By: Vikash Kumar (Vicky)
देवघर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष बालमुकुंद सहाय ने मनरेगा योजना के नाम और स्वरूप में किए गए बदलाव को लेकर विपक्ष द्वारा लगातार किए जा रहे हमलों को पूरी तरह निराधार बताया है। देवघर में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यदि मनरेगा अपने मूल उद्देश्य में पूरी तरह सफल रहा होता, तो आज ग्रामीण भारत की तस्वीर कुछ और ही होती। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वर्षों से लागू इस योजना के बावजूद गांवों में अपेक्षित विकास नहीं हो सका, जो इसकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।

बालमुकुंद सहाय ने कहा कि मनरेगा का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन के साथ-साथ बुनियादी ढांचे का विकास करना था, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग रही है। आज भी देश के कई गांव बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। सड़क, पानी, आवास और रोजगार जैसे मुद्दों पर अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसकी सबसे बड़ी वजह योजना में लंबे समय से व्याप्त भ्रष्टाचार और प्रभावी निगरानी तंत्र का अभाव रहा है।
प्रदेश उपाध्यक्ष ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में मनरेगा के तहत खर्च होने वाली राशि का सही उपयोग नहीं हो पाया। कहीं कागजों पर काम हुआ तो कहीं आधे-अधूरे कार्य छोड़ दिए गए। कई मामलों में मजदूरों को समय पर मजदूरी तक नहीं मिली। उन्होंने कहा कि मजबूत सामाजिक और वित्तीय ऑडिट की व्यवस्था न होने के कारण भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला और योजना अपने लक्ष्य से भटकती चली गई।
बालमुकुंद सहाय ने स्पष्ट किया कि भाजपा सरकार ने इन्हीं खामियों को दूर करने के लिए मनरेगा में आवश्यक और व्यावहारिक बदलाव किए हैं। उन्होंने कहा कि योजना का उद्देश्य कभी खत्म नहीं किया गया, बल्कि उसे अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और परिणामोन्मुखी बनाया गया है। डिजिटल निगरानी, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर और ऑडिट प्रणाली को सशक्त करने जैसे कदम इसी दिशा में उठाए गए हैं।
उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन लोगों ने वर्षों तक मनरेगा को भ्रष्टाचार का अड्डा बनाए रखा, वही आज बदलाव पर सवाल खड़े कर रहे हैं। विपक्ष का यह रवैया ग्रामीण हितों से ज्यादा राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि भाजपा का लक्ष्य योजनाओं के नाम पर राजनीति करना नहीं, बल्कि गांवों तक विकास की वास्तविक रोशनी पहुंचाना है।

प्रदेश उपाध्यक्ष ने कहा कि भाजपा सरकार ग्रामीण विकास को लेकर स्पष्ट विजन के साथ काम कर रही है। मनरेगा के माध्यम से अब ऐसे कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है, जो गांवों की स्थायी जरूरतों को पूरा करें। जल संरक्षण, सड़क निर्माण, तालाब, सिंचाई व्यवस्था और ग्रामीण आधारभूत संरचना के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि गांव आत्मनिर्भर बन सकें।
बालमुकुंद सहाय ने यह भी कहा कि योजना में पारदर्शिता बढ़ने से वास्तविक जरूरतमंदों को लाभ मिल रहा है। मजदूरी का भुगतान सीधे बैंक खातों में होने से बिचौलियों की भूमिका खत्म हुई है। इससे गरीब और मजदूर वर्ग को समय पर और पूरा भुगतान मिल पा रहा है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में इन बदलावों का सकारात्मक असर गांवों में साफ दिखाई देगा।
संवाददाता सम्मेलन के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा सरकार का मानना है कि ग्रामीण भारत मजबूत होगा, तभी देश मजबूत बनेगा। इसी सोच के तहत मनरेगा सहित अन्य ग्रामीण योजनाओं को परिणाम आधारित बनाया जा रहा है। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वह भ्रम फैलाने के बजाय रचनात्मक सुझाव दे, ताकि ग्रामीण विकास की गति और तेज हो सके।
अंत में बालमुकुंद सहाय ने कहा कि मनरेगा में किए गए बदलाव गांवों के हित में हैं और इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। भाजपा का संकल्प है कि हर गांव तक विकास पहुंचे और ग्रामीणों को सम्मानजनक रोजगार के अवसर मिलें। उन्होंने भरोसा जताया कि जनता सच्चाई को समझ रही है और विपक्ष के निराधार आरोपों को नकार रही है।

