नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर में सालभर चलने वाले उत्सव का शुभारंभ किया। इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ गुलामी के अंधकारमय दौर में भारत की आजादी के संकल्प का उद्घोष बन गया था। यह सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि देश की अस्मिता और एकता का प्रतीक है।
भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ ने अपनी रचना से लेकर आज तक हर भारतीय के दिल में जो स्थान बनाया है, वह अमिट है। इसकी रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने वर्ष 1875 में की थी और पहली बार 1882 में उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ में प्रकाशित हुआ था। यह गीत ब्रिटिश शासन के खिलाफ स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशभक्ति का सबसे बड़ा प्रतीक बन गया।
प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन:
नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित विशेष समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा,
“‘वंदे मातरम’ सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि यह भारत की आत्मा की आवाज है। जब भारत गुलामी की जंजीरों में जकड़ा था, तब इस गीत ने लोगों में आजादी का जज्बा जगाया। आज 150 साल बाद भी इसका स्वर उतना ही प्रासंगिक है।”
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि यह उत्सव केवल अतीत की याद भर नहीं, बल्कि भविष्य के भारत के निर्माण का संकल्प भी है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे ‘वंदे मातरम’ के अर्थ और संदेश को आत्मसात करें।

‘वंदे मातरम’ के ऐतिहासिक पहलू:
‘वंदे मातरम’ का अर्थ है – “माँ, मैं तेरी वंदना करता हूँ।” यह गीत भारत माता के प्रति सम्मान और समर्पण की भावना को दर्शाता है।
स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक, अरविंद घोष जैसे अनेक क्रांतिकारियों ने इस गीत को अपने आंदोलनों का हिस्सा बनाया।
1905 के स्वदेशी आंदोलन में भी यह गीत जन-जन की आवाज बन गया।
उत्सव की रूपरेखा:
इस अवसर पर केंद्र सरकार ने घोषणा की कि आने वाले एक वर्ष तक देशभर में ‘वंदे मातरम@150’ शीर्षक से कई कार्यक्रम आयोजित होंगे।
स्कूलों और कॉलेजों में विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।
कला, संगीत, और रंगमंच के माध्यम से गीत के महत्व को जन-जन तक पहुँचाया जाएगा।
युवा कलाकारों के लिए राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।
विदेशों में भारतीय दूतावासों द्वारा भी इस गीत पर विशेष आयोजन होंगे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह उत्सव न केवल भारत की सांस्कृतिक विरासत का उत्सव है बल्कि “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को भी सशक्त करेगा।
‘वंदे मातरम’ और आज का भारत:
आज जब भारत विकास, आत्मनिर्भरता और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तो ‘वंदे मातरम’ जैसी ऐतिहासिक पुकार एक नई ऊर्जा देती है।
पीएम मोदी ने कहा, “आजादी के अमृत काल में हम जब 2047 की ओर बढ़ रहे हैं, तब हमें ‘वंदे मातरम’ की भावना से प्रेरणा लेकर भारत को विश्व गुरु बनाना है।”
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में देशभर की भागीदारी:
उद्घाटन समारोह में देशभर से आए विद्यार्थियों, कलाकारों और स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत ‘वंदे मातरम’ के सामूहिक गायन से हुई, जिसमें 150 गायकों ने एक स्वर में गीत गाया।
इसके बाद पारंपरिक लोकनृत्यों और भारत के विभिन्न राज्यों की संस्कृति को प्रदर्शित करने वाले कार्यक्रम हुए।
इतिहासकारों की प्रतिक्रिया:
इतिहासकारों का मानना है कि ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होना भारत के सांस्कृतिक इतिहास की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
प्रो. अरुणोदय मुखर्जी ने कहा, “यह गीत सिर्फ बंगाल या किसी राज्य का नहीं, बल्कि पूरे भारत की आत्मा का प्रतीक है। इसकी धुन सुनकर आज भी देशभक्ति की भावना स्वतः जाग उठती है।”
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन के अंत में कहा,
“हम सबको इस पवित्र गीत की भावना को हर नागरिक के जीवन में उतारना होगा। यह गीत हमारे अतीत की गौरवगाथा है और हमारे भविष्य की दिशा भी।”
‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने का यह समारोह भारत के गौरवशाली इतिहास, एकता और राष्ट्रभक्ति की उस भावना का उत्सव है, जिसने हमें आज़ादी की राह दिखाई और आज भी विकास की प्रेरणा देता है।

