
By: Mala Mandal
देवघर। झारखंड के देवघर शहर में अवैध रूप से संचालित नेल पॉलिश फैक्ट्री में आग लगने की एक बड़ी घटना सामने आई है। शहर के देव संघ नवदुर्गा मंदिर के पीछे संचालित इस फैक्ट्री में भारी मात्रा में रखे केमिकल में अचानक आग लग गई। आग की लपटें उठते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई। घटना की गंभीरता को देखते हुए अग्निशमन विभाग की चार दमकल गाड़ियों को मौके पर लगाया गया। करीब पांच घंटे तक लगातार मशक्कत करने के बाद अग्निशमन विभाग की टीम ने आग पर काबू पाया। इस घटना ने घनी आबादी वाले इलाके में अवैध रूप से संचालित औद्योगिक गतिविधियों और ज्वलनशील केमिकल के भंडारण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गनीमत रही कि अग्निशमन विभाग की टीम ने समय रहते आग को नियंत्रित कर लिया। अन्यथा आग आसपास के घरों और लोगों तक पहुंच सकती थी, जिससे बड़ा हादसा होने की आशंका थी।

देव संघ नवदुर्गा मंदिर के पीछे फैक्ट्री में लगी आग
जानकारी के अनुसार, देवघर के देव संघ नवदुर्गा मंदिर के पीछे नेल पॉलिश बनाने की फैक्ट्री संचालित की जा रही थी। बताया जा रहा है कि फैक्ट्री में बड़ी मात्रा में केमिकल रखा हुआ था। इसी केमिकल में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। आग लगने की खबर फैलते ही आसपास के लोगों में दहशत का माहौल बन गया। आग की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय स्तर पर अग्निशमन विभाग को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीम चार दमकल गाड़ियों के साथ घटनास्थल पर पहुंची और आग बुझाने का अभियान शुरू किया।

पांच घंटे तक दमकल विभाग ने की मशक्कत
फैक्ट्री में भारी मात्रा में केमिकल मौजूद होने के कारण आग पर काबू पाना अग्निशमन विभाग के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। आग बुझाने के दौरान दमकल कर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। लगातार प्रयास के बाद करीब पांच घंटे में आग पर नियंत्रण पाया जा सका। अग्निशमन विभाग की चार दमकल गाड़ियों ने इस अभियान में हिस्सा लिया। विभाग की टीम ने आग को आसपास के इलाके में फैलने से रोकने के लिए लगातार प्रयास किया। लंबे समय तक चले इस अभियान के बाद आखिरकार आग पर काबू पा लिया गया।

अग्निशमन पदाधिकारी गोपाल यादव ने दी घटना की जानकारी
घटनास्थल पर मौजूद अग्निशमन पदाधिकारी गोपाल यादव ने आग लगने की घटना को लेकर पूरी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फैक्ट्री में भारी मात्रा में केमिकल रखा हुआ था, जिसके कारण आग बुझाने में काफी परेशानी हुई। अग्निशमन विभाग की चार दमकल गाड़ियों की मदद से लगभग पांच घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। गोपाल यादव ने कहा कि यदि समय रहते आग पर नियंत्रण नहीं पाया जाता तो आसपास रहने वाले लोगों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ सकता था। आग की लपटें आसपास के इलाके तक पहुंचने की आशंका थी। उन्होंने बताया कि फिलहाल आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया है और स्थिति नियंत्रण में है।

फैक्ट्री संचालक मोबाइल स्विच ऑफ कर हुआ गायब
इस घटना के बाद फैक्ट्री के संचालक की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। जानकारी के अनुसार, फैक्ट्री का संचालन गुड्डू बरनवाल नामक व्यक्ति द्वारा किया जा रहा था। आग लगने की घटना के बाद से संचालक का मोबाइल फोन स्विच ऑफ बताया जा रहा है और वह मौके से गायब है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर आग लगने की घटना के बाद फैक्ट्री संचालक कहां गायब हो गया? क्या फैक्ट्री के संचालन के लिए संबंधित विभागों से जरूरी अनुमति ली गई थी? क्या वहां इतनी बड़ी मात्रा में केमिकल रखने की अनुमति थी? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

अवैध फैक्ट्री के संचालन पर उठे सवाल
देवघर शहर के रिहायशी इलाके में इस तरह की फैक्ट्री के संचालन की जानकारी सामने आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। नेल पॉलिश निर्माण में इस्तेमाल होने वाले केमिकल के भंडारण और रखरखाव में निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन बेहद जरूरी होता है। ऐसे में अगर किसी फैक्ट्री में बड़ी मात्रा में केमिकल रखा जा रहा था, तो उसकी सुरक्षा व्यवस्था और संचालन से संबंधित अनुमति की जांच आवश्यक हो जाती है। स्थानीय स्तर पर भी यह सवाल उठ रहा है कि आखिर रिहायशी इलाके के बीच इस तरह की फैक्ट्री कैसे संचालित हो रही थी? यदि फैक्ट्री अवैध रूप से चल रही थी, तो संबंधित विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली? क्या फैक्ट्री में अग्निशमन से संबंधित जरूरी उपकरण और सुरक्षा इंतजाम उपलब्ध थे? इन सभी बिंदुओं पर जांच की आवश्यकता है।

संचालक के खिलाफ होगी कार्रवाई
अग्निशमन पदाधिकारी गोपाल यादव ने स्पष्ट किया कि फिलहाल आग पर काबू पा लिया गया है और फैक्ट्री संचालक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, फैक्ट्री के पास संचालन की वैध अनुमति थी या नहीं, केमिकल का भंडारण किन नियमों के तहत किया जा रहा था और आग लगने की वास्तविक वजह क्या थी, इसकी विस्तृत जानकारी जांच के बाद ही सामने आएगी। इस घटना के बाद संबंधित विभागों की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण हो जाती है। फैक्ट्री के संचालन से जुड़े दस्तावेजों, केमिकल के भंडारण, अग्नि सुरक्षा व्यवस्था और अन्य आवश्यक अनुमतियों की जांच की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो।

बड़ा हादसा टलने के बाद भी कई सवाल बरकरार
देवघर के देव संघ नवदुर्गा मंदिर के पीछे लगी इस आग ने एक बार फिर शहरी क्षेत्रों में अवैध फैक्ट्रियों और ज्वलनशील पदार्थों के भंडारण की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब पांच घंटे तक अग्निशमन विभाग की टीम को आग बुझाने में जुटे रहना पड़ा। चार दमकल गाड़ियों की मदद से आग पर काबू पाया गया, लेकिन इस दौरान आसपास के लोगों के बीच भय का माहौल बना रहा।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर आग पर समय रहते नियंत्रण नहीं पाया जाता तो इसका दायरा कितना बड़ा हो सकता था? क्या आसपास के घरों और लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती थी? क्या संबंधित विभागों की ओर से फैक्ट्री की नियमित जांच की गई थी?

फिलहाल अग्निशमन विभाग ने आग पर काबू पा लिया है और संचालक के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और फैक्ट्री के अवैध संचालन से जुड़े सवालों पर क्या कार्रवाई होती है।

