झारखंड–ओडिशा सीमा पर दहशत का साया

झारखंड–ओडिशा सीमा पर एक बार फिर मानव–वन्यजीव संघर्ष ने भयावह रूप ले लिया है। पश्चिमी सिंहभूम जिले के मझगांव प्रखंड अंतर्गत बेनीसागर क्षेत्र में एक खूंखार जंगली हाथी ने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया है। बीते एक सप्ताह से हाथी के लगातार हमलों में अब तक 21 लोगों की जान जा चुकी है। शुक्रवार को हुई ताजा घटना ने प्रशासन से लेकर आम लोगों तक को झकझोर कर रख दिया है।
एक सप्ताह में 21 मौतें, गांवों में मातम और भय
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, पिछले सात दिनों में इस हाथी के हमले में 19 ग्रामीणों की मौत पहले ही हो चुकी थी। शुक्रवार को दो और लोगों की दर्दनाक मौत के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 21 तक पहुंच गया। हाथी की हिंसक गतिविधियों के कारण पूरे क्षेत्र में भय का माहौल है और लोग अपने घरों से बाहर निकलने से डर रहे हैं।
शुक्रवार की सुबह का खौफनाक मंजर
शुक्रवार सुबह जंगली हाथी हाटगमरिया की ओर से खैरपाल होते हुए घोड़बंदा–बेनीसागर क्षेत्र में प्रवेश कर गया। हाथी के आने की खबर फैलते ही उसे देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण जमा हो गए। इसी दौरान अचानक हाथी ने भीड़ पर हमला कर दिया। इस हमले में 40 वर्षीय प्रकाश मालवा की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद अफरा-तफरी मच गई। सबसे हृदयविदारक दृश्य तब सामने आया, जब हाथी ने एक मासूम बच्चे को उठाया और उसे जंगल की ओर ले गया। बाद में बच्चे की भी मौत हो गई।
मासूम के शव के पास मंडराता रहा हाथी
बताया जा रहा है कि घटना के बाद हाथी बच्चे के शव के आसपास ही काफी देर तक घूमता रहा। इसी कारण रेस्क्यू टीम उस स्थान तक पहुंच नहीं सकी। यह दृश्य ग्रामीणों के लिए बेहद पीड़ादायक और डरावना था। हाथी के आक्रामक व्यवहार के चलते किसी को भी पास जाने की अनुमति नहीं दी गई।
तिलोकुटी गांव के पास जंगल में हाथी को घेरा गया
वन विभाग की टीमों ने कड़ी मशक्कत के बाद हाथी को बेनीसागर के तिलोकुटी गांव के पास एक छोटे से जंगल क्षेत्र में घेर लिया है। हालांकि, हाथी अभी भी पूरी तरह से काबू में नहीं आया है और किसी भी समय हमला कर सकता है।
बंगाल और गुजरात से बुलाई गई एक्सपर्ट टीमें
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए झारखंड वन विभाग ने पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा से विशेष प्रशिक्षित विशेषज्ञों को बुलाया है। इसके अलावा गुजरात के ‘वनतारा’ से भी एक्सपर्ट टीम मौके पर मौजूद है। इन सभी की मदद से हाथी को ट्रेंकुलाइज यानी बेहोश करने की कोशिश की जा रही है।
रेस्क्यू के दौरान एक्सपर्ट पर हमला
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एक बड़ा हादसा उस समय होते-होते टल गया, जब बंगाल से आए विशेषज्ञ सुखलाल बेहरा हाथी के करीब जाने की कोशिश कर रहे थे। अचानक हाथी ने उन्हें दौड़ा लिया और अपनी चपेट में ले लिया। ग्रामीणों के शोर मचाने पर हाथी पीछे हटा, जिससे उनकी जान बच गई, लेकिन वे गंभीर रूप से घायल हो गए।
घायल एक्सपर्ट को तत्काल ओडिशा के ररुआं अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। जेसीबी से जंगल में घेराबंदी, सूर्यास्त से पहले मिशन पूरा करने की कोशिश

हाथी को काबू में करने के लिए जेसीबी मशीन की मदद से जंगल क्षेत्र में घेराबंदी की जा रही है। वन विभाग की कोशिश है कि सूर्यास्त से पहले ही हाथी को बेहोश कर सुरक्षित स्थान पर ले जाया जाए, क्योंकि अंधेरा होने के बाद ऑपरेशन और भी जोखिम भरा हो सकता है।
रेड अलर्ट, सड़कें बंद, गांव खाली
हाथी के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने झारखंड–ओडिशा को जोड़ने वाली मुख्य सड़क को पूरी तरह बंद कर दिया है। आसपास के कई गांवों को खाली करा लिया गया है। पूरे इलाके में धारा 144 जैसी स्थिति बनी हुई है।
मझगांव थाना पुलिस, अंचल अधिकारी और प्रशासनिक टीमें मौके पर कैंप कर रही हैं। पुलिस लगातार भीड़ को नियंत्रित कर रही है ताकि कोई भी व्यक्ति हाथी के पास न जाए और कोई और जानमाल का नुकसान न हो।
मानव–हाथी संघर्ष पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर मानव–वन्यजीव संघर्ष को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जंगलों के सिमटते क्षेत्र, हाथियों के पारंपरिक मार्गों में बाधा और बढ़ती आबादी के कारण ऐसे हादसे लगातार सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दीर्घकालिक समाधान के बिना ऐसी घटनाएं भविष्य में और भी बढ़ सकती हैं।
यह समाचार विभिन्न स्थानीय स्रोतों और प्रशासनिक जानकारियों पर आधारित है। स्थिति तेजी से बदल सकती है। किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

