By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
कोलकाता/उत्तर 24 परगना। पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के कांचरापाड़ा स्थित एक निजी अंग्रेजी माध्यम स्कूल में पुलिस की छापेमारी के दौरान 1 करोड़ 77 लाख रुपये नकद बरामद होने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। इस कार्रवाई के बाद स्कूल प्रशासन, स्थानीय लोगों और राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने स्कूल के दो कर्मचारियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार, पुलिस को स्कूल परिसर में वित्तीय अनियमितताओं और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली थी। इसके बाद बुधवार देर रात पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की एक टीम ने स्कूल परिसर में छापेमारी की। यह कार्रवाई पूरी रात चलती रही और गुरुवार सुबह तक जारी रही। छापेमारी के दौरान जब स्कूल के विभिन्न कमरों, कार्यालयों और दस्तावेजों की जांच की गई, तब भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई।
नोटों की गिनती के लिए मंगानी पड़ी तीन मशीनें
बरामद नकदी की मात्रा इतनी अधिक थी कि पुलिस को उसकी गिनती के लिए बैंक से तीन नोट गिनने वाली मशीनें मंगानी पड़ीं। अधिकारियों ने कई घंटों की गिनती के बाद नकदी की कुल राशि लगभग 1 करोड़ 77 लाख रुपये बताई। इतनी बड़ी रकम किसी शैक्षणिक संस्थान के परिसर से मिलने के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह जांच का विषय है कि इतनी बड़ी राशि स्कूल परिसर में क्यों रखी गई थी और क्या इसके लिए वैध दस्तावेज उपलब्ध हैं या नहीं। जांच एजेंसियां अब नकदी के स्रोत और उसके उपयोग की जानकारी जुटाने में लगी हैं।

‘सिक रूम’ में कंडोम मिलने से बढ़ी चर्चा
छापेमारी के दौरान स्कूल के ‘सिक रूम’ यानी विश्राम कक्ष की एक अलमारी से कथित तौर पर कंडोम के पैकेट मिलने की खबर भी सामने आई है। हालांकि पुलिस ने इस संबंध में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन इस जानकारी के सामने आने के बाद मामला और अधिक चर्चा का विषय बन गया है। स्थानीय लोगों और अभिभावकों के बीच इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर बहस छिड़ी हुई है। हालांकि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी माना जा रहा है।

विधायक की पहल के बाद सामने आया मामला
सूत्रों के अनुसार, बीजपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक सुदीप्त दास द्वारा क्षेत्र के शैक्षणिक संस्थानों का डेटा बैंक तैयार करने की प्रक्रिया के दौरान इस स्कूल में संभावित अनियमितताओं की जानकारी सामने आई थी। बताया जा रहा है कि कुछ प्रारंभिक सूचनाओं के आधार पर प्रशासन को संदेह हुआ, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करने का निर्णय लिया। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि स्कूल के वित्तीय रिकॉर्ड और वास्तविक लेनदेन में कोई अंतर तो नहीं है। इसके लिए स्कूल के खातों, बैंक विवरण और शुल्क संग्रह से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है।

राजनीतिक बयानबाजी हुई तेज
मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है। भाजपा के एक विधायक ने दावा किया है कि स्कूल से बरामद हुई रकम किसी राजनीतिक दल के नेताओं का कथित काला धन हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियों की संभावित कार्रवाई से बचने के लिए यह पैसा स्कूल परिसर में रखा गया था। हालांकि इन आरोपों की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही पुलिस या किसी जांच एजेंसी ने ऐसी किसी संभावना को स्वीकार किया है। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस की ओर से ऐसे आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी करार दिया गया है। विश्लेषकों का मानना है कि जांच पूरी होने से पहले राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप मामले को और उलझा सकते हैं। इसलिए सभी की नजर अब पुलिस जांच के निष्कर्षों पर टिकी हुई है।

स्कूल प्रबंधन ने दी सफाई
मामले को लेकर स्कूल के प्रिंसिपल विकास चंद्र पाल ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि बरामद की गई नकदी छात्रों के दाखिले, ट्यूशन फीस और अन्य शुल्क के रूप में जमा हुई थी। उनके अनुसार यह राशि बैंक में जमा कराने की प्रक्रिया में थी, इसलिए अस्थायी रूप से स्कूल परिसर में रखी गई थी। प्रिंसिपल ने यह भी कहा कि उन्हें ‘सिक रूम’ में कंडोम मिलने की जानकारी नहीं है और इस बारे में वह कोई टिप्पणी नहीं कर सकते। उन्होंने जांच में पूरा सहयोग देने की बात कही है। हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि केवल मौखिक दावों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता। सभी दावों की दस्तावेजी जांच की जाएगी और उसके बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी।

दो कर्मचारी हिरासत में
जांच के दौरान पुलिस ने स्कूल के कैशियर अभीक नाथ और सहायक लेखाकार सायन घोष को हिरासत में लिया है। बताया जा रहा है कि पूछताछ के दौरान उनके बयानों में कुछ विसंगतियां पाई गईं, जिसके बाद पुलिस ने उनसे गहन पूछताछ शुरू की। अधिकारियों का कहना है कि दोनों कर्मचारियों से यह जानकारी जुटाई जा रही है कि नकदी कब और कैसे जमा की गई, उसका रिकॉर्ड क्या है तथा उसे बैंक में जमा क्यों नहीं कराया गया। यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या कानून का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

स्कूल परिसर में सुरक्षा बढ़ाई गई
घटना के बाद स्कूल परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। स्थानीय पुलिस के साथ केंद्रीय बल के जवानों को भी तैनात किया गया है ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच कई पहलुओं से की जा रही है। नकदी के स्रोत, वित्तीय दस्तावेजों की वैधता, कर्मचारियों की भूमिका और अन्य संभावित पहलुओं की जांच के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी।
फिलहाल 1.77 करोड़ रुपये की बरामदगी और स्कूल परिसर से जुड़े अन्य खुलासों ने पूरे राज्य में चर्चा का माहौल बना दिया है। अब सभी की निगाहें पुलिस जांच और उसके अंतिम निष्कर्ष पर टिकी हुई हैं।

