By: Mala Mandal
रांची। झारखंड के सरकारी कार्यालयों और पुलिस थानों में वर्षों से खड़ी जर्जर एवं अनुपयोगी गाड़ियों को अब हटाने की तैयारी तेज हो गई है। राज्य सरकार ने 15 साल की सेवा अवधि पूरी कर चुके सरकारी वाहनों के व्यवस्थित निस्तारण की योजना बनाई है। इसके तहत पुराने, दुर्घटनाग्रस्त और मरम्मत के लायक नहीं बचे वाहनों की पहचान कर उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत कबाड़ में बदला जाएगा। परिवहन विभाग ने इस दिशा में पहल शुरू कर दी है। परिवहन सचिव राजीव रंजन ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर इस योजना को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

15 साल पुराने सरकारी वाहनों की होगी पहचान
झारखंड सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य सरकारी विभागों में लंबे समय से बेकार पड़े वाहनों को व्यवस्थित तरीके से हटाना है। राज्य के कई सरकारी कार्यालयों, विभागीय परिसरों और पुलिस थानों में ऐसी गाड़ियां खड़ी हैं, जो वर्षों पहले दुर्घटनाग्रस्त हो चुकी हैं या तकनीकी खराबी के कारण इस्तेमाल के लायक नहीं बची हैं। इन वाहनों की मरम्मत पर खर्च करना भी कई बार व्यावहारिक नहीं होता। इसके बावजूद वे सरकारी परिसरों में जगह घेरती रहती हैं। अब परिवहन विभाग ने ऐसे वाहनों की पहचान कर उनका नियमानुसार निस्तारण करने की प्रक्रिया तेज करने की पहल की है। योजना के तहत 15 वर्ष की सेवा अवधि पूरी कर चुके सरकारी वाहनों की सूची तैयार की जाएगी। इसके साथ ही ऐसे वाहनों को भी चिह्नित किया जाएगा, जिनकी मरम्मत संभव नहीं है और जिनका इस्तेमाल करना व्यावहारिक रूप से उचित नहीं रह गया है।

परिवहन सचिव राजीव रंजन ने अधिकारियों को दिए निर्देश
इस संबंध में बुधवार को रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन में परिवहन विभाग के सचिव राजीव रंजन की अध्यक्षता में राज्यस्तरीय नोडल पदाधिकारियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न सरकारी विभागों के नामित नोडल अधिकारी शामिल हुए। इसके अलावा एमएसटीसी (MSTC), सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) और पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधा (RVSF) के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया। बैठक में पुराने सरकारी वाहनों की पहचान, उनके दस्तावेजों की जांच, नीलामी और स्क्रैपिंग की पूरी प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई। परिवहन सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने विभागों में मौजूद पुराने और अनुपयोगी वाहनों की पहचान करें। साथ ही, नियमानुसार उनके निस्तारण के लिए जरूरी कार्रवाई सुनिश्चित करें।उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरी प्रक्रिया को केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप पूरा किया जाएगा।

पुलिस थानों में खड़े दुर्घटनाग्रस्त वाहन भी हटेंगे
सरकार की इस योजना में पुलिस थानों में लंबे समय से खड़े दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को भी शामिल किया जाएगा। अक्सर सड़क दुर्घटनाओं के बाद क्षतिग्रस्त वाहन पुलिस थानों या अन्य सरकारी परिसरों में खड़े रह जाते हैं। कई मामलों में ये वाहन इतने खराब हो जाते हैं कि उनकी मरम्मत कराना संभव नहीं होता। ऐसे वाहन वर्षों तक सरकारी जमीन पर पड़े रहते हैं। इससे न केवल परिसर में जगह की समस्या पैदा होती है, बल्कि जंग लगने और अन्य पर्यावरणीय समस्याओं की आशंका भी बनी रहती है। अब ऐसे वाहनों की भी पहचान की जाएगी और निर्धारित नियमों के अनुसार उनके निस्तारण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। हालांकि, केवल 15 वर्ष की उम्र पूरी होने के आधार पर हर वाहन को स्वतः स्क्रैप नहीं किया जाएगा। संबंधित नियमों और निर्धारित पात्रता के आधार पर ही वाहनों को स्क्रैपिंग की श्रेणी में रखा जाएगा।

