By: Mala Mandal
नई दिल्ली। देश में जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र (Birth Certificate & Death Certificate) जारी करने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने के लिए सरकार ने नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। नए नियमों के तहत अब केवल सरकार द्वारा अधिकृत अधिकारी ही जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी कर सकेंगे। इस बदलाव का उद्देश्य फर्जी प्रमाणपत्रों पर रोक लगाना, रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखना और नागरिकों को बेहतर एवं पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराना है। सरकार का मानना है कि जन्म और मृत्यु का सही रिकॉर्ड किसी भी देश की प्रशासनिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। यही कारण है कि प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है।

क्या बदला है?
नए नियमों के अनुसार अब जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार केवल अधिकृत रजिस्ट्रार या सरकार द्वारा नामित अधिकारी के पास होगा। पहले कई स्थानों पर स्थानीय स्तर पर अलग-अलग व्यवस्थाओं के कारण प्रमाणपत्र जारी करने में असमानता देखने को मिलती थी। अब यह व्यवस्था एक समान और अधिक जवाबदेह होगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी प्रमाणपत्र निर्धारित प्रक्रिया और रिकॉर्ड के सत्यापन के बाद ही जारी किए जाएंगे।

क्यों लिया गया यह फैसला?
हाल के वर्षों में कई राज्यों में फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनाए जाने के मामले सामने आए थे। ऐसे मामलों के कारण सरकारी योजनाओं, पहचान पत्रों और अन्य दस्तावेजों में गड़बड़ी की शिकायतें भी बढ़ी थीं।
सरकार का कहना है कि नए नियम लागू होने से—
• फर्जी प्रमाणपत्रों पर रोक लगेगी।
• रिकॉर्ड की विश्वसनीयता बढ़ेगी।
• डिजिटल डेटाबेस मजबूत होगा।
• सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता आएगी।
• नागरिकों को प्रमाणपत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया अधिक सुरक्षित होगी।

किन अधिकारियों को मिलेगा अधिकार?
नियमों के अनुसार राज्य सरकार या केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन द्वारा अधिकृत रजिस्ट्रार, नगर निकाय, नगर निगम, नगर परिषद, पंचायत अथवा संबंधित विभाग के नामित अधिकारी ही जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी कर सकेंगे। हर राज्य अपनी प्रशासनिक व्यवस्था के अनुसार अधिकृत अधिकारियों की नियुक्ति करेगा।

आम लोगों पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से आम नागरिकों को लंबे समय में लाभ मिलेगा। प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी और रिकॉर्ड का सत्यापन आसान होगा। हालांकि शुरुआती चरण में कुछ स्थानों पर नई व्यवस्था लागू होने के दौरान लोगों को अतिरिक्त दस्तावेज या सत्यापन प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है।

डिजिटल रिकॉर्ड को मिलेगा बढ़ावा
सरकार लगातार जन्म और मृत्यु पंजीकरण को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ रही है। इससे भविष्य में प्रमाणपत्र ऑनलाइन उपलब्ध कराने, रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और विभिन्न सरकारी विभागों के बीच डेटा साझा करने में आसानी होगी। डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से प्रमाणपत्र खो जाने की स्थिति में भी दोबारा प्राप्त करना पहले की तुलना में अधिक आसान होगा।

किन कामों में जरूरी होता है जन्म प्रमाणपत्र?
जन्म प्रमाणपत्र आज लगभग हर सरकारी और निजी कार्य के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज बन चुका है। इसकी आवश्यकता—
• स्कूल में प्रवेश
• पासपोर्ट बनवाने
• आधार कार्ड
• पैन कार्ड
• सरकारी योजनाओं का लाभ
• सरकारी नौकरी
• बैंकिंग प्रक्रिया
जैसे कई कार्यों में होती है।

मृत्यु प्रमाणपत्र क्यों जरूरी है?
मृत्यु प्रमाणपत्र भी कई कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के लिए अनिवार्य दस्तावेज है। इसका उपयोग—
• बीमा क्लेम
• बैंक खातों का निपटान
• संपत्ति हस्तांतरण
• पेंशन संबंधी प्रक्रिया
• कानूनी रिकॉर्ड अपडेट
में किया जाता है।

सरकार का उद्देश्य
सरकार का कहना है कि नए नियमों का मकसद नागरिकों को परेशानी देना नहीं बल्कि पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और डिजिटल बनाना है। इससे सरकारी रिकॉर्ड अधिक सटीक होंगे और भविष्य में नागरिकों को बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राज्यों में इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो जन्म और मृत्यु पंजीकरण प्रणाली पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हो जाएगी।

जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने के नियमों में किया गया यह बदलाव प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब केवल अधिकृत अधिकारी ही प्रमाणपत्र जारी करेंगे, जिससे फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी, रिकॉर्ड अधिक सुरक्षित होंगे और नागरिकों को विश्वसनीय दस्तावेज उपलब्ध कराए जा सकेंगे। आने वाले समय में डिजिटल व्यवस्था के विस्तार के साथ यह प्रणाली और अधिक प्रभावी बनने की उम्मीद है।

