पटना/रांची: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण की तैयारियों के बीच राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस बीच झारखंड के मंत्री संजय यादव पर आचार संहिता उल्लंघन का मामला दर्ज हुआ है। यह FIR उस वक्त दर्ज की गई जब उन्होंने बिहार में एक चुनावी सभा के दौरान ऐसा बयान दिया जिसे चुनाव आयोग ने आचार संहिता के खिलाफ माना। जानकारी के अनुसार, संजय यादव, जो झारखंड सरकार में मंत्री हैं, हाल ही में बिहार में अपने राजनीतिक सहयोगियों के समर्थन में एक चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने सीधे तौर पर विपक्षी दलों पर तीखा हमला किया और धर्म व जाति से जुड़े संदर्भों का इस्तेमाल किया, जिससे मामला बिगड़ गया।
FIR का आधार – चुनाव आयोग की सख्ती
स्थानीय प्रशासन ने बताया कि चुनाव आयोग के निर्देश पर FIR दर्ज की गई है। FIR में संजय यादव पर भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई है। अधिकारी ने बताया कि यह कार्रवाई चुनाव आयोग की निगरानी टीम द्वारा वीडियो साक्ष्य के आधार पर की गई। बिहार के मधुबनी जिले के निर्वाचन अधिकारी ने पुष्टि की कि रैली का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जांच शुरू की गई। जांच के दौरान पाया गया कि मंत्री संजय यादव ने आचार संहिता की मर्यादा का उल्लंघन किया है।
क्या था विवादित बयान?
सूत्रों के मुताबिक, संजय यादव ने रैली में कहा था कि “बिहार की जनता को अब तय करना होगा कि कौन उनके जातीय और धार्मिक हितों की रक्षा करेगा।” इस बयान को आयोग ने ‘धार्मिक भावनाएं भड़काने वाला’ करार दिया। हालांकि, मंत्री ने बाद में सफाई दी कि उनका बयान “गलत अर्थों में पेश किया गया।” उन्होंने कहा कि “मैंने सिर्फ इतना कहा था कि जनता को विकास और न्याय के आधार पर वोट देना चाहिए, न कि किसी जाति या धर्म के नाम पर।”
विपक्ष ने साधा निशाना
वहीं, NDA गठबंधन ने इसे “महागठबंधन की हताशा” करार दिया। बीजेपी के प्रवक्ता ने कहा, “जब जनता से जुड़ाव खत्म हो जाता है, तो कुछ नेता चुनावी माहौल बिगाड़ने की कोशिश करते हैं। चुनाव आयोग को ऐसे मामलों में सख्त कदम उठाने चाहिए।” जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष ने भी कहा कि यह मामला बिहार की राजनीति को दूषित करने की कोशिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि “बाहरी राज्यों से आने वाले नेता बिहार के शांतिपूर्ण चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।”
RJD की सफाई
दूसरी ओर, RJD ने संजय यादव का बचाव किया है। पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि “संजय यादव ने कोई गलत बात नहीं की। बीजेपी और जेडीयू मिलकर मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे मामलों को तूल दे रहे हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि “चुनाव आयोग को निष्पक्षता से काम करना चाहिए और हर पार्टी के नेताओं के बयानों की समान रूप से जांच करनी चाहिए।”
चुनाव आयोग की सख्त निगरानी
बिहार में जैसे-जैसे चुनावी प्रचार तेज हो रहा है, चुनाव आयोग ने आचार संहिता के उल्लंघन पर शून्य-सहिष्णुता नीति अपनाई है। अब तक कई नेताओं के खिलाफ चेतावनी, नोटिस और FIR दर्ज हो चुके हैं।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि चाहे नेता किसी भी राज्य के हों, अगर वे बिहार में चुनावी प्रचार में हिस्सा लेते हैं तो उन्हें आचार संहिता का पालन करना होगा।
क्या होगा आगे?
कानूनी जानकारों के अनुसार, इस FIR के बाद मंत्री संजय यादव को स्पष्टीकरण देना होगा, और अगर आयोग को उनका जवाब असंतोषजनक लगा, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। संभावना है कि चुनाव आयोग उन्हें आगामी प्रचार से रोकने या चेतावनी जारी करने का आदेश दे सकता है। हालांकि, अभी तक इस मामले में आगे की सुनवाई की तिथि तय नहीं की गई है।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर इस मुद्दे ने बहस छेड़ दी है। कई यूज़र्स ने लिखा कि “नेताओं को अपनी भाषा पर नियंत्रण रखना चाहिए,” जबकि कुछ लोगों का कहना है कि “संजय यादव को राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है।” इस बीच, चुनावी माहौल में यह FIR राजनीतिक पार्टियों के बीच “नीतिगत बनाम भावनात्मक राजनीति” की नई बहस को जन्म दे रही है। बिहार चुनाव 2025 अब सिर्फ सत्ता की लड़ाई नहीं रह गई, बल्कि यह नेताओं की जवाबदेही और राजनीतिक शुचिता की परीक्षा बन चुकी है। झारखंड मंत्री संजय यादव पर दर्ज हुई FIR इस बात की ओर इशारा करती है कि चुनाव आयोग किसी भी स्तर पर आचार संहिता उल्लंघन को हल्के में नहीं लेगा।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि चुनाव आयोग संजय यादव के खिलाफ क्या निर्णय लेता है, और क्या यह मामला महागठबंधन की चुनावी रणनीति को प्रभावित करेगा।

