Patna: बिहार चुनाव 2025 के बीच राजनीति में एक नया विवाद गर्मा गया है। जदयू उम्मीदवार शांभवी चौधरी पर दो-दो बार वोट डालने का आरोप लगा है। इस मामले को लेकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग से कार्रवाई की मांग की है, जबकि राजद (RJD) ने इसे “चुनावी फ्रॉड” करार दिया है। सोशल मीडिया पर वीडियो और फोटो वायरल होने के बाद यह मामला तेजी से चर्चा में है।
क्या है पूरा मामला?
बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में कई जिलों में वोटिंग हुई। इसी दौरान भागलपुर जिले के कहलगांव विधानसभा क्षेत्र से जदयू उम्मीदवार शांभवी चौधरी का एक वीडियो सामने आया। आरोप है कि उन्होंने एक से अधिक बार मतदान किया।
वीडियो में शांभवी चौधरी को दो अलग-अलग बूथों पर वोट डालते हुए दिखाया गया है। कांग्रेस और राजद नेताओं ने आरोप लगाया कि “यह लोकतंत्र की मर्यादा और चुनाव आयोग के नियमों की खुली धज्जियां उड़ाने जैसा है।”
कांग्रेस का हमला: ‘चुनाव आयोग बताए, कार्रवाई कब होगी?’
कांग्रेस प्रवक्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा,
“अगर साधारण मतदाता ऐसा करे तो उस पर तुरंत FIR दर्ज होती है। लेकिन जब सत्ता पक्ष की उम्मीदवार करती हैं, तो चुप्पी साध ली जाती है। चुनाव आयोग को निष्पक्ष जांच करनी चाहिए और तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।”
कांग्रेस ने चुनाव आयोग को पत्र भेजकर वीडियो की जांच, वोटिंग रिकॉर्ड की पड़ताल और आरोपी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है।
पार्टी ने कहा कि यह मामला सिर्फ एक उम्मीदवार का नहीं बल्कि चुनाव की पारदर्शिता और लोकतंत्र के विश्वास से जुड़ा है।
RJD का आरोप: ‘अलग फ्रॉड चल रहा है’

राजद प्रवक्ता शक्ति यादव ने कहा,
“बिहार में इस बार अलग तरह का फ्रॉड चल रहा है। कभी EVM में गड़बड़ी, कभी वोटर लिस्ट से नाम गायब, और अब उम्मीदवार खुद दो बार वोट डाल रही हैं। ये कैसा चुनाव है?”
राजद ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जदयू पर सीधा हमला करते हुए कहा कि “अगर यही तरीका जारी रहा तो जनता के फैसले का क्या मतलब रह जाएगा?”
पार्टी ने इस घटना को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया है और राज्य चुनाव आयोग से स्वतः संज्ञान लेने की अपील की है।
शांभवी चौधरी ने क्या कहा?
आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए जदयू उम्मीदवार शांभवी चौधरी ने कहा कि यह राजनीतिक साजिश है।
“मेरे खिलाफ झूठा प्रचार चलाया जा रहा है। मैंने सिर्फ अपने बूथ पर वोट डाला, बाकी वीडियो एडिटेड हैं। विपक्ष चुनाव हारने के डर से झूठ फैला रहा है।”
उन्होंने दावा किया कि जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, उसमें उनकी पुरानी क्लिपिंग्स को जोड़कर गलत मैसेज दिया गया है।
चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया
राज्य निर्वाचन आयोग ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए कहा है कि वीडियो की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी।
आयोग के अधिकारी ने कहा,
“अगर यह साबित होता है कि किसी उम्मीदवार ने दो बार मतदान किया है, तो यह गंभीर अपराध है। ऐसी स्थिति में Representation of the People Act, 1951 के तहत कार्रवाई की जाएगी।”
आयोग ने जिलाधिकारी और संबंधित रिटर्निंग ऑफिसर से रिपोर्ट मांगी है।
सोशल मीडिया पर बहस तेज
जैसे ही वीडियो सामने आया, ट्विटर (अब X) और फेसबुक पर इस मुद्दे को लेकर बहस छिड़ गई।
कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि “अगर आम मतदाता को एक वोट से अधिक देने की अनुमति नहीं है, तो उम्मीदवारों को छूट क्यों?”
वहीं, कुछ यूजर्स ने इसे “राजनीतिक प्रोपेगेंडा” बताते हुए जदयू के पक्ष में तर्क दिए।
विशेषज्ञों की राय
चुनाव विश्लेषक डॉ. संजीव मिश्रा का कहना है,
“अगर वीडियो असली साबित होता है, तो यह लोकतंत्र पर बड़ा सवाल है। चुनाव आयोग को निष्पक्षता बनाए रखने के लिए तुरंत कदम उठाने होंगे। इस तरह की घटनाएं जनता के भरोसे को तोड़ती हैं।”
विपक्ष का एजेंडा और सत्ता पक्ष की सफाई
इस घटना ने पहले चरण की वोटिंग के बाद बिहार की राजनीति को नया मोड़ दे दिया है।
जहां विपक्ष इसे “लोकतंत्र की हत्या” कह रहा है, वहीं जदयू और एनडीए इसे “ग़लतफहमी” बताकर खारिज कर रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस विवाद का असर आने वाले चरणों के मतदान पर भी पड़ सकता है।
जनता क्या कह रही है
ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरों तक इस घटना को लेकर मतदाता चर्चा कर रहे हैं।
कई लोग इसे “बड़ी लापरवाही” बता रहे हैं, तो कुछ इसे “विपक्ष की चाल” मान रहे हैं।
मतदाता चाहते हैं कि चुनाव आयोग इस पर जल्द से जल्द सत्यापन रिपोर्ट जारी करे ताकि भ्रम की स्थिति खत्म हो।
शांभवी चौधरी का मामला अब सिर्फ एक उम्मीदवार का नहीं, बल्कि चुनाव की पारदर्शिता, विश्वसनीयता और मतदाता के अधिकारों से जुड़ गया है।
अब सबकी निगाहें चुनाव आयोग की जांच रिपोर्ट पर हैं। अगर आरोप सही पाए गए, तो यह बिहार चुनाव 2025 के सबसे बड़े विवादों में से एक साबित होगा।

