By: Mala Mandal
नई दिल्ली। आम जनता को महंगाई का एक और झटका लगा है। घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) सिलेंडर की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी गई है। समाचार एजेंसी पीटीआई के सूत्रों के अनुसार, 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये का इजाफा किया गया है। नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं। इस बढ़ोतरी के बाद देशभर के करोड़ों उपभोक्ताओं की रसोई का बजट प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

देश में पहले से ही खाद्य पदार्थों, सब्जियों, दूध और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ी हुई हैं। ऐसे में एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में हुई यह वृद्धि आम लोगों के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ साबित हो सकती है। खासतौर पर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर इसका सीधा असर देखने को मिलेगा।
29 रुपये महंगा हुआ घरेलू सिलेंडर
पीटीआई सूत्रों के मुताबिक, 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में 29 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। हालांकि अलग-अलग राज्यों में टैक्स और स्थानीय शुल्कों के आधार पर अंतिम कीमतों में कुछ अंतर हो सकता है। नई दरों के लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर खरीदने के लिए पहले की तुलना में अधिक भुगतान करना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि एलपीजी की कीमतों में होने वाली हर बढ़ोतरी सीधे घरेलू खर्चों को प्रभावित करती है क्योंकि गैस सिलेंडर आज अधिकांश भारतीय परिवारों की मूलभूत आवश्यकता बन चुका है।

महंगाई के बीच बढ़ी चिंता
देश में महंगाई पहले से ही एक बड़ा मुद्दा बनी हुई है। खाद्य तेल, दाल, सब्जियां और अन्य जरूरी सामानों की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। ऐसे माहौल में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ने से परिवारों के मासिक बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। गृहिणियों और आम उपभोक्ताओं का कहना है कि रसोई गैस के दामों में लगातार बढ़ोतरी से घरेलू खर्चों को संभालना मुश्किल होता जा रहा है। कई परिवार पहले ही बढ़ती महंगाई के कारण अपने खर्चों में कटौती करने को मजबूर हैं।
उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों पर असर
सरकार की प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत करोड़ों गरीब परिवारों को एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है। हालांकि सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि का असर इन लाभार्थियों पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि गैस की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं तो कई गरीब परिवार सिलेंडर की नियमित रीफिलिंग कराने में कठिनाई महसूस कर सकते हैं। हालांकि केंद्र सरकार समय-समय पर सब्सिडी और राहत उपायों की घोषणा करती रही है, लेकिन बढ़ती कीमतों को लेकर उपभोक्ताओं की चिंता बनी रहती है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार का प्रभाव
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों के अनुसार एलपीजी की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों से प्रभावित होती हैं। वैश्विक बाजार में कीमतों में वृद्धि होने पर इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ता है। इसके अलावा आयात लागत, परिवहन खर्च और मुद्रा विनिमय दरों में बदलाव भी घरेलू गैस की कीमतों को प्रभावित करते हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का सीधा प्रभाव घरेलू ईंधन की कीमतों पर देखने को मिलता है।
विपक्ष ने उठाए सवाल
एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में हुई वृद्धि को लेकर विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। विपक्ष का आरोप है कि लगातार बढ़ती महंगाई के बीच आम लोगों को राहत देने के बजाय सरकार कीमतों में बढ़ोतरी कर रही है। वहीं सरकार का पक्ष यह रहा है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और ऊर्जा बाजार की चुनौतियों को देखते हुए कीमतों का निर्धारण किया जाता है। सरकार का कहना है कि जरूरतमंद वर्गों को राहत देने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहायता जारी है।

उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया
कीमतों में बढ़ोतरी के बाद कई उपभोक्ताओं ने चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे अन्य खर्चों के साथ गैस सिलेंडर की बढ़ी कीमतें घरेलू बजट को और अधिक प्रभावित करेंगी।
कई लोगों का मानना है कि सरकार को महंगाई पर नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए ताकि आम नागरिकों को राहत मिल सके। सोशल मीडिया पर भी एलपीजी की बढ़ी कीमतों को लेकर लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

आगे क्या?
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में स्थिरता आती है तो भविष्य में कीमतों में राहत मिल सकती है। हालांकि फिलहाल उपभोक्ताओं को बढ़ी हुई दरों पर ही गैस सिलेंडर खरीदना होगा।
सरकार और तेल विपणन कंपनियों की ओर से समय-समय पर कीमतों की समीक्षा की जाती है। ऐसे में आने वाले महीनों में वैश्विक बाजार की स्थिति के आधार पर कीमतों में बदलाव संभव है।

घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की बढ़ोतरी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। महंगाई के दौर में रसोई गैस के दाम बढ़ने से घरेलू बजट पर सीधा असर पड़ने की संभावना है। खासकर मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों के लिए यह फैसला आर्थिक दबाव बढ़ाने वाला माना जा रहा है। अब लोगों की नजर सरकार और तेल कंपनियों की आगामी नीतियों पर रहेगी कि क्या भविष्य में उपभोक्ताओं को राहत मिल पाती है या नहीं।

