पटना। बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में गुरुवार को 64.69% मतदान दर्ज किया गया, जो राज्य के इतिहास में अब तक का सबसे अधिक मतदान प्रतिशत है। राज्य के मतदाताओं ने लोकतंत्र के इस पर्व को पूरे उत्साह और जोश के साथ मनाया। छिटपुट घटनाओं को छोड़ दें तो पूरे राज्य में मतदान शांतिपूर्ण रहा। चुनाव आयोग के अनुसार, इस बार मतदाताओं में खासा उत्साह देखा गया, विशेषकर ग्रामीण इलाकों में। वहीं शहरी क्षेत्रों, खासकर पटना नगर निगम क्षेत्र में मतदाता उदासीन दिखे। इसके बावजूद समग्र रूप से मतदान प्रतिशत में आई यह वृद्धि लोकतांत्रिक जागरूकता का प्रमाण मानी जा रही है।
मुजफ्फरपुर बना मतदान में अव्वल
पहले चरण के मतदान में मुजफ्फरपुर जिला ने सबसे अधिक मतदान प्रतिशत दर्ज कर सबको चौंका दिया। यहां लगभग 72% मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। जिले के सभी विधानसभा क्षेत्रों में सुबह से ही लंबी कतारें देखने को मिलीं। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही।
मुजफ्फरपुर के सकरा, कुढ़नी और औराई इलाकों में महिलाओं की भारी संख्या में उपस्थिति ने चुनाव आयोग को भी प्रभावित किया। स्थानीय प्रशासन ने मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक पहुंचने के लिए बेहतर व्यवस्था की थी।

पटना में शहरी मतदाता उदासीन
राजधानी पटना में शहरी इलाकों में अपेक्षाकृत कम मतदान हुआ। यहां मतदान प्रतिशत 54% के आसपास रहा। हालांकि ग्रामीण इलाकों में लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। शहर में सुबह के समय मतदान केंद्रों पर सन्नाटा था, लेकिन दोपहर बाद कुछ इलाकों में भीड़ बढ़ी। राजधानी के डाकबंगला, राजेंद्र नगर और कंकड़बाग क्षेत्रों में युवाओं की सहभागिता उम्मीद से कम रही। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शहरी मतदाताओं की यह बेरुखी चुनावी नतीजों पर असर डाल सकती है।
महिलाओं और युवाओं की बड़ी भूमिका
पहले चरण के मतदान में महिलाओं और युवाओं की भूमिका अहम रही। आंकड़ों के मुताबिक, इस बार महिला मतदाताओं की भागीदारी पुरुषों से लगभग 2% अधिक रही। विशेष रूप से दरभंगा, सिवान और मधुबनी जिलों में महिला मतदाताओं ने रिकॉर्ड मतदान किया।
चुनाव आयोग ने महिलाओं के लिए ‘सखी मतदान केंद्र’ की स्थापना की थी, जहाँ केवल महिला कर्मी तैनात थीं। इन केंद्रों पर उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला।
चुनाव आयोग की सख्त निगरानी
राज्य चुनाव आयोग के अधिकारियों ने बताया कि मतदान के दौरान 1.5 लाख से अधिक सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी। संवेदनशील बूथों पर वेबकास्टिंग और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी गई। कुछ जगहों से छिटपुट झड़पों की सूचना आई, लेकिन किसी बड़े व्यवधान की खबर नहीं मिली।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि 500 से अधिक फ्लाइंग स्क्वाड लगातार निगरानी कर रहे थे ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी न हो सके।
ग्रामीण भारत का लोकतांत्रिक जोश
ग्रामीण इलाकों में मतदान को लेकर लोगों में काफी उत्साह देखा गया। गांवों में सुबह से ही लंबी कतारें लग गई थीं। कई जगह वृद्ध मतदाता भी मतदान केंद्रों पर पहुँचे। दरभंगा के एक 92 वर्षीय बुजुर्ग मतदाता रामलाल सिंह ने कहा, “मैंने आजादी के बाद हर चुनाव में वोट दिया है। लोकतंत्र को मजबूत करना हमारा कर्तव्य है।” ऐसी मिसालों ने चुनाव के इस पर्व को और खास बना दिया।
राजनीतिक दलों में आत्मविश्वास और चिंता दोनों
पहले चरण के मतदान के बाद सभी प्रमुख राजनीतिक दलों में आत्मविश्वास और चिंता दोनों देखने को मिली।
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक मतदान को अपने पक्ष में बताया, जबकि महागठबंधन (RJD, कांग्रेस, वाम दल) ने दावा किया कि जनता बदलाव के मूड में है।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि बढ़े हुए मतदान प्रतिशत से सटीक अनुमान लगाना मुश्किल है, लेकिन यह साफ है कि जनता का झुकाव किसी भी दिशा में जा सकता है।
सोशल मीडिया पर मतदान का उत्साह
युवाओं ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर “#VoteForBihar” और “#MyVoteMyRight” जैसे हैशटैग ट्रेंड कराए। कई जगह कॉलेज स्टूडेंट्स ने समूहों में मतदान केंद्र जाकर सेल्फी ली और उसे सोशल मीडिया पर साझा किया।
इलेक्शन कमीशन ने भी डिजिटल माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया था, जिसका असर साफ तौर पर दिखा।
आगे के चरणों से उम्मीदें
पहले चरण के रिकॉर्ड मतदान के बाद अब निगाहें दूसरे और तीसरे चरण के मतदान पर टिक गई हैं।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि अगर यही रुझान जारी रहा तो इस बार बिहार में मतदान प्रतिशत 70% के पार जा सकता है।
जनता के इस जोश को देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि बिहार का मतदाता अब जागरूक और सक्रिय हो चुका है।

