By: Mala Mandal
देवघर। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर शनिवार को देवघर में जीवित्पुत्रिका यानी जितिया व्रत श्रद्धा, आस्था और परंपरा के साथ मनाया गया। संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना को लेकर बड़ी संख्या में महिलाओं ने निर्जला उपवास रखा। व्रत के अवसर पर काफी संख्या में व्रती महिलाएं बाबा बैद्यनाथ मंदिर पहुंचीं और विधि-विधान से बाबा बैद्यनाथ की पूजा-अर्चना कर अपनी संतानों के सुखद एवं दीर्घ जीवन की मंगलकामना की।

जितिया व्रत को हिंदू धर्म में कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माताएं अपनी संतान की सलामती, आरोग्य और दीर्घायु की कामना से यह व्रत रखती हैं। व्रत के दौरान महिलाएं अन्न और जल का त्याग कर निर्जला उपवास करती हैं। अष्टमी तिथि को मुख्य रूप से व्रत रखा जाता है, जबकि नवमी तिथि में निर्धारित पारण मुहूर्त के अनुसार व्रत का समापन किया जाता है। जितिया व्रत में पूजा-पाठ के साथ व्रत कथा के श्रवण का भी विशेष महत्व माना गया है।

बाबा बैद्यनाथ मंदिर पहुंचीं व्रती महिलाएं
शनिवार को जितिया व्रत रखने वाली महिलाएं सुबह स्नान आदि के बाद श्रद्धा के साथ बाबा बैद्यनाथ मंदिर पहुंचीं। मंदिर पहुंचने वाली महिलाओं में अपने पुत्र-पुत्री के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र को लेकर विशेष आस्था देखने को मिली। व्रती महिलाओं ने बाबा बैद्यनाथ के दर्शन और पूजा-अर्चना कर संतान के सुखमय जीवन की प्रार्थना की। इस दौरान मंदिर परिसर में महिलाओं ने सामूहिक रूप से जितिया व्रत कथा का श्रवण भी किया। व्रत कथा सुनने के लिए महिलाएं मंदिर परिसर में बैठीं और पूरे श्रद्धाभाव के साथ कथा सुनी। धार्मिक मान्यता के अनुसार जितिया व्रत की कथा का श्रवण व्रत की पूजा प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

संतान के कल्याण की कामना
जितिया व्रत मुख्य रूप से माताओं की संतान के प्रति समर्पण और ममता से जुड़ा पर्व माना जाता है। परंपरा के अनुसार महिलाएं अपनी संतानों के कल्याण, दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए कठिन निर्जला उपवास करती हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से जितिया व्रत करने तथा व्रत कथा का श्रवण करने से संतान पर आने वाले संकट दूर होते हैं और उन्हें दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसी धार्मिक आस्था के साथ देवघर की महिलाओं ने भी जितिया व्रत रखा। कई महिलाओं ने बाबा बैद्यनाथ मंदिर पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजा-अर्चना की। मंदिर परिसर में व्रतियों की मौजूदगी से धार्मिक माहौल बना रहा।

व्रतियों के लिए मंदिर में विशेष व्यवस्था
जितिया व्रत को लेकर बाबा बैद्यनाथ मंदिर में व्रतियों की सुविधा का भी ध्यान रखा गया। मंदिर प्रबंधन की ओर से व्रती महिलाओं को बाबा बैद्यनाथ की पूजा-अर्चना कराने के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। प्रशासनिक भवन स्थित ओवरब्रिज के माध्यम से व्रती महिलाओं को मंदिर में प्रवेश कराया गया, जिससे उन्हें पूजा करने में सुविधा हुई। मंदिर में प्रवेश के बाद महिलाओं ने बाबा बैद्यनाथ की पूजा-अर्चना की और अपनी संतानों की दीर्घायु एवं अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना की। पूजा के बाद कई महिलाएं मंदिर परिसर में बैठकर जितिया व्रत की कथा सुनती नजर आईं। इस दौरान महिलाओं में व्रत को लेकर उत्साह और श्रद्धा का भाव देखने को मिला।

नवमी तिथि में होगा व्रत का पारण
धार्मिक परंपरा के अनुसार जितिया व्रत का मुख्य उपवास अष्टमी तिथि को रखा जाता है। इसके बाद नवमी तिथि में निर्धारित पारण मुहूर्त के अनुसार व्रती महिलाएं व्रत का समापन करती हैं। देवघर में भी शनिवार को निर्जला उपवास रखने के बाद महिलाएं रविवार को निर्धारित पारण मुहूर्त में व्रत का समापन करेंगी। जितिया व्रत के दौरान महिलाएं पूरे दिन बिना अन्न और जल के रहती हैं। कठिन निर्जला उपवास के बावजूद संतान के प्रति ममता और धार्मिक आस्था उन्हें व्रत रखने के लिए प्रेरित करती है। यही वजह है कि हर वर्ष जितिया पर्व के दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं इस परंपरा का पालन करती हैं।

देवघर जैसे धार्मिक नगरी में जितिया व्रत का विशेष धार्मिक महत्व देखने को मिलता है। बाबा बैद्यनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए पहुंचीं महिलाओं ने भगवान शिव से अपनी संतानों के उज्ज्वल भविष्य, अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की। मंदिर परिसर में व्रत कथा के सामूहिक श्रवण और पूजा-अर्चना के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय नजर आया।

जितिया व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि माताओं की अपनी संतानों के प्रति प्रेम, समर्पण और मंगलकामना का भी प्रतीक माना जाता है। इसी भावना के साथ देवघर में महिलाओं ने शनिवार को पूरे श्रद्धाभाव से जीवित्पुत्रिका व्रत रखा और बाबा बैद्यनाथ की पूजा कर संतान के सुखद एवं मंगलमय जीवन की कामना की। रविवार को नवमी तिथि में निर्धारित पारण मुहूर्त के साथ व्रत का समापन होगा।


