By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
रांची। हेमन्त सोरेन ने सोमवार को झारखंड मंत्रालय में आयोजित नव नियुक्त इंटर एवं स्नातक प्रशिक्षित सहायक आचार्यों एवं आंगनबाड़ी पर्यवेक्षिकाओं के नियुक्ति-पत्र वितरण समारोह में शामिल होकर अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कक्षा 01 से 05 तक के लिए 160 तथा कक्षा 06 से 08 तक के लिए 156 प्रशिक्षित सहायक आचार्यों के अलावा 17 आंगनबाड़ी पर्यवेक्षिकाओं को नियुक्ति पत्र प्रदान किया।

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल नौकरी नहीं, बल्कि समाज और राज्य के समग्र विकास की एक बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि नव नियुक्त शिक्षक और पर्यवेक्षक सरकार के प्रतिनिधि के रूप में गांव-गांव और घर-घर जाकर समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाने का कार्य करेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड का बड़ा हिस्सा आदिवासी, दलित और पिछड़ा वर्ग बहुल क्षेत्र है, जहां वर्षों से विकास की गति अपेक्षाकृत धीमी रही है। ऐसे में शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के माध्यम से समाज को नई दिशा देना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने नवनियुक्त कर्मियों से अपील करते हुए कहा कि वे पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें।

शिक्षा व्यवस्था में हो रहा क्रांतिकारी सुधार
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि राज्य सरकार “सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस” योजना के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था के बुनियादी ढांचे में व्यापक सुधार कर रही है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए लगातार विद्यालयों में नियुक्तियां की जा रही हैं और शिक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि कई बार शिक्षक सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में जाने से कतराते हैं, लेकिन यदि राज्य के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाना है तो दुर्गम क्षेत्रों में कार्य करना ही होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक बच्चों के भविष्य को गढ़ने वाले शिल्पकार होते हैं और उनके हाथों में समाज की दिशा तय करने की शक्ति होती है।

पिछले चार महीनों में 9 हजार से अधिक नियुक्तियां
मुख्यमंत्री ने नियुक्ति प्रक्रिया को पारदर्शी बताते हुए कहा कि जहां देश के कई राज्यों में पेपर लीक जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं, वहीं झारखंड सरकार ने बीते चार महीनों में शिक्षा विभाग में 9 हजार से अधिक युवाओं को रोजगार दिया है। वहीं पिछले दो वर्षों में 16 हजार से अधिक नियुक्तियां की जा चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से रोजगार देने के लिए प्रतिबद्ध है और आने वाले समय में भी विभिन्न विभागों में नियुक्तियों की प्रक्रिया लगातार जारी रहेगी।

मंईयाँ सम्मान योजना से महिलाओं का सशक्तिकरण
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य का सर्वांगीण विकास महिलाओं को मुख्यधारा में लाए बिना संभव नहीं है। उन्होंने बताया that “झारखंड मुख्यमंत्री मंईयाँ सम्मान योजना” के तहत राज्य की करीब 60 लाख महिलाओं को प्रतिमाह आर्थिक सहायता दी जा रही है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन रही हैं।
उन्होंने कहा कि इस योजना का लाभ लेकर आज बेटियां कलेक्टर जैसे उच्च पदों तक पहुंच रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब वह दौर खत्म हो चुका है जब महिलाओं को केवल घर की चारदीवारी तक सीमित रखा जाता था। आज महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और सरकार उन्हें हरसंभव सहयोग दे रही है।

दुर्गम क्षेत्रों के बच्चों को तराशने की जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त शिक्षकों से कहा कि उन्हें ऐसे क्षेत्रों में कार्य करना होगा जहां संसाधनों की कमी और सामाजिक चुनौतियां अधिक हैं। उन्होंने कहा कि बच्चे कच्ची मिट्टी की तरह होते हैं और उन्हें बेहतर भविष्य देने की जिम्मेदारी शिक्षकों के कंधों पर होती है।
उन्होंने कहा कि राज्य में कुपोषण जैसी समस्याओं से लड़ने के लिए भी सभी विभागों को मिलकर काम करना होगा। यदि युवा ऊर्जा, समर्पण और ईमानदारी के साथ कार्य करेंगे तो झारखंड को नई दिशा मिलेगी।
समारोह में कई मंत्री और अधिकारी रहे मौजूद
इस अवसर पर राज्य के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर, श्रम नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग के मंत्री संजय प्रसाद यादव, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव उमा शंकर सिंह, निदेशक प्राथमिक शिक्षा मनोज कुमार रंजन सहित बड़ी संख्या में नवनियुक्त अभ्यर्थी और उनके परिजन उपस्थित रहे।

