By: Mala Mandal
भारत में खाने-पीने की चीजों की बात हो और अचार का नाम न आए, ऐसा शायद ही कभी हो। दाल-चावल हो, पराठा हो या फिर पूरी-सब्जी, खाने के साथ थोड़ा सा अचार मिल जाए तो स्वाद कई गुना बढ़ जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश की राजधानी दिल्ली में एक ऐसी जगह भी है जिसे लोग प्यार से ‘अचार का कटोरा’ कहते हैं? यहां आपको अचार की इतनी वैरायटी देखने को मिल सकती है कि आप नाम सुनकर ही हैरान रह जाएंगे। दिल्ली के सदर बाजार के आसपास का इलाका पारंपरिक अचारों और देसी स्वाद के लिए काफी मशहूर है। यहां की गलियों में कदम रखते ही अलग-अलग मसालों और अचार की खुशबू आपका ध्यान खींच लेती है। कई दुकानों पर तरह-तरह के रंग-बिरंगे अचार बड़े-बड़े मर्तबानों और डिब्बों में सजे दिखाई देते हैं। यही वजह है कि अचार के शौकीनों के बीच यह इलाका खास पहचान रखता है।

80 से ज्यादा तरह के अचार, स्वाद की लंबी रेंज
यहां आने वाले लोगों के लिए सबसे खास आकर्षण अचार की अलग-अलग किस्में हैं। आम और नींबू जैसे पारंपरिक अचार से लेकर मिर्च, गाजर, आंवला, प्याज और कई दूसरी सब्जियों से तैयार अचार यहां मिलते हैं। कुछ दुकानों पर अलग-अलग मसालों और तेल के साथ तैयार किए गए विशेष स्वाद वाले अचार भी मिलते हैं। कई जगहों पर तीखे, खट्टे, मीठे और मसालेदार स्वाद के विकल्प मौजूद होते हैं। यही विविधता इस बाजार को अचार प्रेमियों के लिए खास बनाती है।

आम के अचार से लेकर मिर्च और नींबू तक
भारत में आम का अचार सबसे लोकप्रिय अचारों में से एक माना जाता है। यहां भी कच्चे आम से तैयार होने वाला पारंपरिक अचार लोगों की पसंद बना हुआ है। इसके अलावा नींबू का खट्टा-मीठा अचार, तीखी हरी मिर्च का अचार, गाजर और आंवले का अचार भी खूब पसंद किया जाता है। कुछ दुकानों पर मौसमी फलों और सब्जियों से तैयार अचार भी देखने को मिल सकते हैं। अलग-अलग दुकानदार अपने पारंपरिक मसालों और बनाने के तरीकों के कारण एक ही अचार में अलग स्वाद देने की कोशिश करते हैं।

बड़े मर्तबानों में दिखता है देसी स्वाद
इस बाजार की एक खास बात यहां रखे बड़े-बड़े मर्तबान भी हैं। कई दुकानों पर कांच के बड़े जार में अचार रखा दिखाई देता है। रंग-बिरंगे अचारों से भरे ये मर्तबान बाजार को एक अलग ही पहचान देते हैं। कई दुकानदार आज भी अचार तैयार करने में पारंपरिक मसालों और तेल का इस्तेमाल करने पर जोर देते हैं। हालांकि, अलग-अलग दुकानों और ब्रांडों में सामग्री, विधि और गुणवत्ता अलग हो सकती है, इसलिए खरीदारी करते समय पैकेजिंग, सामग्री और खाद्य सुरक्षा संबंधी जानकारी जरूर देखनी चाहिए।

पीढ़ियों से चली आ रही अचार बनाने की परंपरा
दिल्ली के पुराने बाजारों की सबसे बड़ी खासियत उनकी पुरानी व्यापारिक परंपराएं हैं। यहां कई कारोबार पीढ़ियों से परिवारों के बीच चलते आ रहे हैं। अचार का कारोबार भी इसी परंपरा का हिस्सा है। कई दुकानदार अपने परिवार से मिले पुराने नुस्खों और बनाने की तकनीक को आज भी इस्तेमाल करने की बात बताते हैं। समय के साथ अचार के स्वाद और पैकिंग में बदलाव जरूर आया है, लेकिन पारंपरिक स्वाद को बनाए रखने की कोशिश आज भी देखने को मिलती है।

