
देवघर के सदर अस्पताल में मरीजों और परिजनों के साथ दुर्व्यवहार और बदसलूकी की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। बुधवार की सुबह फिर एक बार सदर अस्पताल चर्चा में आ गया, जब अस्पताल स्थित जांच घर 20 नंबर वार्ड में जांच कराने पहुंचे परिजनों के साथ अस्पताल कर्मियों ने मारपीट कर दी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है।
क्या है पूरा मामला
मामला बंधा बैद्यनाथपुर निवासी रमेश सिंह और उनके परिवार से जुड़ा है। रमेश सिंह ने बताया कि उनकी मां की तबीयत खराब होने के कारण उन्हें सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टर ने मरीज की पैथोलॉजी जांच कराने की सलाह दी थी। इसी क्रम में रमेश सिंह बुधवार सुबह अपनी मां की जांच कराने के लिए सदर अस्पताल के 20 नंबर वार्ड में स्थित जांच घर पहुंचे थे।
रमेश के अनुसार, वे आयुष्मान भारत योजना के तहत मिलने वाले पीले राशन कार्ड के माध्यम से जांच कराना चाहते थे। लेकिन वहां उपस्थित स्वास्थ्यकर्मियों ने कार्ड को फेंक दिया और कहा कि “इससे जांच नहीं होगा।”
जब रमेश सिंह ने इसका कारण पूछा, तो स्वास्थ्यकर्मियों ने अभद्रता शुरू कर दी। उन्होंने बताया कि विरोध करने पर धक्का-मुक्की और मारपीट की गई। इतना ही नहीं, जब रमेश सिंह ने घटना का वीडियो बनाना शुरू किया तो कर्मियों ने उनकी बहन प्रीति कुमारी के साथ भी हाथापाई की।

पुलिस ने शुरू की जांच
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। रमेश सिंह ने पूरे मामले की लिखित शिकायत पुलिस को दी है। पुलिस ने बताया कि शिकायत के आधार पर पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है और अस्पताल में लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले जाएंगे ताकि सच्चाई सामने लाई जा सके।
परिजनों का आरोप — ‘आयुष्मान कार्ड से जांच करने से मना किया’
परिजनों का आरोप है कि सदर अस्पताल के कुछ स्वास्थ्यकर्मी आयुष्मान कार्ड के माध्यम से मुफ्त जांच या इलाज करने से मना कर देते हैं और निजी रूप से पैसे लेने की मांग करते हैं। रमेश सिंह ने कहा,
“अगर हमारी कोई गलती है तो अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरे की जांच कर ली जाए। जो भी दोषी हो, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।”
लगातार विवादों में देवघर सदर अस्पताल
देवघर सदर अस्पताल पिछले कुछ महीनों से लगातार विवादों में घिरा हुआ है। हाल ही में अस्पताल के प्रसूति कक्ष (लेबर रूम) में भी गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया था, जहां पैसे नहीं देने पर महिला को समय पर इलाज नहीं मिला और उसकी मौत हो गई थी। उस मामले की जांच अभी चल ही रही थी कि बुधवार सुबह यह नई घटना सामने आ गई।
लोगों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन के ऊपर सख्त कार्रवाई की जरूरत है क्योंकि आए दिन मरीजों और उनके परिजनों के साथ दुर्व्यवहार की शिकायतें मिल रही हैं।
अस्पताल प्रबंधन क्या कहता है
इस घटना पर अस्पताल प्रबंधन का पक्ष फिलहाल सामने नहीं आया है। हालांकि अस्पताल सूत्रों का कहना है कि कई बार मरीजों के परिजन भी गाली-गलौज करते हैं जिससे विवाद बढ़ जाता है।
अस्पताल प्रशासन ने कहा है कि मामले की जांच के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर कार्रवाई की जाएगी।

जनता में आक्रोश, सोशल मीडिया पर भी चर्चा
घटना के बाद से ही देवघर के स्थानीय नागरिकों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं में आक्रोश देखा जा रहा है। कई लोगों ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि सरकारी अस्पताल में गरीब मरीजों को मुफ्त सुविधा मिलनी चाहिए, लेकिन भ्रष्टाचार और लापरवाही के कारण लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
कुछ लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि अस्पताल के सभी जांच केंद्रों और वार्डों में सीसीटीवी फुटेज की निगरानी नियमित रूप से की जाए ताकि ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो।
मरीजों की सुरक्षा पर उठे सवाल
यह घटना एक बार फिर अस्पताल में मरीजों की सुरक्षा और पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करती है। स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी योजनाओं जैसे आयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों को मुफ्त चिकित्सा सुविधा देना है, लेकिन अगर सरकारी अस्पतालों में ही इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
स्थानीय लोगों ने उपायुक्त और सिविल सर्जन से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है ताकि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हो और अस्पताल कर्मियों पर निगरानी रखी जा सके।
देवघर सदर अस्पताल में हुई मारपीट की यह घटना अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाती है। यह केवल एक व्यक्ति या परिवार की नहीं बल्कि उन सभी गरीब मरीजों की आवाज है जो सरकारी योजनाओं के बावजूद लापरवाही और भ्रष्टाचार के शिकार हो रहे हैं।
अब देखना यह है कि पुलिस और प्रशासन इस मामले में कितनी सख्ती दिखाता है और क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाता है या नहीं।

