By: Mala Mandal
रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर राज्य की राजनीति तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए पूरे मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग की है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि भर्ती घोटाले के असली मास्टरमाइंड को बचाने की कोशिश की जा रही है और केवल सीमित कार्रवाई कर सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। हाल के दिनों में CID की कार्रवाई, गिरफ्तारियों और परीक्षाओं के स्थगन के बाद यह मामला और अधिक राजनीतिक रूप से संवेदनशील बन गया है।

मरांडी ने कहा कि JPSC भर्ती प्रक्रिया में लंबे समय से गंभीर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती रही हैं। उनका दावा है कि प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू तक में बड़े पैमाने पर पैसे लेकर चयन कराने का संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि योग्य अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया और भ्रष्टाचार के जरिए सरकारी नौकरियां बांटी गईं।

उन्होंने राज्य सरकार की ओर से CID जांच पर भी सवाल उठाए। मरांडी का कहना है कि जब तक पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच नहीं होगी, तब तक वास्तविक सच्चाई सामने नहीं आएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार प्रभावशाली लोगों को बचाने का प्रयास कर रही है और इसलिए CBI जांच ही निष्पक्ष विकल्प है।

इधर झारखंड भाजपा अध्यक्ष आदित्य साहू ने भी सरकार को घेरते हुए कहा कि JPSC ही नहीं बल्कि राज्य में भर्ती परीक्षाओं और कथित पेपर लीक से जुड़े सभी मामलों की CBI जांच होनी चाहिए। भाजपा का आरोप है कि लगातार सामने आ रही अनियमितताओं से लाखों युवाओं का भरोसा सरकारी भर्ती प्रक्रिया से उठता जा रहा है।

मामले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि CID ने जांच के दौरान कई लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों ने JPSC के अधिकारियों, परीक्षा संचालन से जुड़े लोगों और निजी एजेंसी के प्रतिनिधियों से पूछताछ की है। डिजिटल साक्ष्यों और दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।

जांच के बीच झारखंड लोक सेवा आयोग ने जुलाई से सितंबर के बीच प्रस्तावित नौ भर्ती परीक्षाओं को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया। इनमें संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा भी शामिल है। आयोग ने अपरिहार्य कारणों का हवाला दिया, जबकि विपक्ष इसे भर्ती घोटाले से जोड़कर देख रहा है।

भाजपा का कहना है कि यदि सरकार पूरी तरह पारदर्शी है तो उसे CBI जांच से डरना नहीं चाहिए। पार्टी नेताओं का दावा है कि निष्पक्ष जांच से ही युवाओं का विश्वास दोबारा बहाल किया जा सकता है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई संभव होगी।
वहीं सरकार की ओर से अब तक यही कहा गया है कि जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि विपक्ष सरकार के इस रुख से संतुष्ट नहीं है और विधानसभा से लेकर सड़क तक आंदोलन तेज करने की चेतावनी दे रहा है।

इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा असर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों पर पड़ा है। परीक्षा स्थगित होने से हजारों उम्मीदवारों की तैयारी और भविष्य प्रभावित हुआ है। अभ्यर्थी पारदर्शी जांच, दोषियों पर कार्रवाई और जल्द नई परीक्षा तिथि घोषित करने की मांग कर रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि JPSC विवाद आने वाले समय में झारखंड की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकता है। यदि जांच में और बड़े खुलासे होते हैं तो सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होने की संभावना है। फिलहाल सभी की नजर जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई और सरकार के रुख पर बनी हुई है।

