By: Mala Mandal
देवघर। बाबा बैद्यनाथ की नगरी देवघर से आस्था, श्रद्धा और विश्व कल्याण का संदेश लेकर तीर्थ पुरोहितों का एक जत्था शुक्रवार को गोमुख-गंगोत्री यात्रा के लिए रवाना हुआ। गोमुख-गंगोत्री समाज के बैनर तले आयोजित इस धार्मिक यात्रा में शामिल तीर्थ पुरोहित गंगोत्री से गंगाजल लेकर पैदल बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचेंगे। यहां पवित्र गंगाजल से बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक कर विश्व शांति, सुख-समृद्धि और जनकल्याण की कामना की जाएगी। देवघर के तीर्थ पुरोहितों की यह परंपरा वर्ष 1968 से निरंतर जारी है और धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक कल्याण के संदेश को भी आगे बढ़ा रही है।

बाबा बैद्यनाथ की पूजा-अर्चना के बाद यात्रा का शुभारंभ
गोमुख-गंगोत्री यात्रा पर निकलने से पहले सभी यात्रियों ने बाबा बैद्यनाथ मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की। इस दौरान भगवान भोलेनाथ का रुद्राभिषेक कर यात्रा की सफलता, सभी यात्रियों की सुरक्षा और मंगलमय सफर की कामना की गई। पूजा-अर्चना के बाद शुक्रवार की दोपहर शिवगंगा तट स्थित गणेश कला मंदिर से तीर्थ पुरोहितों का जत्था गोमुख-गंगोत्री के लिए रवाना हुआ। यात्रा के शुभारंभ के मौके पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। भगवान शिव के प्रति अटूट विश्वास और धार्मिक परंपरा के निर्वहन का संकल्प लेकर निकले यात्रियों का उद्देश्य केवल बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करना ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में शांति, सद्भाव और कल्याण की कामना करना भी है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद इस यात्रा को जारी रखना तीर्थ पुरोहित समाज की दृढ़ इच्छाशक्ति और धार्मिक समर्पण को दर्शाता है।

वर्ष 1968 में हुई थी गोमुख-गंगोत्री यात्रा की शुरुआत
गोमुख-गंगोत्री यात्रा के संबंध में कुलदीप खवाड़े ने बताया कि देवघर के तीर्थ पुरोहितों द्वारा इस परंपरा की शुरुआत वर्ष 1968 में की गई थी। उस समय प्रो. रामबाबू मिश्र के नेतृत्व में गोमुख-गंगोत्री समाज के बैनर तले इस धार्मिक यात्रा का शुभारंभ हुआ था। इसके बाद से प्रत्येक वर्ष तीर्थ पुरोहित समाज के सदस्य इस परंपरा का निर्वहन करते आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस यात्रा के पीछे विश्व कल्याण की भावना प्रमुख है। तीर्थ पुरोहित गंगोत्री से पवित्र गंगाजल लेकर कठिन रास्तों से गुजरते हुए बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। इस दौरान विश्व में शांति स्थापित होने, लोगों के जीवन में सुख-समृद्धि आने और समाज में सद्भाव बना रहने की प्रार्थना की जाती है। पिछले कई दशकों से जारी यह यात्रा देवघर की धार्मिक पहचान और तीर्थ पुरोहितों की आस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। बदलते समय और कठिन परिस्थितियों के बीच भी इस परंपरा का लगातार जारी रहना इसकी आध्यात्मिक महत्ता को दर्शाता है।

करीब 1800 किलोमीटर की कठिन यात्रा करेंगे पूरी
गोमुख-गंगोत्री से बाबा बैद्यनाथ धाम तक गंगाजल लाने का सफर आसान नहीं है। यात्रा में शामिल तीर्थ पुरोहितों को करीब 1800 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करनी होती है। इस दौरान कठिन पहाड़ी रास्तों, दुर्गम मार्गों और यात्रा की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद बाबा बैद्यनाथ के प्रति श्रद्धा और विश्व कल्याण का संकल्प यात्रियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। यात्रा के दौरान भगवान शिव का स्मरण करते हुए तीर्थ पुरोहित अपने गंतव्य की ओर बढ़ते हैं। गंगोत्री से लाए गए पवित्र जल को बाबा बैद्यनाथ को अर्पित करना इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव का जलाभिषेक श्रद्धा, समर्पण और आध्यात्मिक शुद्धता का प्रतीक माना जाता है। तीर्थ पुरोहितों की यह यात्रा उत्तराखंड के पवित्र गंगोत्री क्षेत्र और झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम के बीच धार्मिक आस्था की एक विशेष कड़ी भी स्थापित करती है। यह परंपरा श्रद्धालुओं को भारतीय तीर्थ परंपराओं, आध्यात्मिक मूल्यों और सामूहिक कल्याण की भावना से जोड़ती है।

विश्व शांति और जनकल्याण के लिए करेंगे जलाभिषेक
इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य विश्व कल्याण की कामना करना है। तीर्थ पुरोहित समाज के सदस्य बाबा बैद्यनाथ के दरबार में पहुंचकर गंगाजल अर्पित करेंगे और विश्व शांति, मानव कल्याण तथा समाज में सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करेंगे। उनका मानना है कि धार्मिक यात्राएं केवल व्यक्तिगत आस्था तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि इनके माध्यम से समाज में सकारात्मकता, सद्भाव और सेवा की भावना को भी बढ़ावा मिलता है। देवघर बाबा बैद्यनाथ धाम के कारण देश-विदेश में धार्मिक महत्व रखता है। यहां हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में गोमुख-गंगोत्री यात्रा देवघर की धार्मिक परंपराओं को एक विशिष्ट पहचान देती है। दशकों से लगातार जारी यह यात्रा नई पीढ़ी को भी अपनी सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक परंपराओं से परिचित कराने का माध्यम है।

यात्रा में शामिल हैं ये तीर्थ पुरोहित
इस वर्ष गोमुख-गंगोत्री यात्रा पर रवाना हुए जत्थे में कुलदीप खवाड़े, यश अडेवार, राकेश झा, आनंद झा, सोनू खवाड़े, मुको महाराज, रामबाबू परिहस्त, अप्पू नरौने, सुमित मिश्रा, सौरभ झा, रोनी झा, शारदानंद खवाड़े, नीरज राज जेजवाड़े, रमेश झा, राजू झा, बाबा बलियसे, मन्ना द्वारी और बबलू द्वारी शामिल हैं। इनके अलावा तीन अनुसेवक गोवर्धन पांडे, रंजन और जीतू यादव भी जत्थे के साथ रवाना हुए हैं।

सभी यात्री गंगोत्री से गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचने और निर्धारित धार्मिक परंपरा के अनुसार जलाभिषेक करने का संकल्प लेकर निकले हैं। यात्रा की समाप्ति पर बाबा बैद्यनाथ के चरणों में पवित्र जल अर्पित कर विश्व कल्याण और जनजीवन में सुख-शांति की प्रार्थना की जाएगी।

कुल मिलाकर, वर्ष 1968 से चली आ रही गोमुख-गंगोत्री यात्रा देवघर के तीर्थ पुरोहितों की अटूट श्रद्धा, धार्मिक विरासत और विश्व कल्याण की भावना का प्रतीक है। करीब 1800 किलोमीटर की कठिन यात्रा के माध्यम से यह जत्था एक बार फिर बाबा बैद्यनाथ के दरबार में मानवता की सुख-समृद्धि और विश्व शांति का संदेश लेकर पहुंचेगा।



