By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
जयपुर/जोधपुर: राजस्थान हाई कोर्ट ने स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और सर्वांगीण विकास को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने राज्य के स्कूलों की कैंटीन के साथ-साथ स्कूल गेट से 50 मीटर के दायरे में जंक फूड और ज्यादा फैट, शुगर व नमक यानी HFSS वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले का उद्देश्य बच्चों को अस्वास्थ्यकर खान-पान से बचाना और स्कूलों के आसपास स्वस्थ खाद्य वातावरण तैयार करना है।

स्कूल कैंटीन और आसपास के दुकानदारों पर सख्ती
राजस्थान हाई कोर्ट ने स्कूलों के अंदर और स्कूल गेट के आसपास बिकने वाले खाद्य पदार्थों को लेकर गंभीर चिंता जताई। अदालत के निर्देशों के मुताबिक स्कूल कैंटीन में ऐसे खाद्य पदार्थ नहीं बेचे जा सकेंगे, जिनमें फैट, चीनी और नमक की मात्रा अधिक होती है। इसके अलावा स्कूल गेट से 50 मीटर के दायरे में भी ऐसे खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने को कहा गया है। प्रतिबंध के दायरे में कार्बोनेटेड ड्रिंक्स, चिप्स, ट्रांस-फैट वाले बेकरी उत्पाद और अन्य जंक फूड शामिल हैं। यानी अब स्कूल परिसर ही नहीं, बल्कि स्कूल के आसपास का क्षेत्र भी बच्चों के लिए ज्यादा स्वस्थ बनाने की कोशिश की जाएगी।

बच्चों की सेहत को लेकर कोर्ट चिंतित
हाई कोर्ट ने बच्चों और नई पीढ़ी के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई है। अदालत ने जंक फूड की उपलब्धता के साथ-साथ बच्चों में बढ़ते स्क्रीन टाइम जैसे मुद्दों को भी गंभीरता से लिया। कोर्ट का मानना है कि बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए सिर्फ पढ़ाई और शिक्षा जरूरी नहीं है, बल्कि उनके खान-पान और जीवनशैली पर भी ध्यान देना आवश्यक है। बच्चों के बीच चिप्स, मीठे पेय, अत्यधिक नमक और चीनी वाले पैकेज्ड फूड की लोकप्रियता लगातार देखी जाती है। ऐसे में स्कूलों के आसपास इन खाद्य पदार्थों की आसानी से उपलब्धता बच्चों की खाने की आदतों को प्रभावित कर सकती है। हाई कोर्ट के निर्देशों का मकसद बच्चों को पौष्टिक और संतुलित भोजन के लिए प्रोत्साहित करना है।

हर स्कूल में बनेगी फूड सेफ्टी एंड न्यूट्रिशन कमेटी
कोर्ट ने सिर्फ जंक फूड की बिक्री पर रोक लगाने तक ही निर्देश सीमित नहीं रखे हैं। हर स्कूल में Food Safety and Nutrition Committee गठित करने का निर्देश दिया गया है। इस कमेटी में शिक्षक, अभिभावक और विद्यार्थियों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, स्कूलों को यह कमेटी निर्धारित समय सीमा के भीतर गठित करनी होगी और इसकी जानकारी शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। कमेटी का मुख्य उद्देश्य स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता और पोषण संबंधी व्यवस्था पर नजर रखना होगा।

कैंटीन में लगेगा न्यूट्रिशन वाला मेन्यू बोर्ड
हाई कोर्ट ने स्कूल कैंटीन में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए मेन्यू बोर्ड लगाने के भी निर्देश दिए हैं। इस बोर्ड पर खाद्य पदार्थों की कैलोरी, सामग्री और पोषण संबंधी जानकारी प्रदर्शित करनी होगी। इसके अलावा भोजन को समझने में विद्यार्थियों के लिए आसान बनाने के लिए ट्रैफिक-लाइट लेबलिंग सिस्टम लागू करने की बात भी सामने आई है। इससे बच्चों और अभिभावकों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि कौन सा खाद्य पदार्थ अधिक स्वस्थ है और किसका सेवन सीमित मात्रा में किया जाना चाहिए।

स्कूलों की नियमित जांच होगी
कोर्ट ने निर्देशों के प्रभावी पालन के लिए नियमित निरीक्षण की व्यवस्था पर भी जोर दिया है। जिला प्रशासन और ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों को स्कूलों में खाद्य पदार्थों की उपलब्धता और नियमों के पालन की निगरानी करनी होगी। रिपोर्टों के अनुसार मासिक निरीक्षण की व्यवस्था भी निर्देशों में शामिल है। इसका मतलब है कि अब स्कूल कैंटीन और स्कूल गेट के आसपास खाद्य पदार्थ बेचने वालों पर निगरानी बढ़ सकती है। नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित अधिकारियों द्वारा कार्रवाई की जा सकती है।

2020 के नियमों के पालन पर जोर
स्कूलों में सुरक्षित और संतुलित भोजन उपलब्ध कराने से जुड़े Food Safety and Standards (Safe Food and Balanced Diets for Children in School) Regulations, 2020 पहले से मौजूद हैं। हाई कोर्ट ने इन नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन की जरूरत पर जोर दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक अदालत ने इस बात पर चिंता जताई कि इन दिशा-निर्देशों का पर्याप्त रूप से पालन नहीं हो पाया है। इससे साफ है कि अदालत का जोर केवल नया प्रतिबंध लगाने पर नहीं, बल्कि पहले से मौजूद खाद्य सुरक्षा और पोषण संबंधी नियमों को जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू कराने पर भी है।

स्कूलों के माहौल को स्वस्थ बनाने की कोशिश
राजस्थान हाई कोर्ट का यह निर्देश बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाता है। स्कूल ऐसा स्थान है जहां बच्चे अपने दिन का बड़ा हिस्सा बिताते हैं। ऐसे में स्कूलों के भीतर और आसपास उपलब्ध भोजन का उनकी आदतों पर असर पड़ना स्वाभाविक है। अगर स्कूल परिसर और आसपास का वातावरण पौष्टिक भोजन के लिए अनुकूल बनाया जाता है, तो बच्चों में कम उम्र से ही स्वस्थ खान-पान की आदत विकसित करने में मदद मिल सकती है।

अब आगे क्या होगा?
हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद राजस्थान सरकार, शिक्षा विभाग, जिला प्रशासन और स्कूल प्रबंधन के सामने इन्हें प्रभावी तरीके से लागू करने की चुनौती होगी। स्कूलों को अपनी कैंटीन की खाद्य सूची की समीक्षा करनी होगी और प्रतिबंधित खाद्य पदार्थों की बिक्री रोकनी होगी। वहीं स्कूल गेट के 50 मीटर के दायरे में भी HFSS खाद्य पदार्थों की बिक्री रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन को निगरानी करनी होगी। फूड सेफ्टी कमेटियों के गठन और मेन्यू बोर्ड की व्यवस्था से स्कूलों में भोजन की गुणवत्ता और पोषण संबंधी जानकारी को लेकर जवाबदेही बढ़ सकती है।
कुल मिलाकर, राजस्थान हाई कोर्ट का यह फैसला बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षित स्कूल वातावरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब असली चुनौती इन निर्देशों को कागजों से निकालकर स्कूलों और उनके आसपास के क्षेत्रों में प्रभावी रूप से लागू करने की होगी।

