By Vikash Kumar ( Vicky )
देवघर। दीनबंधु उच्च विद्यालय स्थित रबीन्द्र सभागार में हिन्दी विद्यापीठ बीएड महाविद्यालय के प्रशिक्षणार्थियों के सम्मान में एक भव्य एवं गरिमामय विदाई समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम उत्साह, अनुशासन और भावनात्मक क्षणों से भरपूर रहा, जिसमें विद्यालय परिवार, छात्र-छात्राओं, अतिथियों एवं शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता देखने को मिली।

कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय के नवम एवं दशम वर्ग की छात्राओं साक्षी सिंह, नीतू कुमारी, आस्था, मुस्कान, शिवानी एवं दिव्या कुमारी द्वारा प्रस्तुत सुमधुर स्वागत गीत से हुई। छात्राओं की मधुर आवाज और भावपूर्ण प्रस्तुति ने सभागार में उपस्थित सभी अतिथियों को मंत्रमुग्ध कर दिया और पूरे वातावरण को सांस्कृतिक ऊर्जा से भर दिया।
इसके पश्चात विद्यालय के सचिव संदीप कुमार गोस्वामी, जो इस कार्यक्रम के अध्यक्ष भी थे, ने सामान्य उपहार भेंट कर सभी अतिथियों को सम्मानित किया। उन्होंने अपने संबोधन में प्रशिक्षणार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि शिक्षक समाज का निर्माता होता है और प्रशिक्षण काल में अर्जित ज्ञान उनके भविष्य की नींव तय करता है।
विद्यालय के प्रधानाध्यापक काजल कांति सिकदार ने स्वागत भाषण देते हुए बीएड प्रशिक्षणार्थियों के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षणार्थियों ने विद्यालय में अपने प्रशिक्षण काल के दौरान अनुशासन, समर्पण और शिक्षण कौशल का उत्कृष्ट परिचय दिया है, जिससे विद्यालय परिवार को सकारात्मक ऊर्जा मिली।
विदाई समारोह को और भी भावनात्मक बनाते हुए नवम और दशम वर्ग के छात्र-छात्राओं ने विदाई गीत प्रस्तुत किया। गीत के बोल और भावनाओं ने प्रशिक्षणार्थियों सहित कई उपस्थित लोगों की आंखें नम कर दीं। यह क्षण सभी के लिए यादगार बन गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि देवघर सेंट्रल स्कूल के प्राचार्य सुवोध कुमार झा ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षक, छात्र-छात्राएं और अभिभावक—ये तीनों शिक्षा व्यवस्था के अभिन्न अंग हैं। जब इन तीनों के बीच बेहतर सामंजस्य स्थापित होता है, तब शिक्षा नई ऊंचाइयों को छूती है। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को भविष्य में एक जिम्मेदार और प्रेरणादायी शिक्षक बनने का संदेश दिया।
विशिष्ट अतिथि मैत्रेई किड्स स्कूल के निदेशक डॉ. एस. डी. मिश्रा ने कहा कि शिक्षक-शिक्षिकाओं को विद्यार्थियों के लक्ष्य के अनुरूप उन्हें प्रेरित करने के लिए व्यवहारिक उदाहरण प्रस्तुत करने चाहिए। शिक्षक का आचरण ही विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में सबसे बड़ी भूमिका निभाता है।
हंस ध्वनि कला केंद्र के निदेशक विश्वनाथ बनर्जी ने कहा कि एक सफल और लोकप्रिय शिक्षक बनने के लिए बहुमुखी प्रतिभा का विकास अत्यंत आवश्यक है। आज के समय में शिक्षक को केवल विषय ज्ञान तक सीमित न रहकर कला, संस्कृति और नैतिक मूल्यों का संवाहक भी बनना चाहिए।
अधिवक्ता गणेश कुमार उमर ने प्रशिक्षणार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि वे सभी आदर्श शिक्षक-शिक्षिका बनें और समाज में शिक्षा के माध्यम से सकारात्मक परिवर्तन लाएं। वहीं प्रोफेसर रामनंदन सिंह ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि विद्यालय में स्वच्छ, शांत एवं अनुशासित शैक्षिक वातावरण का निर्माण करना प्रत्येक शिक्षक का दायित्व है, जिससे विद्यार्थी आदर्शवादी और जिम्मेदार नागरिक बन सकें।

विद्यालय के सचिव संदीप कुमार गोस्वामी ने प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विषय का गहन अध्ययन कर जब शिक्षक कक्षा में अध्यापन करता है, तभी शिक्षा प्रभावशाली बनती है। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को निरंतर सीखते रहने और अपने कौशल को निखारने की सलाह दी।
इस अवसर पर प्रसून वसु, शत्रुघ्न प्रसाद सहित अन्य गणमान्य अतिथियों ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त किए और प्रशिक्षणार्थियों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम के अंत में शिक्षक सुनील कुमार सूर ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया, जबकि मंच संचालन शिक्षक जितेंद्र कुमार चंद्र ने कुशलता पूर्वक किया।
अध्यक्षीय भाषण के साथ ही कार्यक्रम का औपचारिक समापन हुआ। यह विदाई समारोह न केवल प्रशिक्षणार्थियों के लिए यादगार रहा, बल्कि विद्यालय के शैक्षिक एवं सांस्कृतिक वातावरण को भी सुदृढ़ करने वाला साबित हुआ।
