By: Vikash.Mala Mandal
देवघर के विश्व प्रसिद्ध बाबा मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंधन अब पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आ रहा है। हाल ही में सामने आए एक गंभीर मामले—गाजियाबाद से पकड़े गए पाकिस्तानी जासूस द्वारा बाबा मंदिर की रेकी किए जाने के खुलासे और मंदिर के दानपात्र में पाकिस्तानी करेंसी मिलने की घटना—ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। इसी के बाद मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ और हाईटेक बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

इसी क्रम में मंदिर से जुड़े सभी दुकानदारों, गुमास्ताओं, फोटोग्राफरों और अन्य सेवा प्रदाताओं का एक विस्तृत डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि इस पहल से मंदिर परिसर में होने वाली किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत नजर रखी जा सकेगी और जरूरत पड़ने पर त्वरित कार्रवाई भी संभव होगी।

सुरक्षा को लेकर प्रशासन की सख्ती
देवघर पुलिस और मंदिर प्रशासन ने संयुक्त रूप से सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की है। एसपी द्वारा स्वयं बाबा मंदिर परिसर का निरीक्षण किया जा चुका है और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई आवश्यक निर्देश भी जारी किए गए हैं। प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि मंदिर जैसे संवेदनशील और धार्मिक स्थल पर किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, हाल की घटनाओं को देखते हुए यह आशंका जताई जा रही है कि बाहरी तत्व मंदिर परिसर में सक्रिय हो सकते हैं। ऐसे में हर व्यक्ति की पहचान सुनिश्चित करना अब प्राथमिकता बन गई है।

लाउडस्पीकर से दी गई सूचना
पिछले एक सप्ताह से बाबा मंदिर प्रशासनिक भवन की ओर से लगातार लाउडस्पीकर के माध्यम से घोषणा की जा रही थी कि मंदिर परिसर में दुकान लगाने वाले सभी दुकानदार, तीर्थ पुरोहितों के सहायक (गुमास्ता), फूल-माला विक्रेता, अगरबत्ती दुकानदार और फोटोग्राफर अपना पहचान पत्र अनिवार्य रूप से जमा करें। इस घोषणा के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने अपने आधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड मंदिर थाना में जमा कर दिए हैं।
200 से अधिक लोगों ने जमा किए दस्तावेज
प्रशासनिक निर्देश के आलोक में अब तक करीब 200 से अधिक लोगों ने अपने पहचान पत्र जमा कर दिए हैं। इनमें मंदिर परिसर में सक्रिय विभिन्न श्रेणी के लोग शामिल हैं। बाबा मंदिर के पास अगरबत्ती की दुकान लगाने वाले एक दुकानदार, विकास झा ने बताया,
“हमें सूचना मिली थी कि आधार कार्ड और वोटर कार्ड जमा करना अनिवार्य है। आज अंतिम दिन था, इसलिए हमने जल्द आकर अपने दस्तावेज जमा कर दिए।”

चार श्रेणियों में तैयार होगा डेटाबेस
मंदिर प्रशासन द्वारा तैयार किए जा रहे इस डेटाबेस को चार अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया जाएगा, जिससे पहचान और निगरानी आसान हो सके।
दुकानदार
मंदिर परिसर में दुकान लगाने वाले सभी दुकानदारों को अपना आधार और वोटर कार्ड जमा करना अनिवार्य किया गया है। साथ ही, यदि कोई दुकानदार अपने यहां किसी अन्य व्यक्ति को काम पर रखता है, तो उस व्यक्ति का पहचान पत्र भी जमा करना जरूरी होगा।
फोटोग्राफर और स्टूडियो संचालक
मंदिर परिसर में फोटो खींचने वाले फोटोग्राफर और स्टूडियो संचालकों को भी अपने आधार कार्ड जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी बाहरी या संदिग्ध व्यक्ति इस कार्य में शामिल न हो।

