By: Mala Mandal
नई दिल्ली। कारगिल विजय दिवस के अवसर पर पूरा देश आज उन वीर सैनिकों को श्रद्धापूर्वक नमन कर रहा है, जिन्होंने वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध में अपने अदम्य साहस, पराक्रम और सर्वोच्च बलिदान से भारत की सीमाओं की रक्षा की थी। इस अवसर पर प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, रक्षा मंत्री, तीनों सेनाओं के प्रमुखों सहित कई राजनीतिक नेताओं और गणमान्य हस्तियों ने देश के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनके बलिदान को राष्ट्र के लिए अमर बताया। देशभर में आयोजित कार्यक्रमों में शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी संस्थानों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी कारगिल विजय दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित कर वीर जवानों की शौर्यगाथा को याद किया।

प्रधानमंत्री ने वीर सैनिकों के साहस को किया नमन
प्रधानमंत्री ने कारगिल विजय दिवस पर अपने संदेश में कहा कि कारगिल के वीर सैनिकों का साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति प्रत्येक भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अद्भुत वीरता का परिचय देते हुए दुश्मन को परास्त किया और देश की सीमाओं की रक्षा की। प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्र अपने वीर शहीदों का सदैव ऋणी रहेगा और उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति की प्रेरणा देता रहेगा।

राष्ट्रपति ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि
राष्ट्रपति ने भी कारगिल विजय दिवस पर देशवासियों को संबोधित करते हुए कारगिल युद्ध में शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि भारत के वीर जवानों ने असाधारण साहस, अनुशासन और समर्पण का परिचय देते हुए राष्ट्र की एकता और अखंडता की रक्षा की। उन्होंने सभी नागरिकों से देश के वीर सैनिकों के सम्मान और उनके परिवारों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का आह्वान किया।

रक्षा मंत्री और सैन्य अधिकारियों ने भी किया सम्मान
रक्षा मंत्री ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक और अन्य स्मृति स्थलों पर जाकर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर सेना, नौसेना और वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी कारगिल युद्ध में अपने प्राणों की आहुति देने वाले सैनिकों को याद किया। कई सैन्य प्रतिष्ठानों में पुष्पचक्र अर्पित किए गए और वीर जवानों के सम्मान में विशेष समारोह आयोजित हुए।

देशभर में आयोजित हुए श्रद्धांजलि कार्यक्रम
कारगिल विजय दिवस के अवसर पर विभिन्न राज्यों में श्रद्धांजलि सभाएं, तिरंगा यात्राएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम और देशभक्ति से जुड़े आयोजन किए गए। कई स्थानों पर युवाओं ने शहीद स्मारकों पर पहुंचकर मोमबत्तियां जलाईं और देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। स्कूलों और कॉलेजों में छात्रों को कारगिल युद्ध के इतिहास और भारतीय सेना की वीरता के बारे में जानकारी दी गई। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को देशभक्ति, अनुशासन और राष्ट्र सेवा का संदेश दिया।

क्या है कारगिल विजय दिवस?
हर वर्ष 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है। वर्ष 1999 में पाकिस्तान समर्थित घुसपैठियों ने जम्मू-कश्मीर के कारगिल क्षेत्र की ऊंची पहाड़ियों पर कब्जा करने का प्रयास किया था। भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन विजय’ के तहत कठिन परिस्थितियों में साहसिक अभियान चलाकर दुश्मनों को खदेड़ दिया और सभी रणनीतिक चोटियों पर दोबारा तिरंगा फहराया। करीब दो महीने तक चले इस युद्ध में भारतीय सेना के सैकड़ों जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया। उनकी वीरता और अदम्य साहस की बदौलत भारत ने ऐतिहासिक विजय प्राप्त की। तभी से प्रत्येक वर्ष 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है।

युवाओं के लिए प्रेरणा बना कारगिल युद्ध
कारगिल युद्ध केवल एक सैन्य विजय नहीं, बल्कि भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक माना जाता है। कैप्टन विक्रम बत्रा, लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडेय, ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव, राइफलमैन संजय कुमार सहित अनेक वीर सैनिकों की बहादुरी आज भी देशवासियों को प्रेरित करती है।
देशभर में युवाओं से आह्वान किया गया कि वे शहीदों के बलिदान से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।

पूरा देश बोला—शहीद अमर रहें
सोशल मीडिया पर भी कारगिल विजय दिवस पूरे दिन चर्चा का विषय बना रहा। लाखों लोगों ने वीर शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए देशभक्ति से जुड़े संदेश साझा किए। विभिन्न संगठनों और नागरिकों ने तिरंगा अभियान चलाकर सैनिकों के सम्मान में अपनी भावनाएं व्यक्त कीं।

कारगिल विजय दिवस केवल एक ऐतिहासिक दिन नहीं, बल्कि यह उन अमर वीरों के प्रति पूरे राष्ट्र की कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उनका साहस, बलिदान और देशप्रेम सदैव भारतवासियों के हृदय में अमर रहेगा।

