By: Mala Mandal
नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर राजधानी दिल्ली में जारी प्रदर्शन अब और तेज होता दिखाई दे रहा है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अभिजीत दिपके ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी किसी भी कीमत पर पीछे हटने वाले नहीं हैं और यह लड़ाई देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए लड़ी जा रही है।

अभिजीत दिपके ने कहा कि सरकार की ओर से अब तक जो प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं, वे आंदोलनकारियों की मुख्य मांगों को पूरा नहीं करती हैं। उनका कहना है कि छात्रों और अभ्यर्थियों का भरोसा बहाल करने के लिए सिर्फ आश्वासन पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिम्मेदारी तय करते हुए ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है। इसी कारण प्रदर्शन को लगातार जारी रखने का निर्णय लिया गया है।
उन्होंने कहा कि देशभर के लाखों प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों ने लंबे समय से परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग की है। पेपर लीक जैसी घटनाओं ने युवाओं का विश्वास तोड़ा है और अनेक छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।

दिपके ने दावा किया कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और इसका उद्देश्य केवल छात्रों की आवाज को सरकार तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि आंदोलन में शामिल युवा किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं बल्कि अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने देशभर के छात्रों और युवाओं से आंदोलन के समर्थन की अपील भी की।
इस बीच प्रदर्शन स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। हाल के दिनों में प्रदर्शन के दौरान तनाव और झड़प की घटनाओं के बाद प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

अभिजीत दिपके ने आरोप लगाया कि आंदोलन को कमजोर करने और बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि कुछ असामाजिक तत्वों को प्रदर्शन स्थल पर भेजकर माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया गया, लेकिन आंदोलनकारी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखते रहेंगे। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

दूसरी ओर केंद्र सरकार की ओर से परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने और पेपर लीक मामलों में सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा तथा ऐसे मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था की जाएगी। इसके बावजूद आंदोलनकारी अपनी मूल मांग पर कायम हैं और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से कम किसी समाधान को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं।

राजनीतिक स्तर पर भी यह मुद्दा लगातार चर्चा में बना हुआ है। विपक्षी दल सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों ने परीक्षा प्रणाली में सुधार की बहस को और तेज कर दिया है। छात्रों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी सुधार नहीं किए गए तो प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर असर पड़ सकता है।

फिलहाल प्रदर्शन जारी है और अभिजीत दिपके ने साफ कर दिया है कि आंदोलन तब तक नहीं रुकेगा जब तक धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं देते। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत होती है या नहीं, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। फिलहाल राजधानी में यह आंदोलन राष्ट्रीय राजनीति और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा सबसे चर्चित मुद्दा बना हुआ है।



