नई दिल्ली। देशभर में बढ़ते आवारा कुत्तों (Stray Dogs) के हमलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा और ऐतिहासिक आदेश दिया है। अदालत ने कहा है कि स्कूल, अस्पताल, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन जैसी सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को तुरंत हटाया जाए, ताकि नागरिकों, खासकर बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश देशभर की राज्य सरकारों और नगर निगमों के लिए एक सख्त संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। अदालत ने कहा कि जनहित के साथ किसी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता, और नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है।
क्यों दिया गया यह आदेश?
हाल के महीनों में देश के कई हिस्सों से आवारा कुत्तों के हमलों की खबरें सामने आई हैं। खासतौर पर केरल, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे राज्यों में छोटे बच्चों और बुजुर्गों पर हमले के कई मामले दर्ज किए गए।
कुछ घटनाओं में तो मासूम बच्चों की मौत भी हो गई। इन मामलों पर दायर कई याचिकाओं की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि “सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षित रखना राज्य की जिम्मेदारी है।”
न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति अभय एस ओका की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा —
“किसी भी नागरिक को डर के माहौल में जीने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। सार्वजनिक संस्थानों और संवेदनशील क्षेत्रों से आवारा कुत्तों को हटाना प्रशासनिक जिम्मेदारी है।”

नगर निकायों को मिली जिम्मेदारी
अदालत ने सभी राज्य सरकारों, नगर निगमों, पंचायतों और स्थानीय निकायों को आदेश दिया है कि वे अगले दो हफ्तों में कार्ययोजना बनाकर रिपोर्ट पेश करें। इसके तहत:
1. स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशन, बस अड्डों, पार्कों और धार्मिक स्थलों से कुत्तों को हटाया जाएगा।
2. आवारा कुत्तों को शेल्टर होम या डॉग केयर सेंटर में रखा जाएगा।
3. रेबीज वैक्सीन और बर्थ कंट्रोल प्रोग्राम (Animal Birth Control) को तेज किया जाएगा।
4. जनता को भी जागरूक किया जाएगा कि वे सड़कों पर कुत्तों को खाना न डालें, क्योंकि इससे उनका झुंड बनता है और दुर्घटनाएं होती हैं।
पशु प्रेमियों की प्रतिक्रिया
जहां एक ओर यह आदेश नागरिक सुरक्षा के लिहाज से सराहा जा रहा है, वहीं पशु अधिकार कार्यकर्ताओं (Animal Rights Activists) ने इसे लेकर चिंता जताई है।
एनजीओ “पीपल फॉर एनिमल्स” ने कहा कि कुत्तों को हटाना समाधान नहीं है, बल्कि उनकी देखभाल के लिए वैज्ञानिक तरीके अपनाने चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि कुत्तों को शेल्टर होम में रखकर वैक्सीनेशन और नसबंदी (Sterilization) की प्रक्रिया को तेज किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया – “मानव जीवन सर्वोपरि”
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि पशु अधिकार और मानव सुरक्षा दोनों का संतुलन जरूरी है, लेकिन जब मामला मानव जीवन के खतरे का हो, तो प्राथमिकता इंसान को दी जाएगी। अदालत ने केंद्र सरकार से भी कहा कि वह सभी राज्यों के साथ मिलकर एक समान राष्ट्रीय नीति (National Policy) तैयार करे, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
देशभर में लोगों ने किया स्वागत
सोशल मीडिया पर यह फैसला तेजी से ट्रेंड कर रहा है। ट्विटर (अब एक्स) और फेसबुक पर कई लोगों ने सुप्रीम कोर्ट की सराहना की है।
एक यूजर ने लिखा —
“अब बच्चों को स्कूल जाने में डर नहीं रहेगा। यह फैसला देश के हर परिवार के लिए राहत की खबर है।”
वहीं, कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि कुत्तों के लिए अलग सुरक्षित जोन बनाए जाएं ताकि उन्हें भी नुकसान न पहुंचे
राज्यों ने शुरू की तैयारी
दिल्ली नगर निगम (MCD) और मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने इस आदेश के बाद अपने विशेष दस्ते तैयार किए हैं। नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि कुत्तों को पकड़ने और उन्हें शेल्टर होम तक ले जाने का अभियान अगले सप्ताह से शुरू किया जाएगा।
बिहार, उत्तर प्रदेश और केरल सरकारों ने भी अपने-अपने स्तर पर कमेटी गठित कर दी है, जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन की रिपोर्ट तैयार करेगी।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला मानव सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक संतुलित और व्यावहारिक कदम माना जा रहा है। हालांकि इसके लागू होने में स्थानीय प्रशासन की सक्रियता अहम होगी।
यदि यह निर्णय सही तरीके से लागू किया गया, तो न केवल लोगों की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि आवारा पशुओं की देखभाल के लिए भी एक संगठित व्यवस्था बन सकेगी।

