
भारत सहित पूरी दुनिया में आज का दिन बेहद खास रहने वाला है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा की रात एक दुर्लभ खगोलीय घटना घटित होने जा रही है। आज पूर्णिमा के साथ साल का अंतिम चंद्र ग्रहण भी लगेगा। खगोल विज्ञानियों और ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार चंद्र ग्रहण और पितृ पक्ष की शुरुआत एक साथ हो रही है। यह दुर्लभ योग अगली बार 17 साल बाद, वर्ष 2042 में बनेगा।
कब और कहाँ दिखाई देगा चंद्र ग्रहण?
भारतीय समयानुसार चंद्र ग्रहण रात 8 बजकर 13 मिनट से शुरू होगा और इसका समापन 11 बजकर 39 मिनट पर होगा। यह ग्रहण भारत के अधिकांश हिस्सों सहित एशिया, यूरोप, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया में देखा जा सकेगा। वैज्ञानिक दृष्टि से यह आंशिक चंद्र ग्रहण होगा, लेकिन धार्मिक दृष्टिकोण से इसका प्रभाव पूर्ण ग्रहण के समान माना जाएगा।
पितृ पक्ष की शुरुआत चंद्र ग्रहण के साथ
हिंदू पंचांग के अनुसार, कल से पितृ पक्ष की शुरुआत हो रही है। इस बार पितृ पक्ष का पहला श्राद्ध 8 सितंबर 2025 से आरंभ होकर 17 सितंबर 2025 तक चलेगा। मान्यता है कि इस अवधि में पूर्वजों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से पितरों को शांति और मोक्ष प्राप्त होता है।
चूंकि इस बार पितृ पक्ष की शुरुआत चंद्र ग्रहण के ठीक बाद हो रही है, इसलिए ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि यह समय और भी पवित्र एवं फलदायी होगा।
धार्मिक मान्यताएँ और प्रभाव
चंद्र ग्रहण को हिंदू धर्म में विशेष महत्व प्राप्त है।
ग्रहण के दौरान मंदिरों के द्वार बंद रखे जाते हैं और पूजा-पाठ स्थगित कर दी जाती है।
ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान, दान और मंत्र जाप का विशेष महत्व होता है।
ग्रहण काल में गर्भवती महिलाओं को सावधान रहने और मंत्र जप करने की सलाह दी जाती है।
पंडितों का मानना है कि इस बार का ग्रहण न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि सामाजिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसका असर सभी राशियों पर अलग-अलग पड़ेगा।
2042 में फिर मिलेगा ऐसा दुर्लभ योग
इतिहास गवाह है कि जब-जब चंद्र ग्रहण और पितृ पक्ष की शुरुआत एक साथ हुई है, तब-तब इसका गहरा धार्मिक और सांस्कृतिक प्रभाव पड़ा है। खगोलविदों के अनुसार, यह संयोग अब 17 साल बाद, 2042 में दोबारा बनेगा।
क्या करें और क्या न करें ग्रहण काल में?
करें:
ग्रहण से पहले और बाद स्नान जरूर करें।
पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान करें।
दान-पुण्य करें और गरीबों की मदद करें।
न करें:
ग्रहण के दौरान भोजन, जल और पकाई हुई चीज़ें न रखें।
मंदिरों में पूजा-पाठ न करें।
गर्भवती महिलाएं बाहर न निकलें।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
वैज्ञानिक मानते हैं कि चंद्र ग्रहण एक स्वाभाविक खगोलीय घटना है। जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, तब चंद्र ग्रहण होता है। हालांकि भारत में इसे धार्मिक आस्था और परंपराओं से भी जोड़कर देखा जाता है।
ज्योतिषीय प्रभाव
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार का चंद्र ग्रहण कई राशियों के लिए शुभ तो कई के लिए अशुभ भी साबित हो सकता है। तुला, कुंभ और मिथुन राशि के जातकों को लाभ होगा, जबकि सिंह और मकर राशि वालों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।


