By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
देवघर, 27 जून 2026। देवघर जिला प्रशासन ने जिले के तालाबों, नदियों और अन्य जल स्रोतों को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए सख्त रुख अपनाया है। समाहरणालय सभागार में उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया और पुलिस अधीक्षक प्रवीण पुष्कर की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में भूमि विवादों के साथ-साथ जलाशयों पर हो रहे अतिक्रमण (Water Bodies Encroachment) की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य जिले के सभी जल स्रोतों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, अवैध अतिक्रमण हटाना तथा संरक्षण के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करना रहा।

बैठक में जिले के प्रमुख जलाशयों, तालाबों और अन्य जल स्रोतों की वर्तमान स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। संबंधित अधिकारियों से अब तक की गई कार्रवाई, अतिक्रमण की स्थिति तथा भविष्य की रणनीति की जानकारी ली गई। उपायुक्त ने स्पष्ट कहा कि जलाशयों के आसपास किसी भी प्रकार का अवैध अतिक्रमण किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय स्थापित कर संयुक्त अभियान चलाने के निर्देश दिए ताकि अवैध कब्जों को जल्द से जल्द हटाया जा सके। साथ ही राजस्व अभिलेख और नक्शों के आधार पर जलाशयों की मूल सीमा चिन्हित कर उन्हें स्थायी रूप से सुरक्षित करने का निर्देश भी दिया गया।
बैठक में उपायुक्त ने कहा कि जल स्रोतों का संरक्षण जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। यदि जलाशयों पर अतिक्रमण जारी रहता है तो इससे जल भंडारण क्षमता लगातार घटेगी, जिसका सीधा असर भू-जल स्तर, पर्यावरण और भविष्य की जल उपलब्धता पर पड़ेगा। इसलिए प्रशासन जल संरक्षण को लेकर किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतेगा।

उन्होंने कहा कि जिले के सभी तालाबों, पोखरों, नदियों और अन्य जल स्रोतों को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए व्यापक अभियान चलाया जाएगा। भविष्य में इन जलाशयों के संरक्षण, सौंदर्यीकरण और नियमित निगरानी की भी प्रभावी व्यवस्था की जाएगी ताकि दोबारा अवैध कब्जा न हो सके।

बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि यदि नदियों, जल स्रोतों या उनके आसपास स्थित सरकारी भूमि पर किसी प्रकार का अवैध निर्माण किया गया है अथवा निर्माण कार्य जारी है तो उसे तत्काल प्रभाव से रोका जाए। संबंधित अंचलाधिकारी एवं विभागीय अधिकारी ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई करते हुए अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया सुनिश्चित करें।

भूमि विवादों की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि लंबित मामलों का समयबद्ध निष्पादन किया जाए और राजस्व विभाग, पुलिस प्रशासन तथा अन्य संबंधित विभाग आपसी समन्वय बनाकर संवेदनशील मामलों का समाधान करें, ताकि कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो।
बैठक में अधिकारियों से कहा गया कि जल संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं बल्कि सामाजिक दायित्व भी है। इसलिए स्थानीय स्तर पर जनजागरूकता अभियान चलाकर लोगों को जलाशयों के संरक्षण और अतिक्रमण के दुष्परिणामों के बारे में भी जागरूक किया जाए।

उपायुक्त ने दोहराया कि जिला प्रशासन का उद्देश्य केवल अवैध कब्जे हटाना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक जल स्रोतों को सुरक्षित रखना है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते जलाशयों को संरक्षित नहीं किया गया तो भविष्य में जल संकट की समस्या और गंभीर हो सकती है।

बैठक में वन प्रमंडल पदाधिकारी (डीएफओ), नगर आयुक्त, अपर समाहर्ता, अनुमंडल पदाधिकारी देवघर एवं मधुपुर, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी देवघर, मधुपुर एवं सारठ, ट्रैफिक डीएसपी, जिला खनन पदाधिकारी, संबंधित अंचलाधिकारी, सहायक जनसंपर्क पदाधिकारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि आने वाले दिनों में जलाशयों पर अतिक्रमण के विरुद्ध विशेष अभियान चलाया जाएगा और किसी भी दोषी व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का लक्ष्य देवघर जिले के सभी जल स्रोतों को सुरक्षित, स्वच्छ और अतिक्रमण मुक्त बनाना है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ भविष्य की जल आवश्यकताओं को भी सुरक्षित रखा जा सके।

