By: Vikash Mala Mandal
Chaitra Navratri 2026 Ashtami Bhog: चैत्र नवरात्रि का आठवां दिन यानी महाअष्टमी का पर्व हिंदू धर्म में बहुत ही पवित्र माना जाता है। इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार अष्टमी के दिन विधि-विधान से पूजा करने, भोग लगाने और कन्या पूजन करने से मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

नवरात्रि की अष्टमी पर घर-घर में कन्या पूजन और हवन का आयोजन किया जाता है। इस दिन छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उन्हें भोजन कराया जाता है और दक्षिणा दी जाती है। आइए जानते हैं कि महाअष्टमी के दिन मां महागौरी को कौन-कौन से भोग लगाने चाहिए और कन्या पूजन में कंजकों को क्या खिलाना शुभ माना जाता है।

महाअष्टमी का धार्मिक महत्व
नवरात्रि की अष्टमी को सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक माना जाता है। इस दिन मां महागौरी की पूजा करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-शांति आती है। मान्यता है कि अष्टमी के दिन किया गया पूजन और भोग देवी को बहुत प्रिय होता है और इससे घर में समृद्धि आती है।
मां महागौरी को लगाएं ये भोग
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां महागौरी को सफेद रंग की चीजें बहुत प्रिय होती हैं। इसलिए अष्टमी के दिन उन्हें दूध से बनी मिठाई, खीर, हलवा और नारियल का भोग लगाना शुभ माना जाता है। सूजी का हलवा, काले चने और पूरी का भोग भी अष्टमी के दिन विशेष रूप से लगाया जाता है। कई लोग इस दिन नारियल, फल और मिश्री भी चढ़ाते हैं। भोग लगाने के बाद उसे प्रसाद के रूप में सभी को बांटना चाहिए।

कन्या पूजन में कंजकों को क्या खिलाएं
अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन करने की परंपरा है। इस दिन 2 साल से 10 साल तक की कन्याओं को घर बुलाकर उनका पूजन किया जाता है। उन्हें देवी का रूप मानकर पैर धोए जाते हैं, तिलक लगाया जाता है और भोजन कराया जाता है। कन्या पूजन में आमतौर पर पूरी, सूजी का हलवा और काले चने खिलाए जाते हैं। इसके साथ फल, मिठाई और नारियल भी दिया जाता है। कई लोग कन्याओं को उपहार और दक्षिणा भी देते हैं।

भोग लगाते समय रखें ये बात ध्यान
भोग हमेशा साफ-सफाई से और श्रद्धा के साथ बनाना चाहिए। पूजा के समय लहसुन-प्याज का प्रयोग नहीं करना चाहिए। पहले मां को भोग लगाएं, उसके बाद ही प्रसाद ग्रहण करें। कन्या पूजन करते समय मन में श्रद्धा और सम्मान का भाव रखना सबसे जरूरी माना गया है।

महाअष्टमी पर हवन का महत्व
कई घरों में अष्टमी के दिन हवन भी किया जाता है। मान्यता है कि हवन करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सुख-समृद्धि आती है। हवन के बाद कन्या पूजन करना अधिक फलदायी माना जाता है।

यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों में पूजा विधि और भोग की परंपरा में भिन्नता हो सकती है। किसी भी विशेष पूजा या अनुष्ठान से पहले विद्वान या पंडित से सलाह अवश्य लें। newsbag.in इस जानकारी की पुष्टि नहीं करता।

