By: Mala Mandal
देवघर जिले के चित्रा थाना क्षेत्र अंतर्गत कुकराहा गांव से आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव से जुड़ी एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। परिवार का भरण-पोषण करने की चिंता में डूबे एक मजदूर ने कथित रूप से ब्लेड से अपना ही गला काट लिया। गंभीर रूप से घायल अवस्था में उसे आनन-फानन में अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। घटना के बाद पूरे गांव में सनसनी फैल गई है, जबकि परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

मिली जानकारी के अनुसार कुकराहा गांव निवासी अर्जुन बावरी मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। वह रोज कमाने और रोज खाने वाले मजदूरों में शामिल था। ग्रामीणों के अनुसार पिछले कुछ समय से अर्जुन आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा था। लगातार बढ़ती घरेलू जिम्मेदारियों, काम की अनिश्चितता और पैसों की तंगी के कारण वह मानसिक रूप से काफी तनाव में रहने लगा था। बताया जा रहा है कि इसी तनाव के कारण उसने यह खौफनाक कदम उठा लिया।
खून से लथपथ हालत में मिला मजदूर
घटना के समय घर में मौजूद परिजनों ने अर्जुन को खून से लथपथ हालत में देखा। गले से लगातार खून बह रहा था। यह दृश्य देखकर परिवार के लोग घबरा गए और शोर मचाने लगे। शोर सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और तुरंत घायल मजदूर को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की गई। स्थानीय लोगों की मदद से अर्जुन बावरी को पहले नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार किया। लेकिन स्थिति गंभीर होने के कारण उसे बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पताल रेफर कर दिया गया। चिकित्सकों के अनुसार गले में गंभीर जख्म होने के कारण उसकी हालत नाजुक बनी हुई है।

आर्थिक संकट से टूट रहा गरीब तबका
ग्रामीणों का कहना है कि मजदूरी पर निर्भर परिवारों की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। कभी काम नहीं मिलने की परेशानी तो कभी बढ़ती महंगाई गरीब परिवारों की मुश्किलें बढ़ा रही हैं। कुकराहा गांव के कई लोगों ने बताया कि अर्जुन बावरी पिछले कई दिनों से तनाव में दिखाई दे रहा था। वह अक्सर परिवार की जिम्मेदारियों और आर्थिक परेशानियों की चर्चा करता था। ग्रामीणों के मुताबिक मजदूर वर्ग आज सबसे अधिक मानसिक दबाव झेल रहा है। रोजाना मेहनत करने के बावजूद परिवार चलाना कठिन होता जा रहा है। कई बार आर्थिक परेशानी इतनी बढ़ जाती है कि लोग मानसिक रूप से टूट जाते हैं। अर्जुन बावरी की घटना ने एक बार फिर समाज के सामने गरीबी और मानसिक तनाव की गंभीर तस्वीर पेश कर दी है।

पुलिस मामले की जांच में जुटी
घटना की सूचना मिलने के बाद चित्रा थाना पुलिस भी सक्रिय हो गई। पुलिस ने अस्पताल पहुंचकर घायल मजदूर के परिजनों और आसपास के लोगों से पूछताछ की। प्रारंभिक जांच में मामला आत्मघाती प्रयास का बताया जा रहा है। हालांकि पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि परिवार और ग्रामीणों से मिली जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। फिलहाल घायल मजदूर का इलाज जारी है और उसकी स्थिति पर डॉक्टर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

परिवार में पसरा मातम
इस घटना के बाद अर्जुन बावरी के परिवार में मातम का माहौल है। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव की महिलाएं और पड़ोसी परिवार को ढांढस बंधाने में जुटे हुए हैं। परिजनों का कहना है कि अर्जुन परिवार की जिम्मेदारियों को लेकर हमेशा चिंतित रहता था। आर्थिक परेशानी के कारण वह मानसिक रूप से काफी परेशान रहने लगा था। गांव के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि गरीब मजदूर परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधारने और मानसिक तनाव से जूझ रहे लोगों के लिए सहायता की व्यवस्था की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते ऐसे लोगों की समस्याओं पर ध्यान दिया जाए तो इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता है।

बढ़ रही मानसिक तनाव की घटनाएं
विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक तंगी और बेरोजगारी मानसिक तनाव को बढ़ाने का बड़ा कारण बन रही है। खासकर गरीब और मजदूर वर्ग में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि मानसिक तनाव को लेकर जागरूकता की कमी भी ऐसी घटनाओं को बढ़ावा देती है।

जरूरत इस बात की है कि समाज और प्रशासन मिलकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की मदद करें तथा मानसिक स्वास्थ्य को लेकर लोगों को जागरूक बनाया जाए। समय पर परामर्श और सहयोग मिलने से कई लोगों की जिंदगी बचाई जा सकती है।
फिलहाल कुकराहा गांव की यह घटना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग घायल मजदूर के जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं, वहीं यह घटना आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव से जूझ रहे गरीब परिवारों की वास्तविक स्थिति को भी उजागर कर रही है।

