप्टिक अल्सर जैसी समस्याओं से जुड़ा हो सकता है।

बार-बार एसिडिटी होने पर H. pylori का क्यों आता है नाम?
आमतौर पर एसिडिटी का कारण ज्यादा मसालेदार या तला-भुना खाना, ज्यादा चाय-कॉफी, देर रात भोजन करना, मोटापा, तनाव या गैस्ट्रोएसोफेजियल रिफ्लक्स जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लेकिन अगर पेट की परेशानी लंबे समय तक बनी रहती है या इलाज के बावजूद बार-बार वापस आती है, तो डॉक्टर कुछ अन्य कारणों की जांच कर सकते हैं। H. pylori पेट की म्यूकोसल लाइनिंग में रहकर सूजन पैदा कर सकता है। इससे कुछ लोगों में पेट दर्द, जलन, अपच और अन्य पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

H. pylori संक्रमण के क्या लक्षण हो सकते हैं?
हर व्यक्ति में इसके लक्षण एक जैसे नहीं होते। कई संक्रमित लोगों में कोई लक्षण भी नहीं दिखाई देता। लेकिन जिन लोगों में परेशानी होती है, उनमें कुछ सामान्य लक्षण देखे जा सकते हैं। पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द या जलन, बार-बार अपच होना, पेट फूलना, बार-बार डकार आना, मतली, खाना खाने के बाद असहज महसूस होना और भूख में बदलाव जैसे लक्षण हो सकते हैं। कुछ मामलों में पेप्टिक अल्सर होने पर दर्द ज्यादा स्पष्ट हो सकता है। इसलिए लगातार पेट की समस्या रहने पर खुद से लंबे समय तक एसिडिटी की दवा लेते रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

H. pylori का पता कैसे चलता है?
H. pylori संक्रमण की पुष्टि केवल लक्षण देखकर नहीं की जा सकती। इसके लिए डॉक्टर कुछ विशेष जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।
1. यूरिया ब्रीथ टेस्ट
यह H. pylori की जांच के लिए इस्तेमाल होने वाला एक सामान्य गैर-आक्रामक टेस्ट है। इसमें मरीज को एक विशेष पदार्थ दिया जाता है और सांस के नमूने की जांच की जाती है। H. pylori मौजूद होने पर टेस्ट में उसके संकेत मिल सकते हैं।
2. स्टूल एंटीजन टेस्ट
इस जांच में मल के नमूने से H. pylori के एंटीजन की जांच की जाती है। यह भी संक्रमण का पता लगाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला तरीका है।

3. एंडोस्कोपी और बायोप्सी
कुछ परिस्थितियों में डॉक्टर ऊपरी GI एंडोस्कोपी की सलाह दे सकते हैं। इसमें कैमरे की मदद से पेट और ऊपरी पाचन तंत्र की जांच की जाती है। जरूरत पड़ने पर पेट की अंदरूनी परत से छोटा सा ऊतक नमूना लेकर H. pylori की जांच की जा सकती है।
4. ब्लड टेस्ट
कुछ जगहों पर H. pylori के खिलाफ एंटीबॉडी की जांच के लिए ब्लड टेस्ट भी किया जाता है। हालांकि, इससे यह पता लगाना मुश्किल हो सकता है कि संक्रमण वर्तमान में सक्रिय है या पहले हो चुका था। इसलिए डॉक्टर आपकी स्थिति के अनुसार उचित टेस्ट चुनते हैं।

H. pylori होने पर क्या इलाज होता है?
अगर जांच में H. pylori संक्रमण की पुष्टि होती है तो इसका इलाज डॉक्टर की सलाह से किया जाता है। आमतौर पर उपचार में एक से अधिक दवाओं का संयोजन इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें एसिड कम करने वाली दवा और बैक्टीरिया को खत्म करने वाली एंटीबायोटिक दवाएं शामिल हो सकती हैं। कौन-सी दवा, कितनी मात्रा में और कितने दिनों तक लेनी है, यह डॉक्टर स्थानीय एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस और मरीज की स्थिति के अनुसार तय करते हैं। इसलिए बिना जांच या डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक लेना सही नहीं है।

क्या हर एसिडिटी H. pylori की वजह से होती है?
नहीं। बार-बार एसिडिटी होने का मतलब यह नहीं है कि आपको H. pylori संक्रमण ही है। एसिडिटी के कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं। इसलिए केवल इंटरनेट पर लक्षण पढ़कर खुद से H. pylori की दवा शुरू करना उचित नहीं है। अगर एसिडिटी बार-बार हो रही है, लंबे समय से बनी हुई है या सामान्य उपायों से राहत नहीं मिल रही है, तो डॉक्टर से जांच और सही कारण का पता लगाना जरूरी है।

इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
अगर पेट की परेशानी के साथ लगातार उल्टी, खून की उल्टी, काले रंग का मल, बिना कारण वजन कम होना, निगलने में परेशानी, लगातार तेज पेट दर्द या खून की कमी जैसे लक्षण दिखाई दें तो जल्द चिकित्सकीय सलाह लें। ऐसे लक्षणों को केवल गैस या एसिडिटी मानकर घरेलू उपचार करते रहना ठीक नहीं है।

एसिडिटी से बचने के लिए क्या करें?
एसिडिटी की समस्या कम करने के लिए भोजन का समय नियमित रखने की कोशिश करें। बहुत ज्यादा तला-भुना और मसालेदार भोजन कम करें। जरूरत से ज्यादा चाय-कॉफी या ऐसे खाद्य पदार्थों से बचें जिनसे आपको व्यक्तिगत रूप से एसिडिटी बढ़ती है। रात में खाना खाने के तुरंत बाद लेटने से बचें और वजन अधिक होने पर धीरे-धीरे स्वस्थ तरीके से वजन नियंत्रित करने की कोशिश करें।
सबसे जरूरी बात यह है कि अगर एसिडिटी बार-बार हो रही है तो केवल गैस की दवा लेकर समस्या को दबाने के बजाय उसके कारण का पता लगाना चाहिए।

यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। बार-बार होने वाली एसिडिटी के कई कारण हो सकते हैं और केवल लक्षणों के आधार पर H. pylori संक्रमण की पुष्टि नहीं की जा सकती। किसी भी एंटीबायोटिक या अन्य दवा का सेवन डॉक्टर की सलाह के बिना न करें। लगातार या गंभीर लक्षण होने पर योग्य चिकित्सक से जांच और उपचार कराएं।

