By:vikash kumar (vicky)
Holi 2026: फाल्गुन मास की पूर्णिमा के साथ आने वाला होली का पर्व केवल रंगों और उल्लास का त्योहार नहीं है, बल्कि यह आस्था, भक्ति और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक भी है। आमतौर पर होली का नाम आते ही भक्त प्रह्लाद और होलिका दहन की कथा याद की जाती है, लेकिन श्रीकृष्ण से जुड़ी एक और पौराणिक कथा भी इस पर्व के महत्व को गहराई से समझाती है। पूतना राक्षसी से संबंधित यह कहानी होली के आध्यात्मिक पक्ष को उजागर करती है।

प्रह्लाद और होलिका की कथा से शुरू होती है होली की परंपरा
होलिका दहन की कथा के अनुसार, असुरराज हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति से रोकने के लिए कई प्रयास किए। अंततः उसने अपनी बहन होलिका की मदद से प्रह्लाद को अग्नि में बैठाकर जलाने की योजना बनाई। लेकिन ईश्वर की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे और होलिका दहन हो गई। यह घटना बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक बनी और तभी से होलिका दहन की परंपरा प्रचलित हुई।

श्रीकृष्ण और पूतना राक्षसी की कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब भगवान श्रीकृष्ण बाल रूप में थे, तब कंस ने उन्हें मारने के लिए कई राक्षसों को भेजा। उन्हीं में से एक थी पूतना राक्षसी, जिसने सुंदर स्त्री का रूप धारण कर शिशु कृष्ण को विषपान कराने की कोशिश की। लेकिन श्रीकृष्ण ने उसका जीवन ही हर लिया। मान्यता है कि पूतना का दहन भी फाल्गुन मास के आसपास हुआ था, जिसे बुराई के अंत और मासूमियत की जीत के रूप में देखा जाता है। कई स्थानों पर इस कथा को होली पर्व से जोड़कर देखा जाता है।

रंगों की परंपरा और श्रीकृष्ण
श्रीकृष्ण और राधा के साथ ब्रज में खेली गई होली का भी विशेष महत्व है। कहा जाता है कि श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ रंग खेलकर प्रेम और आनंद का संदेश दिया। यही कारण है कि मथुरा और वृंदावन में होली का उत्सव कई दिनों तक चलता है। रंगों का यह पर्व सामाजिक भेदभाव मिटाकर सभी को एक सूत्र में बांधने का संदेश देता है।

होली का आध्यात्मिक और सामाजिक संदेश
होलिका दहन और पूतना वध की कथाएं यह बताती हैं कि सत्य और भक्ति की शक्ति सबसे बड़ी होती है। होली केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि मन की अशुद्धियों को जलाने और नए सिरे से जीवन शुरू करने का अवसर है। इस दिन लोग पुराने गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे को रंग लगाते हैं और रिश्तों में मिठास घोलते हैं।

परंपरा से आधुनिकता तक होली का महत्व
आज के समय में भी होली का महत्व कम नहीं हुआ है। देशभर में यह पर्व उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ यह त्योहार सामाजिक एकता और भाईचारे का भी प्रतीक है। होली हमें यह सिखाती है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयां आएं, अंततः सत्य और प्रेम की जीत होती है।

इस लेख में दी गई जानकारी पौराणिक कथाओं और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। NewsBag इन तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी धार्मिक मान्यता को अपनाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से परामर्श लें।
