By: Vikash Kumar (Vicky)
कई लोगों को रात में सोते समय अचानक हाथ सुन्न होने, उंगलियों में झनझनाहट महसूस होने या हाथ में सुई चुभने जैसा एहसास होता है। कुछ लोगों की नींद इस परेशानी के कारण खुल जाती है और हाथ को हिलाने या स्थिति बदलने के बाद धीरे-धीरे आराम मिलता है। अक्सर लोग इसे सोने के गलत तरीके या हाथ पर दबाव पड़ने की सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि, अगर यह परेशानी बार-बार हो रही है, लंबे समय तक बनी रहती है या इसके साथ दर्द और कमजोरी भी महसूस होती है, तो इसके पीछे कोई अन्य कारण भी हो सकता है। हाथों का सुन्न होना कई बार नसों पर दबाव पड़ने के कारण होता है। इसके अलावा कलाई की नस दबना, गर्दन से जुड़ी समस्याएं, डायबिटीज और विटामिन की कमी जैसी स्थितियां भी इसकी वजह बन सकती हैं। ऐसे में जरूरी है कि लक्षणों को समझा जाए और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह ली जाए। आइए जानते हैं कि रात में सोते समय हाथ सुन्न होने के क्या कारण हो सकते हैं और इस परेशानी से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

1. सोने के गलत तरीके से दब सकती हैं नसें
रात में हाथ सुन्न होने की एक सामान्य वजह सोने की गलत मुद्रा हो सकती है। कई बार लोग सोते समय हाथ के नीचे सिर रख लेते हैं या शरीर का पूरा वजन हाथ पर डालकर सोते हैं। इस स्थिति में हाथ की नसों पर दबाव पड़ सकता है, जिससे हाथ या उंगलियों में सुन्नपन और झनझनाहट महसूस होने लगती है। अगर हाथ पर लंबे समय तक दबाव बना रहे, तो नसों तक संकेत पहुंचने की प्रक्रिया अस्थायी रूप से प्रभावित हो सकती है। आमतौर पर हाथ की स्थिति बदलने और दबाव हटाने के बाद धीरे-धीरे आराम मिलने लगता है। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो सोते समय हाथों को शरीर के नीचे दबाकर रखने से बचें। हाथों और कलाई को आरामदायक स्थिति में रखें। हालांकि, अगर हाथ बार-बार सुन्न होता है या स्थिति बदलने के बाद भी आराम नहीं मिलता, तो इसे केवल सोने के तरीके से जुड़ी समस्या मानकर नजरअंदाज न करें।

2. कार्पल टनल सिंड्रोम भी हो सकता है कारण
रात में हाथ और उंगलियां सुन्न होने की एक महत्वपूर्ण वजह कार्पल टनल सिंड्रोम हो सकती है। यह समस्या तब होती है, जब कलाई में मौजूद मीडियन नर्व पर दबाव पड़ता है। यह नस अंगूठे, तर्जनी, मध्यमा और अनामिका के कुछ हिस्से में संवेदना पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस समस्या में खासतौर पर रात के समय उंगलियों में झनझनाहट, सुन्नपन, दर्द या जलन महसूस हो सकती है। कुछ लोगों को हाथ झटकने या कलाई की स्थिति बदलने से थोड़ी राहत मिलती है। परेशानी बढ़ने पर चीजों को पकड़ने में कठिनाई या अंगूठे के आसपास कमजोरी भी महसूस हो सकती है। अगर ये लक्षण बार-बार दिखाई दे रहे हैं, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। समय पर पहचान होने से उचित उपचार और कलाई पर दबाव कम करने के उपाय अपनाए जा सकते हैं।

3. गर्दन की नसों पर दबाव पड़ना
कई बार हाथों में सुन्नपन की समस्या का संबंध गर्दन से भी हो सकता है। गर्दन की रीढ़ में मौजूद हड्डियों, डिस्क या आसपास के ऊतकों में बदलाव के कारण किसी नस पर दबाव पड़ सकता है। इस स्थिति में गर्दन से कंधे और हाथ तक दर्द, झनझनाहट या सुन्नपन महसूस हो सकता है। कुछ लोगों को गर्दन घुमाने पर परेशानी बढ़ती हुई महसूस होती है। वहीं, हाथ में कमजोरी या उंगलियों में संवेदना कम होने जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। अगर रात में हाथ सुन्न होने के साथ गर्दन में दर्द, कंधे में खिंचाव या हाथ तक फैलने वाला दर्द भी है, तो डॉक्टर से सलाह लें। बिना जांच के गर्दन की समस्या मानकर खुद से दवाइयां लेना या जोरदार मालिश करना उचित नहीं है।

4. डायबिटीज के कारण भी हो सकती है परेशानी
डायबिटीज यानी मधुमेह का असर शरीर की नसों पर भी पड़ सकता है। लंबे समय तक ब्लड शुगर का स्तर नियंत्रित न रहने पर नसों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है। इसे डायबिटिक न्यूरोपैथी कहा जाता है। इस स्थिति में हाथों और पैरों में झनझनाहट, जलन, सुन्नपन या संवेदना कम होने जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं। हालांकि, डायबिटीज से जुड़ी नसों की समस्या अक्सर पैरों में अधिक दिखाई देती है, लेकिन हाथ भी प्रभावित हो सकते हैं। अगर आपको डायबिटीज है और रात में बार-बार हाथ सुन्न होते हैं, तो अपने डॉक्टर को इसकी जानकारी दें। ब्लड शुगर की नियमित जांच और उसे नियंत्रित रखने से नसों को होने वाले अतिरिक्त नुकसान का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।

