By: Mala Mandal
देवघर। देश के महान वैज्ञानिक, प्रख्यात शिक्षक और भारत के 11वें राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की जयंती के अवसर पर 15 अक्टूबर 2026 को देवघर स्थित दीनबंधु उच्च विद्यालय में श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया। विद्यालय के भवानी शंकर बागची सभागार में सुबह 11 बजे आयोजित इस कार्यक्रम में अतिथियों, शिक्षक-शिक्षिकाओं और छात्र-छात्राओं ने डॉ. कलाम के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस दौरान उनके प्रेरणादायी जीवन, वैज्ञानिक उपलब्धियों, सादगीपूर्ण व्यक्तित्व और राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान को याद किया गया। वक्ताओं ने विद्यार्थियों से उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने तथा शिक्षा, विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान किया।

सादगीपूर्ण समारोह में जुटे शिक्षक और विद्यार्थी
दीनबंधु उच्च विद्यालय में आयोजित इस जयंती समारोह में आर. मित्रा प्लस टू उच्च विद्यालय के प्रधानाध्यापक बिमलेश कुमार पंकज मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं, विशिष्ट अतिथि के रूप में आर. मित्रा प्लस टू उच्च विद्यालय के शिक्षक एवं राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित अरविंदराज रजवाड़े ने कार्यक्रम में भाग लिया। समारोह की अध्यक्षता दीनबंधु उच्च विद्यालय के प्रधानाध्यापक काजल कांति सिकदार ने की। विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्य डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। उपस्थित अतिथियों और विद्यालय परिवार के सदस्यों ने देश के प्रति उनके समर्पण, वैज्ञानिक सोच और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को याद किया। समारोह का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को डॉ. कलाम के जीवन से प्रेरणा लेने और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने का संदेश देना था।

प्रधानाध्यापक ने डॉ. कलाम के आदर्शों को अपनाने का किया आह्वान
विद्यालय के प्रधानाध्यापक एवं समारोह के अध्यक्ष काजल कांति सिकदार ने डॉ. कलाम के प्रेरणादायी जीवन और व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों से उनके आदर्शों को आत्मसात करने की अपील की। उन्होंने कहा कि डॉ. कलाम का जीवन इस बात का उदाहरण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, अनुशासन, मेहनत और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति के माध्यम से जीवन में बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।डॉ. कलाम का व्यक्तित्व केवल एक वैज्ञानिक या राष्ट्रपति तक सीमित नहीं था, बल्कि वे युवाओं के मार्गदर्शक और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा के स्रोत भी थे। उनका जीवन बताता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, लक्ष्य के प्रति ईमानदारी और निरंतर प्रयास से सफलता का रास्ता बनाया जा सकता है।

मेहनत और दृढ़ संकल्प से हासिल की राष्ट्रीय पहचान
मुख्य अतिथि बिमलेश कुमार पंकज ने अपने संबोधन में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के जीवन संघर्ष और उपलब्धियों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि डॉ. कलाम का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था। बचपन से ही वे मेहनती, अनुशासित और जिज्ञासु स्वभाव के थे। उन्होंने अपनी लगन, कठिन परिश्रम और दृढ़ संकल्प के बल पर देश के महान वैज्ञानिक, शिक्षक और राष्ट्रपति के रूप में विशिष्ट पहचान बनाई। उन्होंने बताया कि डॉ. कलाम को देशभर में ‘मिसाइल मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से जाना जाता है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) में कार्य करते हुए उन्होंने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम और रक्षा क्षेत्र की वैज्ञानिक क्षमताओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

बिमलेश कुमार पंकज ने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए केवल सपने देखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन सपनों को पूरा करने के लिए निरंतर मेहनत करना भी जरूरी है। विद्यार्थियों को पढ़ाई के प्रति गंभीर रहने, नई चीजें सीखने और अपने भीतर वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने की आवश्यकता है। डॉ. कलाम का जीवन युवाओं को बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें हासिल करने के लिए निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा देता है।
राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक ने बताया जीवन-मूल्यों का महत्व
विशिष्ट अतिथि अरविंदराज रजवाड़े ने अपने संबोधन में डॉ. कलाम के जीवन-मूल्यों, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सादगी और विद्यार्थियों के प्रति उनके विशेष स्नेह पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डॉ. कलाम का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा का महत्वपूर्ण स्रोत है। उनका व्यक्तित्व बताता है कि ज्ञान, विनम्रता और अनुशासन के साथ समाज और देश के विकास में सार्थक योगदान दिया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को जिज्ञासु बनने, सवाल पूछने और हर परिस्थिति में सीखने की आदत विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने डॉ. कलाम के जीवन से प्रेरणा लेते हुए शिक्षा को केवल परीक्षा में अंक प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण और समाज की बेहतरी का आधार बनाने पर जोर दिया।

स्वरचित कविता के माध्यम से किया कलाम के योगदान का स्मरण
समारोह के दौरान विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्य डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव ने अपनी स्वरचित कविता के माध्यम से डॉ. कलाम के जीवन, व्यक्तित्व और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया। उनकी कविता में डॉ. कलाम के संघर्ष, सरल जीवन, महान विचारों और देश के प्रति समर्पण की झलक देखने को मिली। कविता की प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों को भावनात्मक रूप से प्रभावित किया और विद्यार्थियों को उनके आदर्शों पर चलने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी विशेष आकर्षण पैदा किया। विद्यालय के संगीत शिक्षक आदित्य चटर्जी ने हारमोनियम की मधुर धुन पर मां सरस्वती की वंदना और देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए। उनके सुमधुर गायन ने सभागार में उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। तबले पर मैनाक दास ने संगत कर संगीत प्रस्तुति को प्रभावशाली बनाया।

राष्ट्रगान के साथ हुआ समारोह का समापन
कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं सुनील कुमार सूर, मुनेश्वर प्रसाद यादव, जितेंद्र कुमार चंद्र, उदय कुमार मंडल, मनीषा घोष, भारती कुमारी, सुदीप्ता चक्रवर्ती, विकास कुमार दास और राजू कुमार सहित छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। सभी ने डॉ. कलाम के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया।

अंत में राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने डॉ. कलाम के आदर्शों पर चलने, शिक्षा एवं विज्ञान के प्रति रुचि विकसित करने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया।

दीनबंधु उच्च विद्यालय में आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के बीच शिक्षा, अनुशासन, वैज्ञानिक सोच और देशभक्ति की भावना को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक सार्थक पहल रहा। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का जीवन आज भी यह संदेश देता है कि सच्ची सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों में नहीं, बल्कि अपने ज्ञान और क्षमता से देश तथा समाज के लिए कुछ बेहतर करने में निहित है।

