By: Mala Mandal
Adhik Pradosh Vrat 2026: सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। जब प्रदोष व्रत अधिक मास में पड़ता है तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिक मास को भगवान विष्णु का प्रिय महीना माना जाता है, जबकि प्रदोष व्रत भगवान शिव की आराधना को समर्पित होता है। ऐसे में अधिक मास और प्रदोष व्रत का यह दुर्लभ संयोग भक्तों के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।

ज्योतिष और धर्म शास्त्रों के अनुसार अधिक प्रदोष व्रत के दिन विधि-विधान से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का आगमन होता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए जप, तप, दान और पूजा का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है। यही कारण है कि देशभर के शिवालयों में इस दिन विशेष पूजा-अर्चना और रुद्राभिषेक का आयोजन किया जाता है।
क्या है अधिक प्रदोष व्रत का महत्व?
प्रदोष व्रत प्रत्येक महीने की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। यह व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। लेकिन जब यह व्रत अधिक मास में आता है तो इसका धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है। मान्यता है कि इस दिन शिव भक्त सच्चे मन से पूजा करें तो उनके जीवन की अनेक बाधाएं दूर हो सकती हैं। धार्मिक ग्रंथों में वर्णन मिलता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव अपने भक्तों की प्रार्थनाएं विशेष रूप से सुनते हैं। इसलिए इस समय की गई पूजा और आराधना को अत्यंत फलदायी माना गया है।

अधिक प्रदोष व्रत पर करें ये खास उपाय
शिवलिंग पर जल और गंगाजल अर्पित करें
अधिक प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान के बाद शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दूध और शहद अर्पित करें। ऐसा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
बेलपत्र जरूर चढ़ाएं
भगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय है। पूजा के दौरान तीन पत्तियों वाला बेलपत्र अर्पित करें और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें। यह उपाय मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए शुभ माना जाता है।

महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें
इस दिन महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
प्रदोष काल में दीपक जलाएं
सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में भगवान शिव के सामने घी का दीपक जलाएं। धार्मिक मान्यता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि का वास होता है और आर्थिक परेशानियां कम हो सकती हैं।
जरूरतमंदों को दान करें
अधिक मास और प्रदोष व्रत दोनों ही दान-पुण्य के लिए विशेष माने गए हैं। इस दिन भोजन, वस्त्र, अनाज या धन का दान करना शुभ फलदायी माना जाता है।

किन समस्याओं से मिल सकती है राहत?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिक प्रदोष व्रत पर पूजा और उपाय करने से वैवाहिक जीवन की समस्याएं, आर्थिक तंगी, करियर में रुकावटें, मानसिक तनाव और पारिवारिक कलह जैसी परेशानियों से राहत मिलने की संभावना मानी जाती है। हालांकि इसका आधार धार्मिक आस्था और विश्वास है।

पूजा के दौरान रखें इन बातों का ध्यान
पूजा से पहले घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई करें।
सात्विक भोजन ग्रहण करें और क्रोध से बचें।
भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए पूजा करें।
प्रदोष काल में शिव चालीसा और शिव मंत्रों का पाठ करें।

अधिक प्रदोष व्रत का यह दुर्लभ संयोग भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद शुभ अवसर माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा और भक्ति से किए गए उपाय जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। यदि आप भी भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं तो अधिक प्रदोष व्रत के दिन विधि-विधान से पूजा कर सकते हैं और दान-पुण्य के कार्यों में भाग ले सकते हैं।
यह लेख धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय आकलनों और उपलब्ध पारंपरिक जानकारियों पर आधारित है। NewsBag किसी भी प्रकार के दावे या परिणाम की पुष्टि नहीं करता। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या निर्णय से पहले योग्य विद्वान या विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

