By: Vikash Kumar (Vicky)
देवघर। झारखंड का देवघर न केवल धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है, बल्कि इसे मनोकामना लिंग के रूप में भी जाना जाता है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। इसी आस्था और मानवता से जुड़ा एक भावनात्मक मामला देवघर से सामने आया है, जहां स्पेन में रहने वाले एक विदेशी दंपत्ति ने एक अनाथ बच्ची को गोद लेकर उसे अपने जीवन का सबसे बड़ा वरदान बताया।

स्पेन निवासी विदेशी दंपत्ति मिंग्रेल और मार्का ने देवघर आकर न सिर्फ कानूनी प्रक्रिया के तहत बच्ची को गोद लिया, बल्कि इस पूरे अनुभव को बाबा बैद्यनाथ और माता पार्वती का आशीर्वाद बताया। दंपत्ति का कहना है कि वे भले ही धार्मिक परंपराओं का नियमित रूप से पालन नहीं करते, लेकिन देवघर आकर उन्हें एक अद्भुत आध्यात्मिक अनुभूति हुई है।
“अब हमारी फैमिली पूरी हो गई” – विदेशी दंपत्ति
दत्तक ग्रहण के बाद दंपत्ति ने भावुक होते हुए कहा कि लंबे समय से वे संतान सुख की कामना कर रहे थे। बच्ची के उनके जीवन में आने से उनका परिवार अब पूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि उनके जीवन का सबसे सुखद और भावनात्मक पल है। मिंग्रेल और मार्का ने बताया कि देवघर आकर उन्होंने बाबा बैद्यनाथ और माता पार्वती के दर्शन किए और बच्ची को ईश्वर का आशीर्वाद माना। उनके अनुसार, यह बच्ची उनके जीवन में नई ऊर्जा, प्रेम और जिम्मेदारी लेकर आई है।
जिला प्रशासन की निगरानी में पूरी हुई प्रक्रिया
इस अंतरराष्ट्रीय दत्तक ग्रहण की पूरी प्रक्रिया देवघर जिला प्रशासन की कड़ी निगरानी में संपन्न हुई। उपायुक्त की अध्यक्षता में विशिष्ट दत्तक ग्रहण समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें विदेशी दंपत्ति द्वारा प्रस्तुत सभी आवश्यक दस्तावेजों की बारीकी से जांच की गई। समिति ने यह सुनिश्चित किया कि दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया दत्तक ग्रहण विनियम 2022 के अंतर्गत केंद्रीय बाल कल्याण समिति (CWC) के सभी नियमों और दिशा-निर्देशों के अनुसार हो। सभी औपचारिकताओं और कानूनी पहलुओं को पूरा करने के बाद बच्ची को गोद देने की अनुमति प्रदान की गई।
अनाथ बच्चों को मिला सुरक्षित और स्नेहिल परिवार
उपायुक्त के निर्देश पर दत्तक ग्रहण का अंतिम आदेश पारित किया गया, जिसके परिणामस्वरूप एक अनाथ और परित्यक्त बच्ची को स्नेह, सुरक्षा और उज्ज्वल भविष्य देने वाला परिवार मिल सका। जिला प्रशासन का कहना है कि इस तरह की पहल से समाज में सकारात्मक संदेश जाता है और जरूरतमंद बच्चों को बेहतर जीवन का अवसर मिलता है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय दत्तक ग्रहण में बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य को लेकर विशेष सावधानी बरती जाती है, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता न हो।

आम लोगों से दत्तक ग्रहण की अपील
देवघर जिला प्रशासन की ओर से आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि यदि कोई व्यक्ति या दंपत्ति अनाथ या परित्यक्त बच्चों को गोद लेना चाहता है, तो वे दत्तक ग्रहण विनियम 2022 के तहत निर्धारित सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए दत्तक ग्रहण कर सकते हैं। प्रशासन का कहना है कि दत्तक ग्रहण न केवल बच्चों को सुरक्षित भविष्य देता है, बल्कि समाज में मानवीय मूल्यों को भी मजबूत करता है। इससे उन बच्चों को नई पहचान, परिवार और जीवन का उद्देश्य मिलता है, जो परिस्थितियों के कारण माता-पिता का साया खो चुके होते हैं।
देवघर: आस्था के साथ मानवता का केंद्र
यह पूरा मामला देवघर की पहचान को और भी मजबूत करता है। जहां एक ओर यह नगरी धार्मिक आस्था का केंद्र है, वहीं दूसरी ओर यहां मानवता, करुणा और सामाजिक जिम्मेदारी की भी मिसाल देखने को मिलती है। विदेशी दंपत्ति द्वारा बच्ची को गोद लेने की यह घटना न केवल प्रशासनिक सफलता है, बल्कि यह दर्शाती है कि देवघर की धरती आज भी लोगों की मुरादें पूरी कर रही है। यह कहानी उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है, जो जीवन में संतान सुख की कामना करते हैं या किसी अनाथ बच्चे को बेहतर भविष्य देना चाहते हैं। देवघर में हुआ यह दत्तक ग्रहण निश्चित रूप से समाज के लिए एक सकारात्मक और भावनात्मक संदेश है।

