By: Vikash Kumar (Vicky)

देवघर झारखंड के देवघर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में शनिवार को दूसरे दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में शामिल होने के लिए भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन देवघर पहुंचे। देवघर एयरपोर्ट पर उनके आगमन पर भव्य स्वागत किया गया। इसके बाद उपराष्ट्रपति सड़क मार्ग से देवघर एम्स पहुंचे, जहां आयोजित समारोह में उन्होंने विद्यार्थियों को मेडल और प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर कुल 173 विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। उपराष्ट्रपति ने विद्यार्थियों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और देवघर एम्स की विकास यात्रा के लिए संस्थान की पूरी टीम को शुभकामनाएं दीं।
एयरपोर्ट पर हुआ भव्य स्वागत, कई गणमान्य रहे मौजूद
देवघर एम्स के दूसरे दीक्षांत समारोह को लेकर जिले में विशेष तैयारियां की गई थीं। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन के देवघर आगमन पर एयरपोर्ट पर उनका भव्य स्वागत किया गया। इसके बाद वे सड़क मार्ग से एम्स परिसर पहुंचे। उनके साथ झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार, मंत्री इरफान अंसारी, केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव, सांसद निशिकांत दुबे, देवघर एम्स के अध्यक्ष, निदेशक, संस्थान के पदाधिकारी और जिला प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे।

समारोह में चिकित्सा और नर्सिंग शिक्षा प्राप्त कर चुके विद्यार्थियों के लिए यह अवसर विशेष महत्व का रहा। विद्यार्थियों और संस्थान के अधिकारियों की मौजूदगी में दीक्षांत समारोह की औपचारिक शुरुआत हुई। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत की धुनों के साथ की गई। इसके बाद शैक्षणिक उपलब्धियां हासिल करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित करने की प्रक्रिया शुरू हुई।
173 विद्यार्थियों को मिला मेडल और प्रशस्ति पत्र
देवघर एम्स के दूसरे दीक्षांत समारोह में कुल 173 विद्यार्थियों को मेडल और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने विद्यार्थियों को सम्मानित किया। इनमें एमबीबीएस, बीएससी नर्सिंग, एमएससी नर्सिंग और पोस्टग्रेजुएट मेडिसिन के विद्यार्थी शामिल रहे।
संस्थान की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, सम्मानित विद्यार्थियों में 58 एमबीबीएस, 95 बीएससी नर्सिंग, 11 एमएसी नर्सिंग और 9 पोस्टग्रेजुएट मेडिसिन के विद्यार्थी शामिल थे। चिकित्सा और नर्सिंग के विभिन्न पाठ्यक्रमों में अपनी पढ़ाई पूरी करने वाले विद्यार्थियों के लिए यह समारोह उनके शैक्षणिक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव बना।

उपराष्ट्रपति के हाथों सम्मान प्राप्त करना विद्यार्थियों के लिए गौरव का क्षण रहा। मेडल और प्रशस्ति पत्र हासिल करने वाले विद्यार्थियों के चेहरे पर खुशी और उत्साह देखने को मिला। इस उपलब्धि के पीछे विद्यार्थियों की मेहनत, अनुशासन, शिक्षकों के मार्गदर्शन और परिजनों के सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
‘महादेव की नगरी देवघर से विशेष संबंध’
समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने देवघर को महादेव की नगरी बताते हुए यहां की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का उल्लेख किया। उन्होंने देवघर एम्स की विकास यात्रा की सराहना की और संस्थान से जुड़े सभी पदाधिकारियों, चिकित्सकों, शिक्षकों और कर्मचारियों को शुभकामनाएं दीं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि देवघर एम्स निरंतर विकास की नई गाथा लिखता रहे। उन्होंने संस्थान की पूरी टीम को भविष्य में और बेहतर उपलब्धियां हासिल करने के लिए शुभकामनाएं दीं। उनके संबोधन में विद्यार्थियों की शैक्षणिक सफलता और संस्थान की प्रगति को लेकर उत्साह दिखाई दिया।
उन्होंने पदक हासिल करने वाले विद्यार्थियों को विशेष बधाई दी। साथ ही विद्यार्थियों के परिजनों को भी उनकी सफलता के लिए बधाई देते हुए उनके योगदान को महत्वपूर्ण बताया। दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के लिए केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि चिकित्सा क्षेत्र में नई जिम्मेदारियों की शुरुआत भी है।

