By: Vikash Kumar (Vicky)

Fiber Deficiency Symptoms: शरीर को स्वस्थ रखने के लिए प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स के साथ-साथ पर्याप्त मात्रा में फाइबर की भी जरूरत होती है। फाइबर मुख्य रूप से पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। यह पाचन तंत्र को सही तरीके से काम करने में मदद करता है और मल त्याग को आसान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
आजकल बदलती जीवनशैली और खान-पान की वजह से कई लोगों की डाइट में फाइबर की मात्रा कम हो गई है। सफेद ब्रेड, मैदा, ज्यादा प्रोसेस्ड फूड और पैकेज्ड स्नैक्स पर निर्भरता बढ़ने के कारण फल, सब्जियां, साबुत अनाज और दालों की मात्रा कम हो सकती है। ऐसे में शरीर को पर्याप्त फाइबर नहीं मिल पाता।
गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट के अनुसार, डाइट में फाइबर कम होने पर इसका असर पाचन तंत्र पर दिखाई दे सकता है। हालांकि कब्ज या पेट से जुड़ी हर परेशानी का कारण केवल फाइबर की कमी ही हो, ऐसा जरूरी नहीं है।

कब्ज की समस्या हो सकती है
फाइबर की कमी का एक आम संकेत कब्ज हो सकता है। जब भोजन में पर्याप्त फाइबर नहीं होता तो मल का वॉल्यूम कम हो सकता है और मल त्याग करने में परेशानी हो सकती है। मल कठोर हो सकता है और टॉयलेट में ज्यादा जोर लगाना पड़ सकता है।
अगर आपको लगातार कब्ज रहती है या मल त्याग करने में परेशानी होती है, तो अपनी डाइट पर ध्यान देना जरूरी है।
पेट फूलना और गैस की शिकायत
फाइबर पाचन तंत्र के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इसकी मात्रा अचानक बहुत ज्यादा बढ़ाने से भी कुछ लोगों को गैस और पेट फूलने की समस्या हो सकती है। इसलिए अगर आपकी डाइट में फाइबर बहुत कम है तो इसे धीरे-धीरे बढ़ाना बेहतर होता है।
लंबे समय तक कम फाइबर वाली डाइट लेने पर कब्ज के साथ पेट भारी या फूला हुआ महसूस हो सकता है। लगातार गैस और ब्लोटिंग को केवल फाइबर की कमी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

मल त्याग में परेशानी
फाइबर मल को पर्याप्त मात्रा और नरमी देने में मदद करता है। डाइट में इसकी कमी होने पर मल कठोर हो सकता है और मल त्याग के दौरान ज्यादा जोर लगाना पड़ सकता है।
अगर यह समस्या लंबे समय तक बनी रहती है तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है, क्योंकि कब्ज के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं।
भूख जल्दी लगना
फाइबर युक्त भोजन पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराने में मदद करता है। फल, सब्जियां, दालें, बीन्स और साबुत अनाज जैसे खाद्य पदार्थ भोजन को अधिक संतोषजनक बना सकते हैं।
अगर भोजन में फाइबर कम और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक है तो कुछ लोगों को भोजन के बाद जल्दी भूख लग सकती है और बार-बार कुछ खाने की इच्छा हो सकती है।

ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में फाइबर की भूमिका
फाइबर, खासकर घुलनशील फाइबर, पाचन और पोषक तत्वों के अवशोषण की गति को प्रभावित कर सकता है। इससे भोजन के बाद ब्लड शुगर में अचानक बढ़ोतरी को कम करने में मदद मिल सकती है।
इसी वजह से साबुत अनाज, दालें, सब्जियां, फल और अन्य फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ संतुलित डाइट का हिस्सा माने जाते हैं। डायबिटीज से पीड़ित लोगों को अपनी डाइट डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के अनुसार तय करनी चाहिए।
शरीर में फाइबर की कमी कैसे पूरी करें?
फाइबर की जरूरत पूरी करने का अच्छा तरीका रोजाना की डाइट में प्राकृतिक फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करना है। इसके लिए केवल किसी एक खाद्य पदार्थ पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग स्रोतों को भोजन में शामिल करना चाहिए।

फल और सब्जियां बढ़ाएं
सेब, नाशपाती, अमरूद, संतरा और अन्य फल फाइबर के अच्छे स्रोत हो सकते हैं। जहां संभव हो, फल को जूस के बजाय साबुत खाना बेहतर होता है, क्योंकि जूस बनाने के दौरान फाइबर की मात्रा कम हो सकती है।
हरी पत्तेदार सब्जियां, गाजर, भिंडी, मटर, बीन्स और अन्य सब्जियों को नियमित भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है।
दाल और बीन्स को डाइट में शामिल करें
दालें, चना, राजमा, लोबिया और अन्य फलियां फाइबर के साथ-साथ प्रोटीन भी प्रदान करती हैं। इन्हें अपनी जरूरत और पाचन क्षमता के अनुसार भोजन में शामिल किया जा सकता है।
अगर आपकी डाइट में अभी फाइबर बहुत कम है तो अचानक बहुत अधिक दाल या बीन्स खाने से गैस और पेट फूलने की परेशानी हो सकती है। इसलिए मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाएं।

