By: Vikash, Mala Mandal
झारखंड के देवघर स्थित विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम मंदिर परिसर में प्रस्तावित दो नए फुट ओवर ब्रिज (FOB) के निर्माण को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मंदिर प्रांगण में निर्माण कार्य के तहत की जा रही खुदाई ने स्थानीय पुरोहितों, पंडा समाज और श्रद्धालुओं के बीच असंतोष की स्थिति पैदा कर दी है।

बताया जा रहा है कि प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने और आवागमन को सुगम बनाने के उद्देश्य से मंदिर परिसर में दो फुट ओवर ब्रिज बनाए जाने की योजना तैयार की गई है। इसी योजना के तहत हाल ही में मंदिर प्रांगण के अंदर खुदाई का कार्य शुरू किया गया, जिसके बाद विरोध के स्वर तेज हो गए हैं।
मंदिर से जुड़े पुरोहितों का कहना है कि जिस स्थान पर खुदाई की जा रही है, वहां प्राचीन काल की शिलाएं और संरचनाएं मौजूद हैं, जो धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उनका आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान इन शिलाओं को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जो कि न केवल सांस्कृतिक विरासत के साथ खिलवाड़ है, बल्कि धार्मिक भावनाओं को भी आहत करने वाला कदम है।

विरोध कर रहे पुरोहितों ने साफ तौर पर कहा है कि मंदिर परिसर कोई सामान्य स्थान नहीं है, बल्कि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य बेहद सोच-समझकर और पारंपरिक संरचना को सुरक्षित रखते हुए ही किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करना प्रशासन की प्राथमिकता है, तो इसके लिए वैकल्पिक मार्गों की तलाश की जानी चाहिए, न कि मंदिर के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ की जाए।

स्थानीय पंडा समाज के सदस्यों ने भी इस मुद्दे पर प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि मंदिर परिसर में बिना पर्याप्त परामर्श और सहमति के इस प्रकार का कार्य शुरू करना उचित नहीं है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इस निर्माण कार्य को तत्काल प्रभाव से रोका जाए और इस पर पुनर्विचार किया जाए।
वहीं दूसरी ओर, प्रशासन का मानना है कि सावन और अन्य विशेष अवसरों पर मंदिर में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, जिससे भीड़ प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन जाती है। इसी समस्या के समाधान के लिए फुट ओवर ब्रिज का निर्माण जरूरी है, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से दर्शन कराया जा सके। प्रशासन का यह भी कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान सभी आवश्यक सावधानियां बरती जा रही हैं और किसी भी ऐतिहासिक संरचना को नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा।

हालांकि, इस आश्वासन के बावजूद स्थानीय लोगों और पुरोहितों का विरोध थमता नजर नहीं आ रहा है। मंदिर परिसर में इस मुद्दे को लेकर माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है और स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। कई सामाजिक संगठनों ने भी इस विवाद में हस्तक्षेप करते हुए प्रशासन से संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक स्थलों पर विकास कार्यों को लेकर संतुलन बनाए रखना बेहद आवश्यक होता है। एक ओर जहां श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों की रक्षा करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। ऐसे में प्रशासन और स्थानीय समुदाय के बीच आपसी सहमति से ही इस विवाद का समाधान संभव है।

मंदिर से जुड़े जानकारों का कहना है कि बाबा बैद्यनाथ धाम देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसकी प्राचीनता सैकड़ों वर्षों पुरानी है। यहां की हर शिला, हर संरचना धार्मिक आस्था और इतिहास का प्रतीक मानी जाती है। ऐसे में किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य शुरू करने से पहले व्यापक अध्ययन और विशेषज्ञों की राय लेना जरूरी है।

फिलहाल, पुरोहितों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। वहीं प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचने के लिए आवश्यक कदम उठा रहा है।

अब देखना यह होगा कि इस विवाद का समाधान किस प्रकार निकलता है—क्या प्रशासन अपनी योजना पर आगे बढ़ेगा या फिर स्थानीय विरोध के मद्देनजर इस परियोजना में बदलाव किया जाएगा। फिलहाल, बाबा बैद्यनाथ मंदिर परिसर में फुट ओवर ब्रिज निर्माण को लेकर विवाद चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