डॉक्टर बनकर मरीजों की सेवा करना है लक्ष्य
दीक्षांत समारोह में सम्मानित होने वाले विद्यार्थियों के लिए यह दिन यादगार रहा। एक विद्यार्थी ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि उपराष्ट्रपति के हाथों सम्मानित होने का अवसर मिलना उनके लिए हर्ष और गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि आगे चलकर एक कुशल डॉक्टर बनना और मरीजों की सेवा करना उनका लक्ष्य है।

चिकित्सा शिक्षा पूरी करने के बाद विद्यार्थियों के सामने अब अपने ज्ञान और कौशल को व्यवहार में उतारने की जिम्मेदारी होगी। मरीजों का बेहतर इलाज, जरूरतमंदों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति संवेदनशील बने रहना चिकित्सा पेशे की अहम जिम्मेदारियां हैं। ऐसे में दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों को इन दायित्वों की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।
देवघर एम्स जैसे संस्थान से प्रशिक्षित डॉक्टरों और नर्सिंग कर्मियों से क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। खासकर संथाल परगना और आसपास के इलाकों के लोगों के लिए उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार महत्वपूर्ण माना जाता है।
एम्स की स्वास्थ्य सेवाओं में बढ़ोतरी, हजारों मरीजों को मिला लाभ
दीक्षांत समारोह के दौरान देवघर एम्स के निदेशक ने संस्थान की स्वास्थ्य सेवाओं और उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इमरजेंसी और ट्रॉमा सेवाओं में 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इन सेवाओं के अंतर्गत कुल 6,103 मरीजों का इलाज किया गया।

इसके अलावा संस्थान में इन-पेशेंट सेवाओं के तहत 8,624 मरीजों को भर्ती किया गया। वहीं, ओपीडी में लगभग तीन लाख मरीजों को चिकित्सा परामर्श और उपचार संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। संस्थान में 3,523 सर्जरी भी की गईं। ये आंकड़े देवघर एम्स में मरीजों के इलाज और विभिन्न चिकित्सा सेवाओं के बढ़ते दायरे को दर्शाते हैं।

इमरजेंसी और ट्रॉमा सेवाओं में बढ़ोतरी से गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को उपचार उपलब्ध कराने की संस्थान की भूमिका भी सामने आती है। वहीं, ओपीडी में बड़ी संख्या में मरीजों का पहुंचना इस बात को रेखांकित करता है कि क्षेत्र के लोग विभिन्न बीमारियों के इलाज और विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श के लिए एम्स की सेवाओं का लाभ ले रहे हैं।
देवघर एम्स की विकास यात्रा को नई उम्मीद
देवघर एम्स का दूसरा दीक्षांत समारोह संस्थान की शैक्षणिक उपलब्धियों और स्वास्थ्य सेवाओं की प्रगति को सामने लाने वाला महत्वपूर्ण अवसर रहा। एक ओर 173 विद्यार्थियों को मेडल और प्रशस्ति पत्र देकर उनकी मेहनत को सम्मानित किया गया, तो दूसरी ओर संस्थान की चिकित्सा सेवाओं से जुड़े आंकड़ों ने इसकी बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया।

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन की मौजूदगी ने समारोह को विशेष महत्व दिया। विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देने के साथ उन्होंने देवघर एम्स की विकास यात्रा के लिए भी पूरी टीम का उत्साह बढ़ाया।
कुल मिलाकर, देवघर एम्स का दूसरा दीक्षांत समारोह चिकित्सा और नर्सिंग शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के लिए गौरवपूर्ण अवसर रहा। आने वाले समय में संस्थान से प्रशिक्षित चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के माध्यम से मरीजों को बेहतर सेवाएं मिलने की उम्मीद है। शिक्षा, चिकित्सा और जनसेवा के क्षेत्र में देवघर एम्स की निरंतर प्रगति संथाल परगना के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

