By: Vikash Kumar (Vicky)
नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने गुरुवार देर रात मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर एक अहम फैसला लेते हुए इसकी समय-सीमा बढ़ा दी है। आयोग के इस निर्णय से लाखों मतदाताओं को राहत मिलने की उम्मीद है। अब पश्चिम बंगाल, गोवा, लक्षद्वीप, राजस्थान और पुडुचेरी में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया 19 जनवरी तक जारी रहेगी।
चुनाव आयोग ने यह फैसला राज्य निर्वाचन अधिकारियों की रिपोर्ट और जमीनी स्तर पर सामने आई समस्याओं को ध्यान में रखते हुए लिया है। आयोग का मानना है कि समय-सीमा बढ़ने से अधिक से अधिक पात्र नागरिक मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करा सकेंगे या आवश्यक संशोधन करवा पाएंगे।

क्या है SIR प्रक्रिया?
SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन मतदाता सूची को अद्यतन करने की एक विशेष प्रक्रिया है। इसके तहत नए मतदाताओं का नाम जोड़ा जाता है, मृत मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं और गलत प्रविष्टियों को सुधारा जाता है। यह प्रक्रिया चुनाव से पहले मतदाता सूची को पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के उद्देश्य से की जाती है।
चुनाव आयोग का कहना है कि SIR का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न रहे और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न हो।
किन राज्यों में बढ़ी समय-सीमा?
चुनाव आयोग द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की समय-सीमा बढ़ाई गई है, उनमें शामिल हैं—
पश्चिम बंगाल
गोवा
लक्षद्वीप
राजस्थान
पुडुचेरी
इन सभी राज्यों में अब SIR की प्रक्रिया 19 जनवरी तक जारी रहेगी।
क्यों बढ़ानी पड़ी समय-सीमा?
सूत्रों के मुताबिक, कई राज्यों से यह फीडबैक मिला था कि तकनीकी दिक्कतों, दस्तावेज़ों की कमी और जागरूकता के अभाव में बड़ी संख्या में मतदाता तय समय-सीमा के भीतर आवेदन नहीं कर पाए। इसके अलावा, ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया अपेक्षाकृत धीमी रही।चुनाव आयोग ने इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया ताकि कोई भी योग्य मतदाता सूची से बाहर न रह जाए।
राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया
SIR की समय-सीमा बढ़ाए जाने के फैसले पर विभिन्न राजनीतिक दलों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। सत्तारूढ़ दलों ने इसे मतदाता हित में उठाया गया सकारात्मक कदम बताया है, वहीं कुछ विपक्षी दलों ने सवाल उठाया है कि समय-सीमा पहले ही क्यों कम रखी गई थी। हालांकि, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला पूरी तरह निष्पक्ष और प्रशासनिक जरूरतों के आधार पर लिया गया है।

मतदाताओं के लिए क्या है जरूरी?
चुनाव आयोग ने सभी पात्र नागरिकों से अपील की है कि वे निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपने नाम की जांच करें। यदि मतदाता सूची में नाम नहीं है, गलत विवरण दर्ज है या नाम हटाने/जोड़ने की जरूरत है तो संबंधित बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन किया जा सकता है।
ऑनलाइन और ऑफलाइन सुविधा उपलब्ध
SIR प्रक्रिया के तहत मतदाता ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आवेदन कर सकते हैं। चुनाव आयोग की वेबसाइट और NVSP पोर्टल के जरिए आवेदन की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा, स्थानीय स्तर पर BLO घर-घर जाकर भी सत्यापन का कार्य कर रहे हैं।
चुनाव आयोग की सख्त निगरानी
चुनाव आयोग ने कहा है कि SIR प्रक्रिया के दौरान पूरी पारदर्शिता बरती जाएगी। किसी भी तरह की शिकायत के लिए टोल-फ्री नंबर और ऑनलाइन शिकायत प्रणाली भी सक्रिय रखी गई है।
लोकतंत्र की मजबूती की दिशा में कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि मतदाता सूची का नियमित और गहन पुनरीक्षण लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है। इससे चुनाव प्रक्रिया पर जनता का भरोसा बढ़ता है और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित होते हैं।
आगे क्या?
अब 19 जनवरी के बाद चुनाव आयोग अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करेगा। इसके बाद आगामी चुनावों की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाएगा।

