By: Mala Mandal
नई दिल्ली: खेल जगत में डोपिंग को लेकर नियम लगातार सख्त होते जा रहे हैं। राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (NADA) और अंतरराष्ट्रीय टेस्टिंग पूल में शामिल खिलाड़ियों के लिए अपनी लोकेशन और एक निश्चित समय स्लॉट पहले से साझा करना अनिवार्य होता है। इसी बीच सूत्रों के हवाले से जानकारी सामने आई है कि दो खिलाड़ियों ने डोप टेस्ट मिस कर दिया है। हालांकि राहत की बात यह है कि यह दोनों खिलाड़ियों का पहला मिस्ड टेस्ट बताया जा रहा है।

खेलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए विश्व स्तर पर डोपिंग रोधी नियम लागू किए जाते हैं। भारत में NADA इन नियमों की निगरानी करती है, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी यानी WADA के दिशा-निर्देश लागू होते हैं। इन नियमों के तहत टेस्टिंग पूल में शामिल खिलाड़ियों को हर दिन की अपनी लोकेशन की जानकारी देनी होती है ताकि कभी भी अचानक डोप टेस्ट किया जा सके।

दरअसल, टेस्टिंग पूल में शामिल खिलाड़ियों को एक निश्चित टाइम स्लॉट भी देना होता है। आमतौर पर यह एक घंटे का समय होता है, जिसमें खिलाड़ी को तय स्थान पर मौजूद रहना जरूरी होता है। यदि खिलाड़ी उस दौरान उपलब्ध नहीं मिलता, तो उसे ‘मिस्ड टेस्ट’ माना जाता है।

सूत्रों के मुताबिक जिन दो खिलाड़ियों के नाम सामने आए हैं, उन्होंने पहली बार टेस्ट मिस किया है। डोपिंग नियमों के अनुसार पहली बार टेस्ट मिस होने पर सीधे प्रतिबंध नहीं लगाया जाता। लेकिन लगातार तीन बार ऐसी गलती होने पर खिलाड़ी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। इसमें निलंबन से लेकर लंबे समय तक प्रतिबंध तक शामिल हो सकता है।

खेल विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार खिलाड़ी यात्रा, ट्रेनिंग शेड्यूल या तकनीकी कारणों से भी लोकेशन अपडेट नहीं कर पाते। हालांकि एजेंसियां इसे गंभीरता से लेती हैं क्योंकि डोप टेस्टिंग की पूरी प्रक्रिया खिलाड़ियों की उपलब्धता पर निर्भर करती है। यही वजह है कि खिलाड़ियों को नियमित रूप से अपनी जानकारी अपडेट करने की सलाह दी जाती है।
NADA और WADA के नियमों के अनुसार खिलाड़ियों को ऑनलाइन सिस्टम में अपनी जानकारी दर्ज करनी होती है। इसमें ट्रेनिंग स्थल, रहने की जगह, प्रतियोगिता स्थल और यात्रा से जुड़ी जानकारी शामिल रहती है। यदि किसी खिलाड़ी का शेड्यूल अचानक बदलता है तो उसे तुरंत अपडेट करना आवश्यक होता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि डोपिंग रोधी नियमों का उद्देश्य खिलाड़ियों को परेशान करना नहीं बल्कि खेलों में निष्पक्षता बनाए रखना है। पिछले कुछ वर्षों में कई बड़े खिलाड़ी डोपिंग मामलों में फंस चुके हैं, जिसके बाद निगरानी और अधिक कड़ी की गई है। यही कारण है कि टेस्टिंग पूल में शामिल खिलाड़ियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाती है।
खेल प्रशासकों का कहना है कि खिलाड़ियों को इन नियमों के प्रति पूरी तरह जागरूक रहना चाहिए। कई बार युवा खिलाड़ी तकनीकी प्रक्रियाओं को समझ नहीं पाते, जिससे ऐसी स्थिति बन जाती है। इसलिए एजेंसियां समय-समय पर खिलाड़ियों को ट्रेनिंग और दिशा-निर्देश भी देती हैं।

फिलहाल दोनों खिलाड़ियों के खिलाफ किसी बड़े एक्शन की जानकारी सामने नहीं आई है क्योंकि यह उनका पहला मिस्ड टेस्ट बताया जा रहा है। हालांकि अब इस मामले के सामने आने के बाद डोपिंग नियमों और खिलाड़ियों की जिम्मेदारियों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

विशेषज्ञों के मुताबिक यदि कोई खिलाड़ी लगातार लोकेशन अपडेट नहीं करता या बार-बार टेस्ट मिस करता है, तो यह डोपिंग नियमों का उल्लंघन माना जाता है। ऐसे मामलों में जांच के बाद अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती है। इसलिए खिलाड़ियों को अपने शेड्यूल और लोकेशन से जुड़ी जानकारी को लेकर बेहद सतर्क रहने की जरूरत होती है।
खेल जगत में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए डोपिंग रोधी नियमों को बेहद अहम माना जाता है। यही वजह है कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां लगातार खिलाड़ियों की निगरानी करती हैं। आने वाले दिनों में इस मामले पर और जानकारी सामने आ सकती है, लेकिन फिलहाल इसे पहली बार टेस्ट मिस होने का मामला माना जा रहा है।

