भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी (Mohammed Shami) एक बार फिर कानूनी विवादों में घिर गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को शमी और पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस उनकी पत्नी हसीन जहां (Haseen Jahan) की ओर से दायर उस याचिका पर भेजा गया है, जिसमें उन्होंने अपने और बेटी के लिए मिलने वाले मासिक गुजारा भत्ते (maintenance) में बढ़ोतरी की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
हसीन जहां ने साल 2018 में मोहम्मद शमी पर घरेलू हिंसा, बेवफाई और मारपीट जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। इसके बाद दोनों के बीच रिश्ते बिगड़ गए और मामला अदालत तक पहुंच गया।
कोर्ट के आदेश के बाद शमी हर महीने अपनी पत्नी और बेटी के लिए एक निश्चित रकम बतौर गुजारा भत्ता देते हैं। हालांकि, हसीन जहां का कहना है कि यह रकम अब उनकी जरूरतों और बेटी की शिक्षा के खर्चों के हिसाब से बहुत कम है। इसी वजह से उन्होंने गुजारा भत्ता बढ़ाने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि यह एक संवेदनशील मुद्दा है, जिसमें पति-पत्नी और बच्चे का भरण-पोषण जुड़ा हुआ है।
कोर्ट ने इस पर मोहम्मद शमी और पश्चिम बंगाल सरकार दोनों को नोटिस भेजते हुए उनसे जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहले राज्य सरकार बताए कि निचली अदालत में इस मामले की वर्तमान स्थिति क्या है और अब तक दोनों पक्षों के बीच कितनी रकम तय हुई है। इसके बाद ही आगे का आदेश जारी किया जाएगा।

हसीन जहां का पक्ष:
हसीन जहां ने अपने वकील के माध्यम से कहा कि उन्हें और उनकी बेटी को मिलने वाली आर्थिक सहायता उनकी दैनिक जरूरतों के लिए पर्याप्त नहीं है।
उनका कहना है कि शमी एक इंटरनेशनल क्रिकेटर हैं, जिनकी कमाई करोड़ों में है, इसलिए उन्हें अपने परिवार की देखभाल के लिए जिम्मेदारी उठानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बेटी की शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें ज्यादा आर्थिक सहयोग की आवश्यकता है।
हसीन जहां ने यह भी आरोप लगाया कि शमी ने कोर्ट के आदेश के बावजूद कई बार समय पर भुगतान नहीं किया।
मोहम्मद शमी की तरफ से क्या कहा गया?
शमी के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि क्रिकेटर अपने सभी कानूनी दायित्वों का पालन कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि शमी पहले से ही हर महीने निर्धारित रकम समय पर भेजते हैं और इस मामले को राजनीतिक या मीडिया प्रचार का हिस्सा बनाना गलत है। वकील ने यह भी कहा कि हसीन जहां द्वारा मांगी गई रकम “अवास्तविक और अत्यधिक” है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि मामले की सुनवाई निष्पक्ष रूप से की जाए।
बंगाल सरकार की भूमिका:
क्योंकि यह मामला पश्चिम बंगाल में दर्ज हुआ था, इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से भी स्थिति रिपोर्ट मांगी है।
राज्य सरकार को यह बताना होगा कि हसीन जहां की याचिका पर स्थानीय अदालत ने अब तक क्या कार्यवाही की है और आगे की सुनवाई कब निर्धारित है।
2018 से जारी विवाद:
साल 2018 में हसीन जहां ने मोहम्मद शमी पर कई गंभीर आरोप लगाए थे — जिनमें धोखाधड़ी, घरेलू हिंसा, दूसरी महिला से संबंध जैसे मामले शामिल थे।
इस विवाद के चलते शमी को उस समय बीसीसीआई (BCCI) की ओर से जांच का भी सामना करना पड़ा था। हालांकि, बाद में उन्हें मैच खेलने की अनुमति मिल गई थी।
इसके बाद से दोनों के बीच कानूनी लड़ाई जारी है और कई बार अदालत में सुनवाई हो चुकी है।
सोशल मीडिया पर बहस:
सुप्रीम कोर्ट के इस नोटिस के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
सोशल मीडिया पर लोग अलग-अलग राय दे रहे हैं। कुछ यूजर्स हसीन जहां के समर्थन में लिख रहे हैं कि एक मां को अपनी बेटी के भविष्य के लिए आर्थिक मदद मिलनी ही चाहिए, वहीं कई लोग यह भी कह रहे हैं कि शमी को कोर्ट के आदेशों का पालन करना चाहिए, लेकिन साथ ही दोनों पक्षों को समाधान का रास्ता बातचीत से निकालना चाहिए।
अगली सुनवाई:
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए चार हफ्ते बाद की तारीख तय की है।
इस दौरान दोनों पक्षों को अपना जवाब दाखिल करना होगा।
अगर कोर्ट को लगेगा कि रकम में संशोधन जरूरी है, तो वह नई राशि तय कर सकता है।
मोहम्मद शमी और हसीन जहां के बीच यह विवाद केवल पति-पत्नी का झगड़ा नहीं, बल्कि कानूनी और सामाजिक जिम्मेदारी का भी मामला बन चुका है।
जहां एक तरफ हसीन जहां अपने और बेटी के भविष्य को लेकर चिंतित हैं, वहीं शमी अपने पेशेवर करियर और निजी जीवन दोनों में संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।
अब देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या निर्णय देता है — क्या हसीन जहां की गुजारा भत्ता बढ़ाने की मांग को मंजूरी मिलती है या नहीं।

