By: Vikash Kumar (Vicky)
नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच जारी टकराव बुधवार को उस समय और तेज हो गया, जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा में भाषण के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से जुड़ा एक पत्र और कई प्रकाशित पुस्तकों का हवाला दिया। इस मुद्दे को लेकर सदन में तीखी बहस हुई और हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही बाधित हो गई।

बुधवार को संसद में चल रही बहस के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी रहा। इसी बीच भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने सदन में अपने संबोधन के दौरान नेहरू और एडविना माउंटबेटन से संबंधित पुस्तकों का उल्लेख करते हुए कई गंभीर आरोप लगाए। उनके इस बयान पर कांग्रेस सांसदों ने कड़ा विरोध जताया, जिससे सदन का माहौल और गरमा गया।
बताया जा रहा है कि निशिकांत दुबे ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर भी कथित तौर पर नेहरू द्वारा लिखे गए एक पत्र को साझा किया। इस पत्र के सार्वजनिक होने के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी विवाद और तेज हो गया। दुबे ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि वह इस विषय पर विस्तार से बोलेंगे तो बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है। उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी।

लोकसभा में अपने भाषण के दौरान निशिकांत दुबे ने गांधी परिवार पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि देश को बांटने के लिए झूठ और छल का सहारा लिया गया। उन्होंने विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि पिछले तीन दिनों से संसद को एक अप्रकाशित पुस्तक के मुद्दे पर ‘बंधक’ बनाए रखा गया है। दुबे ने यह भी कहा कि सदन में प्रकाशित पुस्तकों के आधार पर भी चर्चा होनी चाहिए।

भाजपा सांसद के इन बयानों के बाद कांग्रेस सांसदों ने जोरदार विरोध दर्ज कराया। विपक्षी सदस्यों ने आरोप लगाया कि सदन की कार्यवाही के दौरान इस प्रकार के आरोप राजनीतिक माहौल को खराब करने वाले हैं। कांग्रेस सांसदों के विरोध के चलते सदन में हंगामे की स्थिति उत्पन्न हो गई और कुछ समय के लिए कार्यवाही बाधित करनी पड़ी।
विवाद बढ़ने पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने सदन के नियम 349 का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि कार्यवाही के दौरान किसी भी पुस्तक, पत्र या समाचार पत्र से ऐसे उद्धरण पढ़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती, जो सदन के विषय से सीधे संबंधित न हों। अध्यक्ष के निर्देश के बावजूद निशिकांत दुबे ने अपने आरोपों को सही ठहराने का प्रयास किया और कहा कि उनके द्वारा उद्धृत सामग्री प्रकाशित पुस्तकों पर आधारित है।

संसद में बढ़ते विवाद के कारण सरकार और विपक्ष के बीच पहले से जारी टकराव और गहरा गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी दिनों में इस मुद्दे पर और सियासी बयानबाजी देखने को मिल सकती है। संसद का बजट सत्र वैसे भी महत्वपूर्ण माना जाता है, जिसमें कई अहम विधेयकों और आर्थिक नीतियों पर चर्चा होनी है। ऐसे में सदन में बार-बार हंगामा होने से विधायी कार्य प्रभावित होने की आशंका बढ़ रही है।
वहीं, कांग्रेस और भाजपा के बीच ऐतिहासिक मुद्दों को लेकर होने वाली बयानबाजी नई नहीं है। दोनों दल अक्सर एक-दूसरे के नेताओं और ऐतिहासिक घटनाओं को लेकर आरोप लगाते रहे हैं। इस बार भी निशिकांत दुबे द्वारा नेहरू और गांधी परिवार से जुड़े मुद्दे उठाने से राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि संसद में ऐतिहासिक विषयों पर चर्चा लोकतंत्र का हिस्सा हो सकती है, लेकिन इस प्रकार के मुद्दों के कारण यदि सदन की कार्यवाही बाधित होती है तो इससे जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण विषय पीछे छूट सकते हैं। संसद का मूल उद्देश्य जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा और कानून निर्माण करना होता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने देश की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। जहां भाजपा सांसद अपने आरोपों पर कायम हैं, वहीं कांग्रेस ने इसे राजनीतिक हमला बताते हुए विरोध जारी रखने का संकेत दिया है। आने वाले दिनों में संसद में इस मुद्दे को लेकर और अधिक तनाव देखने को मिल सकता है।

फिलहाल, लोकसभा की कार्यवाही में आए व्यवधान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव अभी थमने वाला नहीं है। दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अडिग नजर आ रहे हैं, जिससे संसद के सुचारू संचालन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
