By: Mala Mandal
देवघर। आधुनिक तकनीक और प्रशासनिक समन्वय की मदद से देवघर में दो ऐसी महिलाओं की पहचान करने में सफलता मिली है, जो अपने परिवारों से बिछड़ गई थीं। वन स्टॉप सेंटर, देवघर ने यूआईडी (आधार) बायोमेट्रिक तकनीक की सहायता से दोनों महिलाओं की पहचान और उनके मूल निवास स्थान का पता लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस पूरी प्रक्रिया में यूआईडी कार्यालय, देवघर तथा यूआईडी क्षेत्रीय कार्यालय, रांची का सहयोग अहम रहा। महिलाओं की पहचान फिंगरप्रिंट के माध्यम से सत्यापित करने के बाद उनके परिवारों तक पहुंचने का रास्ता आसान हुआ है।

यह पहल उन महिलाओं को उनके परिवारों से दोबारा मिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जो किसी कारणवश अपनों से दूर हो गई थीं। इस मामले में आधार बायोमेट्रिक तकनीक का उपयोग करते हुए महिलाओं की पहचान से संबंधित जानकारी प्राप्त की गई। इसके बाद उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर उनके स्थायी पते का पता लगाया गया। इससे संबंधित अधिकारियों को दोनों महिलाओं के परिजनों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।

आधार बायोमेट्रिक तकनीक से हुई पहचान
वन स्टॉप सेंटर, देवघर के इस प्रयास में आधार से जुड़ी बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया महत्वपूर्ण साबित हुई। किसी महिला की पहचान स्पष्ट नहीं होने या उसके घर-परिवार की जानकारी उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में उसे उसके परिजनों तक पहुंचाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। ऐसी परिस्थितियों में संबंधित विभागों के बीच समन्वय और उपलब्ध तकनीकी संसाधनों का उचित उपयोग काफी मददगार हो सकता है। इस मामले में दोनों महिलाओं के फिंगरप्रिंट के माध्यम से उनकी पहचान से संबंधित रिकॉर्ड का सत्यापन किया गया। यूआईडी कार्यालय, देवघर और यूआईडी क्षेत्रीय कार्यालय, रांची के सहयोग से प्राप्त जानकारी के आधार पर दोनों महिलाओं के मूल निवास स्थान का पता चला। इस प्रक्रिया ने उनकी पहचान स्पष्ट करने और परिवार तक पहुंचने की संभावनाओं को मजबूत किया है।

पहली महिला का कोलकाता से जुड़ा पता मिला
इस अभियान के तहत पहली महिला की पहचान डिम्पी कुमारी के रूप में हुई है। उपलब्ध यूआईडी रिकॉर्ड के अनुसार वह पश्चिम बंगाल के कोलकाता की निवासी हैं। रिकॉर्ड में उनका पता डॉ. लाल मोहन भट्टाचार्जी रोड, एंटाली, सर्कस एवेन्यू, जिला कोलकाता, पश्चिम बंगाल, पिनकोड 700014 दर्ज है। इस जानकारी के सामने आने से महिला के मूल निवास स्थान की पहचान करने में सहायता मिली है। अब संबंधित जानकारी के आधार पर उनके परिवार तक पहुंचने और उनसे संपर्क स्थापित करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। किसी महिला के परिवार से बिछड़ जाने की स्थिति में उसका सही पता मिलना बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इसके आधार पर परिजनों की पहचान और उनसे संपर्क करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।

दूसरी महिला का जामताड़ा जिले में मिला पता
दूसरी महिला की पहचान वंदना मंडल के रूप में हुई है। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार उनका मूल निवास झारखंड के जामताड़ा जिले में है। उनका पता मिहिजाम थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम कुशियारा, पोस्ट केवटजाली, पिनकोड 815354 बताया गया है।जामताड़ा जिले से संबंधित इस जानकारी के मिलने के बाद महिला के परिवार तक पहुंचने की संभावनाएं बढ़ी हैं। स्थानीय स्तर पर संबंधित पते के सत्यापन और परिजनों से संपर्क स्थापित करने में यह जानकारी उपयोगी साबित हो सकती है। दोनों महिलाओं के मामले में उनके मूल निवास स्थान का पता लगना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे उनके परिवारों की पहचान करने और आगे की आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने में संबंधित अधिकारियों को सहायता मिलेगी।

वन स्टॉप सेंटर की भूमिका रही अहम
वन स्टॉप सेंटर महिलाओं को सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। संकटग्रस्त महिलाओं की मदद करने, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और आवश्यक सहायता तक उनकी पहुंच बनाने में ऐसे केंद्रों की भूमिका अहम होती है। परिवार से बिछड़ी महिलाओं की पहचान कर उन्हें उनके परिजनों तक पहुंचाने का प्रयास भी इसी मानवीय दायित्व से जुड़ा है। देवघर वन स्टॉप सेंटर की इस पहल में तकनीकी सहयोग और विभागीय समन्वय का उपयोग किया गया। यूआईडी कार्यालय, देवघर तथा यूआईडी क्षेत्रीय कार्यालय, रांची की सहायता से दोनों महिलाओं के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई। इससे यह स्पष्ट होता है कि आधुनिक तकनीक का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग जरूरतमंद लोगों की सहायता करने में उपयोगी साबित हो सकता है। हालांकि, किसी महिला की पहचान और पता मिल जाने के बाद परिवार से वास्तविक पुनर्मिलन के लिए परिजनों से संपर्क, पहचान का आवश्यक सत्यापन और संबंधित प्रक्रियाओं को पूरा करना भी जरूरी होता है। उपलब्ध जानकारी में दोनों महिलाओं के परिवारों से वास्तविक मुलाकात या पुनर्मिलन पूरा होने की अलग से पुष्टि नहीं की गई है।

तकनीक और मानवीय संवेदना का बेहतर उदाहरण
आज के दौर में तकनीक का उपयोग केवल सरकारी रिकॉर्ड तैयार करने तक सीमित नहीं है। उचित प्रक्रिया और अधिकृत विभागीय सहयोग के माध्यम से इसका इस्तेमाल जरूरतमंद लोगों की पहचान करने तथा उन्हें सहायता उपलब्ध कराने में भी किया जा सकता है। देवघर में सामने आया यह मामला इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। दो महिलाओं की पहचान और उनके मूल निवास स्थान की जानकारी मिलने से उनके परिवारों तक पहुंचने का रास्ता खुला है। वन स्टॉप सेंटर, देवघर और यूआईडी से जुड़े कार्यालयों के संयुक्त प्रयास ने यह दिखाया है कि प्रशासनिक समन्वय और आधुनिक तकनीक के माध्यम से मानवीय समस्याओं के समाधान में मदद मिल सकती है।

परिवार से बिछड़ना किसी भी व्यक्ति के लिए भावनात्मक और सामाजिक रूप से कठिन परिस्थिति होती है। ऐसे में सही पहचान स्थापित कर परिजनों तक पहुंचने में सहायता देना बेहद महत्वपूर्ण है। इस पहल से उम्मीद जगी है कि आवश्यक सत्यापन और संपर्क प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों महिलाओं को उनके परिवारों से मिलाने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकेगा।

देवघर वन स्टॉप सेंटर ने यूआईडी कार्यालय, देवघर और क्षेत्रीय कार्यालय, रांची के सहयोग से आधार बायोमेट्रिक सत्यापन के जरिए दो महिलाओं की पहचान तथा उनके मूल पते का पता लगाने में सफलता हासिल की है। यह पहल तकनीक, प्रशासनिक समन्वय और मानवीय संवेदना के मेल का उदाहरण है।


