लोक जनशक्ति पार्टी प्रत्याशी विवाद
पटना/छपरा। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज होती जा रही है। इसी बीच एनडीए गठबंधन को एक बड़ा झटका लगा है। छपरा जिले की मढ़ौरा विधानसभा सीट से लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की प्रत्याशी सीमा सिंह का नामांकन रद्द कर दिया गया है। इस फैसले ने न सिर्फ पार्टी कार्यकर्ताओं को झटका दिया है, बल्कि पूरे एनडीए खेमे में हलचल मचा दी है।
नामांकन रद्द होने से एनडीए की मुश्किलें बढ़ीं
मढ़ौरा सीट पर सीमा सिंह के नामांकन रद्द होने के बाद अब एनडीए के समीकरण बिगड़ते नजर आ रहे हैं। LJP (रामविलास) ने इस सीट पर महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने की मंशा से सीमा सिंह को मैदान में उतारा था, लेकिन रिटर्निंग ऑफिसर ने नामांकन पत्र की जांच के दौरान कुछ दस्तावेजों में गड़बड़ी मिलने के कारण उसे खारिज कर दिया।
सूत्रों के मुताबिक, सीमा सिंह के कागजात में “आवश्यक शपथपत्र” और “नामांकन समय सीमा” से संबंधित तकनीकी खामियां पाई गईं, जिसके चलते यह कार्रवाई की गई।
सीमा सिंह ने जताया विरोध, कहा – यह साजिश है
नामांकन रद्द होने के बाद प्रत्याशी सीमा सिंह ने जिला निर्वाचन अधिकारी के फैसले पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यह “राजनीतिक साजिश” का हिस्सा है ताकि एनडीए को कमजोर किया जा सके।
सीमा सिंह ने कहा, “मैंने सभी आवश्यक कागजात समय पर जमा किए थे। फिर भी नामांकन खारिज करना समझ से परे है। हम इस फैसले के खिलाफ अपील करेंगे और न्यायिक रास्ता अपनाएंगे।”
LJP (रामविलास) नेताओं में नाराजगी
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के स्थानीय और प्रदेश स्तर के कई नेताओं ने इस फैसले को अनुचित बताया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, मढ़ौरा सीट पर सीमा सिंह की उम्मीदवारी को लेकर कार्यकर्ताओं में उत्साह था और महिला मतदाताओं में भी उनकी लोकप्रियता बढ़ रही थी। अब उनके नामांकन रद्द होने से LJP के कार्यकर्ता हताश हैं।
पार्टी प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, “यह हमारे लिए झटका है, लेकिन हम इसे चुनौती देंगे। लोकतंत्र में हर प्रत्याशी को निष्पक्ष मौका मिलना चाहिए।”
मढ़ौरा सीट पर अब कौन होगा एनडीए का चेहरा?
अब सवाल उठ रहा है कि मढ़ौरा सीट से एनडीए की ओर से नया उम्मीदवार कौन होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अब भाजपा या जदयू इस सीट से नया उम्मीदवार उतार सकती हैं, ताकि सीट एनडीए खेमे में बनी रहे।
हालांकि अभी तक LJP (रामविलास) की ओर से आधिकारिक तौर पर किसी वैकल्पिक उम्मीदवार का नाम घोषित नहीं किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व पटना में आपात बैठक कर स्थिति की समीक्षा कर रहा है।
चुनावी समीकरणों पर असर
मढ़ौरा विधानसभा सीट छपरा जिले की एक अहम राजनीतिक सीट मानी जाती है। यहां हमेशा कांटे की टक्कर देखने को मिलती है।
2020 के विधानसभा चुनाव में यहां आरजेडी ने मामूली अंतर से जीत दर्ज की थी। इस बार एनडीए ने इस सीट पर मजबूत दावा ठोका था और सीमा सिंह को “नए चेहरे” के रूप में पेश किया गया था।
नामांकन रद्द होने से आरजेडी और इंडिया गठबंधन के उम्मीदवारों को मनोबल बढ़ा है। स्थानीय राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि इससे एनडीए के वोट बैंक पर असर पड़ सकता है, खासकर महिला और युवा मतदाताओं के बीच।
विपक्ष का तंज – एनडीए में सब कुछ ठीक नहीं
विपक्षी दलों ने इसे एनडीए की “भीतरी कलह” और “प्रशासनिक दबाव” का नतीजा बताया है। आरजेडी नेता ने कहा कि यह दिखाता है कि एनडीए के अंदर समन्वय की भारी कमी है।
वहीं कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने तंज कसते हुए कहा, “जब टिकट बंटवारे से लेकर नामांकन तक में गड़बड़ी हो, तो जनता कैसे भरोसा करेगी?”
चुनाव आयोग की कार्रवाई पर क्या बोले अधिकारी
जिला निर्वाचन अधिकारी ने साफ कहा कि नामांकन की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की गई। अधिकारी ने बताया, “कागजातों की जांच के दौरान कुछ आवश्यक शपथपत्र अनुपस्थित थे और नामांकन पत्र समय पर सही प्रारूप में नहीं था, इसलिए नियमों के तहत रद्द करना पड़ा।”
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी उम्मीदवार के साथ पक्षपात नहीं किया गया है।
अब LJP (रामविलास) के सामने चुनौती है कि वह जल्द से जल्द नया उम्मीदवार घोषित करे और कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखे। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पार्टी ने तेजी से स्थिति को संभाल नहीं पाया तो यह सीट एनडीए के लिए “कमजोर कड़ी” साबित हो सकती है।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में छपरा की मढ़ौरा सीट से LJP (रामविलास) प्रत्याशी सीमा सिंह का नामांकन रद्द होना सिर्फ एक सीट का मामला नहीं, बल्कि यह एनडीए के अंदर के समन्वय और रणनीति की भी परीक्षा है। अब देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में एनडीए इस झटके से कैसे उबरता है और मढ़ौरा की सियासी जंग में अगला दांव कौन चलता है।