5. विटामिन B12 की कमी को भी न करें नजरअंदाज
विटामिन B12 शरीर में नसों के सामान्य कामकाज और लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण के लिए जरूरी होता है। इसकी कमी होने पर कुछ लोगों को हाथ-पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन, कमजोरी और चलने में संतुलन से जुड़ी परेशानी हो सकती है। अगर हाथ सुन्न होने के साथ थकान, कमजोरी या पैरों में भी झनझनाहट महसूस होती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना उपयोगी हो सकता है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर खून की जांच के जरिए विटामिन B12 के स्तर का पता लगा सकते हैं। ध्यान रखें कि हर बार हाथ सुन्न होने का कारण विटामिन की कमी नहीं होता। बिना जांच के विटामिन की गोलियां या इंजेक्शन लेना शुरू करने के बजाय पहले सही कारण का पता लगाना बेहतर है।

6. सोने के दौरान कलाई मुड़कर रह जाना
कई लोग सोते समय अपनी कलाई को ज्यादा मोड़कर रखते हैं। कुछ लोग हाथों को सीने के पास मोड़कर सोते हैं, जबकि कुछ की कलाई लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहती है। इससे कलाई के आसपास की नसों पर दबाव बढ़ सकता है और रात में उंगलियों में झनझनाहट या सुन्नपन महसूस हो सकता है। अगर आपको खासतौर पर रात में यह परेशानी होती है, तो कलाई को सीधा और आरामदायक स्थिति में रखने की कोशिश करें। बार-बार होने वाली समस्या में डॉक्टर की सलाह से कलाई को सहारा देने वाले स्प्लिंट का इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर इसके बावजूद परेशानी बनी रहती है, तो जांच कराना जरूरी है, क्योंकि कलाई का मुड़ना किसी दूसरी समस्या को भी बढ़ा सकता है।

7. थायरॉइड और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं
कुछ स्वास्थ्य स्थितियां भी नसों से जुड़ी परेशानी का जोखिम बढ़ा सकती हैं। उदाहरण के लिए, थायरॉइड हार्मोन की कमी यानी हाइपोथायरॉइडिज्म का संबंध कुछ लोगों में कार्पल टनल सिंड्रोम से हो सकता है। इसके अलावा कुछ अन्य बीमारियां, चोटें और दवाइयां भी नसों को प्रभावित कर सकती हैं। अगर हाथों का सुन्न होना लगातार बना हुआ है या इसके साथ दूसरे लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं, तो डॉक्टर आपकी मेडिकल हिस्ट्री और लक्षणों के आधार पर जांच की सलाह दे सकते हैं। जरूरत के अनुसार ब्लड शुगर, विटामिन B12, थायरॉइड या नसों से जुड़ी अन्य जांचें की जा सकती हैं।
रात में हाथ सुन्न होने पर क्या करें?
अगर सोते समय हाथ सुन्न हो जाए, तो सबसे पहले हाथ पर पड़ रहे दबाव को हटाएं और उसकी स्थिति बदलें। हाथ को धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लाएं। अगर आराम महसूस हो, तो भी ध्यान दें कि यह समस्या कितनी बार हो रही है।

कुछ आसान उपाय मददगार हो सकते हैं:
– सोते समय हाथों को सिर या शरीर के नीचे दबाकर न रखें।
– कलाई को बहुत ज्यादा मोड़कर सोने से बचें।
– लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहने पर बीच-बीच में हाथ और कलाई को आराम दें।
– बार-बार सुन्नपन होने पर लक्षणों का समय, अवधि और प्रभावित उंगलियों पर ध्यान दें।
– लगातार परेशानी होने पर डॉक्टर से जांच कराएं।

किन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए?
अगर हाथों का सुन्नपन बार-बार हो रहा है, लगातार बना रहता है या उसके साथ पकड़ कमजोर होने, चीजें हाथ से छूटने, दर्द अथवा संवेदना कम होने जैसी समस्या है, तो चिकित्सकीय सलाह लें। अगर अचानक एक तरफ का हाथ सुन्न या कमजोर हो जाए और साथ में चेहरे का एक हिस्सा लटकने, बोलने में परेशानी, देखने में बदलाव, संतुलन बिगड़ने या अचानक तेज सिरदर्द जैसे लक्षण हों, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें। ये स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षणों में अपने आप ठीक होने का इंतजार न करें।
रात में सोते समय हाथ सुन्न होना कई बार हाथ पर दबाव पड़ने या कलाई की स्थिति के कारण हो सकता है। लेकिन अगर यह समस्या नियमित रूप से हो रही है, तो कार्पल टनल सिंड्रोम, गर्दन की नसों पर दबाव, डायबिटीज या विटामिन B12 की कमी जैसे कारणों की जांच जरूरी हो सकती है। सही कारण की पहचान होने पर उचित उपचार किया जा सकता है। इसलिए बार-बार होने वाले सुन्नपन को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर डॉक्टर से सलाह लें।
यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसे डॉक्टर की जांच, निदान या उपचार का विकल्प न समझें। हाथों में सुन्नपन के लगातार बने रहने या अचानक गंभीर लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सहायता लें।