आखिर क्यों कहा जाता है ‘अचार का कटोरा’?
इस इलाके को ‘अचार का कटोरा’ कहे जाने के पीछे सबसे बड़ी वजह यहां अचार की बड़ी विविधता और इससे जुड़े कारोबार माने जाते हैं। एक ही बाजार में अलग-अलग तरह के अचारों की इतनी दुकानें मिलना इसे बाकी जगहों से अलग बनाता है। यहां सिर्फ स्थानीय खरीदार ही नहीं, बल्कि दिल्ली के दूसरे हिस्सों और आसपास के क्षेत्रों से भी लोग अचार खरीदने पहुंचते हैं। कई लोग अपने घर के लिए बड़ी मात्रा में अचार लेकर जाते हैं, जबकि कुछ लोग रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए भी अलग-अलग स्वाद के अचार पैक करवाते हैं।

खाने के साथ अचार का स्वाद क्यों बढ़ जाता है?
भारतीय भोजन में अचार सिर्फ स्वाद बढ़ाने वाली चीज नहीं है, बल्कि यह हमारी पारंपरिक खाद्य संस्कृति का भी हिस्सा रहा है। अलग-अलग राज्यों में अचार बनाने की अलग विधियां और स्वाद देखने को मिलते हैं। उत्तर भारत में सरसों के तेल और मसालों से तैयार अचार काफी लोकप्रिय हैं। वहीं कुछ जगहों पर मीठे, खट्टे या मसालेदार अचार ज्यादा पसंद किए जाते हैं। दिल्ली जैसे शहर में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए लोगों की वजह से अचार की कई तरह की परंपराएं एक ही जगह पर देखने को मिल सकती हैं।

अचार प्रेमियों के लिए किसी फूड टूर से कम नहीं
अगर आपको देसी खाना और पारंपरिक स्वाद पसंद है, तो दिल्ली के पुराने बाजारों की सैर आपके लिए एक अलग अनुभव हो सकती है। यहां की संकरी गलियां, पुरानी दुकानें, मसालों की खुशबू और तरह-तरह के अचारों से भरे मर्तबान बाजार को खास बनाते हैं। सोशल मीडिया के दौर में ऐसे पुराने बाजार लोगों के बीच और भी लोकप्रिय हो रहे हैं। खाने-पीने के शौकीन लोग यहां पहुंचकर अलग-अलग अचारों की तस्वीरें और वीडियो बनाते हैं और इस पुराने स्वाद को दूसरों तक पहुंचाते हैं।

अगली बार दिल्ली जाएं तो इस देसी स्वाद को जरूर तलाशें
दिल्ली सिर्फ ऐतिहासिक इमारतों, शॉपिंग और स्ट्रीट फूड के लिए ही मशहूर नहीं है। राजधानी के पुराने बाजारों में आज भी ऐसे कई पारंपरिक कारोबार मौजूद हैं, जिनमें पीढ़ियों पुरानी विरासत की झलक दिखाई देती है।
‘अचार का कटोरा’ कहा जाने वाला यह इलाका इसी देसी स्वाद और पुरानी व्यापारिक संस्कृति की एक दिलचस्प मिसाल है। आम, नींबू, मिर्च, गाजर, आंवला और कई अन्य किस्मों के अचारों की मौजूदगी इसे अचार के शौकीनों के लिए खास बनाती है। अगर आप भी अचार के दीवाने हैं तो दिल्ली के इस पुराने बाजार का स्वाद आपको जरूर आकर्षित कर सकता है।

इस लेख में बाजार, अचार की किस्मों और पारंपरिक कारोबार से जुड़ी जानकारी सामान्य उपलब्ध विवरणों और स्थानीय बाजार की पहचान पर आधारित है। अलग-अलग दुकानों पर अचार की वैरायटी, कीमत, सामग्री, उपलब्धता और बनाने की विधि अलग हो सकती है। किसी खाद्य पदार्थ को खरीदने से पहले उसकी सामग्री, पैकेजिंग, निर्माण तिथि और खाद्य सुरक्षा संबंधी जानकारी जरूर जांच लें।

