By: Vikash Kumar (Vicky)
देवघर। जिले के कुंडा थाना क्षेत्र अंतर्गत नौलखा मंदिर के सामने चल रहे यातायात चेकिंग अभियान के दौरान पुलिस द्वारा एक वाहन चालक के साथ मारपीट करने का मामला सामने आया है। इस घटना में बाइक सवार युवक घायल हो गया, जिसके बाद उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। पीड़ित ने इस संबंध में पुलिस अधीक्षक को आवेदन देकर न्याय और कार्रवाई की मांग की है।

मिली जानकारी के अनुसार, सरवा थाना क्षेत्र के भटियारा गांव निवासी सरोज कुमार दास अपने घर से बाजार की ओर बाइक से जा रहे थे। इसी दौरान नौलखा मंदिर के पास यातायात पुलिस द्वारा चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुलिस वाहनों की जांच कर रही थी और आने-जाने वाले चालकों को रोककर दस्तावेजों की जांच की जा रही थी।

पीड़ित सरोज कुमार दास ने अपने आवेदन में बताया कि जैसे ही वह चेकिंग स्थल के पास पहुंचे, यातायात पुलिस ने उन्हें रुकने का इशारा किया। उन्होंने बताया कि वह अपनी बाइक को धीरे-धीरे साइड में लगा ही रहे थे कि तभी वहां मौजूद एक पुलिस जवान ने अचानक उन पर डंडे से हमला कर दिया। इस अप्रत्याशित हमले से वह जमीन पर गिर पड़े और गंभीर रूप से घायल हो गए।
घटना के बाद मौके पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों ने घायल युवक को संभाला और उसके परिजनों को सूचना दी। सूचना मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे और घायल को तत्काल इलाज के लिए देवघर सदर अस्पताल ले गए। अस्पताल में ऑन ड्यूटी डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार किया और उसकी स्थिति को स्थिर बताया।

इस घटना के बाद पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक को लिखित आवेदन देकर पूरी घटना की जानकारी दी है। अपने आवेदन में उन्होंने संबंधित पुलिस जवान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी गलती के उन पर हमला किया गया, जो पूरी तरह से अमानवीय और गैरकानूनी है।

इधर, मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने जांच के आदेश दे दिए हैं। एसपी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। पुलिस प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है, लेकिन किसी भी परिस्थिति में आम नागरिकों के साथ दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

स्थानीय लोगों में भी इस घटना को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि यातायात चेकिंग के नाम पर इस तरह की कार्रवाई उचित नहीं है। यदि कोई वाहन चालक नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन मारपीट करना पूरी तरह गलत है।
यह पहली बार नहीं है जब यातायात चेकिंग के दौरान इस तरह के आरोप सामने आए हैं। इससे पहले भी कई जगहों पर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है ताकि आम जनता का भरोसा पुलिस व्यवस्था पर बना रहे।

विशेषज्ञों का मानना है कि यातायात नियमों का पालन कराना जरूरी है, लेकिन इसके लिए संवेदनशील और जिम्मेदार व्यवहार भी उतना ही आवश्यक है। पुलिस और जनता के बीच बेहतर संबंध बनाए रखने के लिए संवाद और समझदारी की जरूरत होती है।
फिलहाल इस मामले में सभी की नजर पुलिस जांच पर टिकी हुई है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित पुलिस कर्मी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है।