गुमास्ता (सहायक)
तीर्थ पुरोहितों के साथ काम करने वाले गुमास्ताओं के लिए विशेष नियम बनाए गए हैं। इसमें संबंधित तीर्थ पुरोहित और गुमास्ता दोनों का आधार कार्ड और गुमास्ता का वोटर आईडी जमा करना अनिवार्य किया गया है।
फूल-माला और पूजा सामग्री विक्रेता
फूल-माला, अगरबत्ती और अन्य पूजा सामग्री बेचने वाले लोगों को भी इस प्रक्रिया के तहत लाया गया है ताकि मंदिर परिसर में काम करने वाले हर व्यक्ति का रिकॉर्ड उपलब्ध हो।
सिस्टम में सुरक्षित रखा जाएगा डेटा
मंदिर प्रशासन के अनुसार, जमा किए गए सभी दस्तावेजों को डिजिटल रूप से सिस्टम में सुरक्षित रखा जाएगा। इससे भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर इनका उपयोग किया जा सकेगा। डेटाबेस तैयार होने के बाद पुलिस और प्रशासन किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तुरंत संबंधित व्यक्ति की पहचान कर सकेगा।

बढ़ती भीड़ और अनियंत्रित गुमास्ता पर नियंत्रण
प्रशासन का एक और उद्देश्य मंदिर परिसर में बढ़ती भीड़ और विशेष रूप से गुमास्ताओं की अनियंत्रित संख्या पर नियंत्रण करना भी है।
पिछले कुछ समय से यह देखा जा रहा था कि मंदिर परिसर में गुमास्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जिससे व्यवस्था प्रभावित हो रही थी। अब पहचान पत्र अनिवार्य होने से यह स्पष्ट हो सकेगा कि कौन व्यक्ति अधिकृत है और कौन नहीं।
दुकान आवंटन की भी होगी जांच
इस डेटाबेस के माध्यम से यह भी जांच की जाएगी कि जिन लोगों को मंदिर परिसर में दुकान आवंटित की गई है, वे स्वयं दुकान चला रहे हैं या किसी अन्य के माध्यम से संचालित कर रहे हैं।यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कई मामलों में देखा गया है कि दुकान आवंटन के बाद उसे किसी तीसरे व्यक्ति को दे दिया जाता है, जिससे सुरक्षा संबंधी जोखिम बढ़ सकता है।

पुलिस और प्रशासन की संयुक्त रणनीति
देवघर पुलिस और मंदिर प्रबंधन मिलकर एक मजबूत और दीर्घकालिक सुरक्षा रणनीति तैयार कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह केवल एक शुरुआत है और आने वाले दिनों में सुरक्षा को और भी मजबूत किया जाएगा।
संभावना जताई जा रही है कि भविष्य में सीसीटीवी नेटवर्क को और विस्तारित किया जाएगा, साथ ही एंट्री-एग्जिट पॉइंट्स पर निगरानी बढ़ाई जाएगी।
संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी व्यक्ति की गतिविधि संदिग्ध पाई जाती है, तो उसके खिलाफ तुरंत सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए पुलिस को विशेष निर्देश दिए गए हैं।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
बाबा मंदिर देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
प्रशासन का मानना है कि पहचान पत्र आधारित यह व्यवस्था न केवल सुरक्षा को मजबूत करेगी बल्कि मंदिर परिसर में पारदर्शिता और अनुशासन भी बनाए रखेगी।
कुल मिलाकर, बाबा मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन अब पूरी तरह गंभीर नजर आ रहा है। पाकिस्तानी जासूसी इनपुट और संदिग्ध गतिविधियों के बाद उठाए गए ये कदम निश्चित रूप से मंदिर की सुरक्षा को मजबूत करेंगे।
पहचान पत्र अनिवार्य करने और डेटाबेस तैयार करने की यह पहल भविष्य में किसी भी खतरे को समय रहते रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