MSTC और GeM पोर्टल से होगी प्रक्रिया
सरकारी वाहनों के निस्तारण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल व्यवस्था का सहारा लिया जाएगा। बैठक में एमएसटीसी और GeM के प्रतिनिधियों ने अधिकारियों को बताया कि किस तरह पुराने वाहनों का विवरण पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा और निर्धारित प्रक्रिया के तहत उनकी नीलामी की जाएगी। इसके लिए संबंधित विभागों को पहले पात्र वाहनों की जानकारी और आवश्यक दस्तावेज तैयार करने होंगे। इसके बाद निर्धारित पोर्टल पर वाहनों का विवरण अपलोड कर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। नीलामी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वाहनों को पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधा यानी RVSF केंद्र के माध्यम से नियमों के अनुसार नष्ट किया जाएगा। इससे पुराने वाहनों का निस्तारण व्यवस्थित और पारदर्शी तरीके से हो सकेगा।

सरकारी खजाने को भी होगा फायदा
झारखंड सरकार की इस पहल से सरकारी परिसरों में जगह खाली होने के साथ-साथ राजस्व संबंधी लाभ मिलने की भी उम्मीद है। पुराने वाहनों के निस्तारण से मिलने वाली राशि और इससे जुड़े वित्तीय एवं कर संबंधी प्रावधानों का लाभ सरकारी व्यवस्था को मिलेगा। परिवहन विभाग के माध्यम से देय कर की राशि भी सरकारी राजकोष में जमा होगी। इस तरह अनुपयोगी पड़े वाहनों का निस्तारण केवल सफाई अभियान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में भी मददगार साबित हो सकता है। इसके अलावा पुराने वाहनों के रखरखाव और अनावश्यक मरम्मत पर होने वाले खर्च में भी कमी आने की संभावना है।

पर्यावरण संरक्षण और सड़क सुरक्षा को मिलेगा बढ़ावा
पुराने और जर्जर वाहनों को सड़कों से हटाना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। निर्धारित मानकों के तहत वाहनों की स्क्रैपिंग होने से उनके उपयोगी धातु और अन्य हिस्सों का सुरक्षित तरीके से पुनर्चक्रण किया जा सकेगा। वहीं, तकनीकी रूप से अनुपयुक्त वाहनों के इस्तेमाल से होने वाले संभावित सड़क हादसों का खतरा भी कम करने में मदद मिलेगी। सरकार का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें पुराने वाहनों की पहचान से लेकर नीलामी और अंतिम निस्तारण तक प्रत्येक चरण में पारदर्शिता बनी रहे।

सभी विभागों को समयबद्ध कार्रवाई का निर्देश
बैठक में परिवहन सचिव ने सभी विभागीय नोडल पदाधिकारियों को पूरी प्रक्रिया की जानकारी लेकर अपने-अपने विभागों में आवश्यक कार्रवाई शुरू करने को कहा। अधिकारियों को स्क्रैपिंग से संबंधित दस्तावेजों, विभागीय जिम्मेदारियों और निर्धारित प्रक्रियाओं से भी अवगत कराया गया।
किसी तरह की तकनीकी परेशानी या प्रक्रिया को लेकर संदेह होने पर संबंधित अधिकारी परिवहन विभाग से मार्गदर्शन ले सकेंगे।

कुल मिलाकर झारखंड सरकार की यह पहल सरकारी कार्यालयों और पुलिस थानों में वर्षों से खड़ी धक्कामार एवं जर्जर गाड़ियों से छुटकारा दिलाने की दिशा में अहम कदम है। अब देखना होगा कि विभिन्न विभाग कितनी तेजी से अपने यहां मौजूद पात्र वाहनों की सूची तैयार कर निस्तारण की प्रक्रिया पूरी करते हैं। यदि यह योजना प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो सरकारी परिसरों की तस्वीर बदलने के साथ सरकारी संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल भी सुनिश्चित हो सकेगा।