साबुत अनाज से बढ़ाएं फाइबर
मैदा और अत्यधिक रिफाइंड अनाज की जगह साबुत अनाज को भोजन में शामिल करना फाइबर बढ़ाने का आसान तरीका हो सकता है। गेहूं का आटा, ओट्स, दलिया, ब्राउन राइस और अन्य साबुत अनाज डाइट में शामिल किए जा सकते हैं।
ब्रेड या अन्य पैकेज्ड फूड खरीदते समय लेबल पर फाइबर की मात्रा देखना भी उपयोगी हो सकता है।
फाइबर बढ़ाने के साथ पानी भी जरूरी
डाइट में फाइबर बढ़ाते समय पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है। पर्याप्त तरल पदार्थ न लेने पर कुछ लोगों में ज्यादा फाइबर खाने से कब्ज या पेट की परेशानी बढ़ सकती है।
हालांकि हर व्यक्ति की पानी की जरूरत अलग होती है। मौसम, शारीरिक गतिविधि, उम्र और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार पानी की आवश्यकता बदल सकती है।

फाइबर सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर से पूछें
अगर भोजन से पर्याप्त फाइबर लेना मुश्किल हो रहा है तो डॉक्टर कुछ लोगों को फाइबर सप्लीमेंट लेने की सलाह दे सकते हैं। लेकिन बिना सलाह के लगातार फाइबर सप्लीमेंट लेना सही नहीं है।
खासकर अगर आपको लंबे समय से कब्ज, पेट दर्द, उल्टी, मल में खून, अचानक वजन कम होना या आंतों से जुड़ी कोई बीमारी है तो केवल फाइबर बढ़ाकर समस्या का इलाज करने की कोशिश न करें।
कितनी मात्रा में फाइबर चाहिए?
फाइबर की दैनिक जरूरत उम्र, लिंग और कुल डाइट के अनुसार अलग हो सकती है। सामान्य तौर पर वयस्कों के लिए रोजाना लगभग 25 से 30 ग्राम फाइबर लेने की सलाह दी जाती है, हालांकि व्यक्तिगत जरूरत अलग हो सकती है।
इसलिए अपनी डाइट और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार सही मात्रा के लिए डॉक्टर या योग्य डाइटिशियन से सलाह लेना बेहतर है।

फाइबर बढ़ाने का आसान तरीका
अगर आपकी डाइट में फाइबर कम है तो एकदम से पूरी डाइट बदलने के बजाय छोटे बदलाव करें। नाश्ते में दलिया या ओट्स, दिन में एक साबुत फल, भोजन में हरी सब्जियां और दाल तथा जरूरत के अनुसार साबुत अनाज शामिल किए जा सकते हैं।
धीरे-धीरे फाइबर की मात्रा बढ़ाने और पर्याप्त पानी पीने से पाचन तंत्र को इसे अपनाने में मदद मिल सकती है।
कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
अगर कब्ज या पेट की समस्या लगातार बनी हुई है, मल में खून आता है, पेट में तेज या लगातार दर्द रहता है, बिना वजह वजन कम हो रहा है, बार-बार उल्टी होती है या मल त्याग की आदत में अचानक बड़ा बदलाव आया है, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

ऐसे लक्षणों को केवल फाइबर की कमी समझकर लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
फाइबर हमारी डाइट का जरूरी हिस्सा है और यह पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने के साथ-साथ मल त्याग को सामान्य रखने में मदद करता है। कब्ज, कठोर मल और पेट से जुड़ी कुछ परेशानियां कम फाइबर वाली डाइट से जुड़ी हो सकती हैं, लेकिन इनके पीछे कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं।
फाइबर की मात्रा बढ़ाने के लिए फल, सब्जियां, दालें, चना, बीन्स और साबुत अनाज को रोजाना के भोजन में शामिल किया जा सकता है। फाइबर बढ़ाते समय इसे धीरे-धीरे बढ़ाना और पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है।
यह लेख सामान्य स्वास्थ्य और पोषण संबंधी जानकारी के लिए है। यह किसी बीमारी का निदान या व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह नहीं है। लगातार कब्ज, पेट दर्द, मल में खून, अचानक वजन कम होना या अन्य गंभीर लक्षण होने पर योग्य डॉक्टर या गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से संपर्क करें। अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार डाइट या फाइबर सप्लीमेंट में बदलाव करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित है।
